बचाव के दो तरीके: पानी कर रहा आपकी हड्डियां कमजोर, दांत हो रहे खराब; मस्तिष्क पर भी डाल रहा नकारात्मक प्रभाव
विशेषज्ञों की माने तो यह अत्याधिक भू-जल दोहन, भू-जल प्रदूषण सहित दूसरे कारणों से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस समस्या से दिल्ली-एनसीआर भी अछूते नहीं।
विस्तार
भू-जल में बढ़ता फ्लोराइड की मात्रा शरीर को दिव्यांग बना रहा। देश के लिए 11 राज्य इससे प्रभावित। इसके कारण समय से पहले हड्डियां कमजोर हो रहीं। हर उम्र के लोगों के दांत हो रहे खराब, मस्तिष्क सहित शरीर के दूसरे अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की माने तो यह अत्याधिक भू-जल दोहन, भू-जल प्रदूषण सहित दूसरे कारणों से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस समस्या से दिल्ली-एनसीआर भी अछूते नहीं। एम्स में रोज काफी मरीज इससे पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। इसमें से काफी मरीज की रीढ़ की हड्डी अंगूठी की तरह गोलाकार में मुड़ जाती है। ऐसे मरीजों की सर्जरी तक करनी पड़ती है। इस समस्या से निपटने के लिए 12 नवंबर से तीन दिनों के दुनिया भर के विशेषज्ञ जुटेंगे।
एम्स के रोग विषयक पारिस्थितिक विषाकतता निदान एवं अनुसन्धान सुविधा के सह संस्थापक डॉ. जावेद के कादरी ने बताया कि एम्स के क्लीनिकल ईकोटेक्सियोलॉजी फैसिलिटी ने 36 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर फ्लोरोसिस रिसर्च 2024 का आयोजन किया है। इसमें दुनिया भर के विशेषज्ञ जुटेंगे। उन्होंने कहा कि फ्लोराइड के कारण हड्डियां काफी कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा दूसरी काफी समस्याएं होती हैं।
दिल्ली-एनसीआर के ये जिले प्रभावित
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली के उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दक्षिण पश्चिमी दिल्ली, और पूर्वी दिल्ली, एनसीआर में फरीदाबाद सहित कई अन्य जिले में काफी इलाके के भूजल में फ़्लोराइड की मात्रा मानक से ज़्यादा पाई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि इन जिलों में सर्वे के दौरान पाया गया कि यहां रहने वाले कई बीमारियों से परेशान हैं। इनकी हड्डियां काफी कमजोर पाई गईं। रीढ़ सहित शरीर के दूसरे हिस्से की हड्डी टेढ़ी मेढ़ी पाई गई। कम उम्र के बच्चों के दांत टूट गए या उनमें छेद हो गया। इसके अलावा दूसरी परेशानी भी मिल रही है।
क्यों बढ़ रही है समस्या
- ज्यादातर जल स्रोतों में फ़्लोराइड प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह भूजल में चट्टानों के कटाव से आता है।
- आग या विस्फोट से पानी संदूषित हो सकता है
- अत्याधिक भूजल दोहन
- भूजल में प्रदूषण
- अन्य
मानक के तहत इतना होना चाहिए फ्लोराइड का स्तर
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के तहत - 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर
- भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) - 1 मिलीग्राम प्रति लीटर
- दांतों में पीलापन, छेद, भूरे धब्बे, और दांत टूटना
- हड्डियों और जोड़ों में समस्याएं
- ऑस्टियोपोरोसिस, गठिया, और जोड़ों में दर्द
- पीठ दर्द और जकड़न
- सुनने में कमी
- मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं
- शरीर के दूसरे अंगों में दिक्कत
- गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक
- अन्य समस्याएं
- पानी की गुणवत्ता की जांच करवाएं
- मानक से अधिक फ्लोराइड पाए जाने पर शुद्ध पानी के लिए विकल्प की तलाश करें