तीस हजारी बवाल: अब तत्कालीन एडीसीपी की पिटाई का वीडियो वायरल
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तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के दौरान उत्तरी जिला डीसीपी मोनिका भारद्वाज से बदसलूकी का वीडियो बृहस्पतिवार को वायरल होने के बाद शुक्रवार को उत्तरी जिले के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार का वीडियो वायरल हुआ है।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि हरेंद्र कुमार को बेल्ट व डंडों से पीटा जा रहा है। उनके साथ हाथापाई भी की गई। गौरतलब है कि तीस हजारी कोर्ट बवाल के बाद हरेंद्र कुमार का तबादला कर दिया गया है। उन्हें रेलवे उपायुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की एसआईटी की जांच में यह बात सामने आई है कि घटना के दिन दोपहर करीब 3.13 बजे अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार, सब्जी मंडी एसीपी राममेहर के साथ तीस हजारी कोर्ट पहुंचते हैं।
तब तक वकील हिंसक हो चुके थे। वकीलों ने लॉकअप को घेर रखा था और पुलिसकर्मियों से झगड़ा चल रहा था। वायरल हुए वीडियो में दिखाई दे रहा है कि वकील उनके साथ हाथापाई कर रहे हैं। कुछ ही देर में वकील उन्हें घेर लेते हैं। कोई उन्हें बेल्ट मार रहा है, कोई उन्हें मुक्का व थप्पड़ मार रहा है। एक वकील पीछे से उन्हें डंडा मारता है।
हरेंद्र कुमार वकीलों को समझाते है और शांत रहने के लिए कहते हैं। मगर उनके साथ हाथापाई बंद नहीं होती है। हालांकि कुछ वकील हाथ लंबे कर बचाने की कोशिश करते हैं। मगर उनके साथ हाथापाई बंद नहीं होती है।
आखिर में तीसरी बटालियन का एएसआई हवा में गोली चला देता है। इसके बाद वकीलों की भीड़ तितर-बितर हो जाती है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कुछ पुलिसकर्मी हरेंद्र कुमार का बचाव करते हुए उन्हें दूर ले जाते हैं। एसआईटी की जांच में यह बात सामने आई कि एक तरफ भीड़ जहां हरेंद्र कुमार पर हमला कर रही है लेकिन वे पुलिसकर्मियों को गोली नहीं चलाने की हिदायतें दे रहे थे।
फायरिंग के लिए तैयार हो गए थे पुलिसकर्मी
तीस हजारी बवाल मामले की जांच में यह बात सामने आई है कि जब वकील लॉकअप तोड़ने की कोशिश कर रहे थे तो तीसरी बटालियन के जवानों ने अपनी एसएसआर, एमपी5 और ग्लोक पिस्तौल जैसे हथियारों को चलाने के लिए कॉक कर लिए थे। इसी दौरान उत्तरी जिले के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार मौके पर पहुंच गए और उन्होंने पुलिसकर्मियों को रोक लिया था। हालांकि तब तक तीसरी बटालियन का जवान दो गोलियां चला चुका था।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक करीब 42 लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं। इनमें तीस हजारी कोर्ट के वेंडर, पुलिस जवान व वकील शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तीस हजारी कोर्ट की फुटेज को गहनता से देखा जा रहा है और फुटेज से आरोपियों की पहचान की जा रही है।
एसआईटी सदस्यों के फुटेज से पता चला है कि लॉकअप की सुरक्षा में तैनात तीसरी बटालियन के जवानों ने पहले पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया था ताकि भीड़ को हटाया व तितर-बितर किया जा सके। इसके बाद वकील नहीं माने और लॉकअप का गेट तोड़ दिया तो तीसरी बटालियन के एएसआई ने हवा में दो गोलियां चला दी थीं। एक गोली लॉकअप के लोहे के एंगल से टकराकर वकील को लग गई थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र ने देखा कि तीसरी बटालियन के पुलिसकर्मी अपने हथियार कॉक कर गोली चलाने को तैयार थे। वह पुलिस जवानों पर चिल्लाए और पीछे रहने के निर्देश दिए। उन्होंने बिना हथियारों के मौजूद पुलिसकर्मियों को आगे कर लिया था, जबकि हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों को पीछे कर दिया था।
उन्नाव दुष्कर्म के आरोपी लॉकअप में थे
पुलिस सूत्रों के अनुसार तीस हजारी बवाल के दौरान लॉकअप में करीब 155 कैदी थे। बताया जा रहा है कि इनमें उन्नाव दुष्कर्म का आरोपी कुलदीप सेंगर भी मौजूद था। पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर इन इन कैदियों को लॉकअप से निकाला था। लॉकअप में धुआं भर गया था। इससे पुलिसकर्मी व कैदियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।