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हाइब्रिड युद्ध के दौर में संस्कृति और विरासत की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग: हुसनैन
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नई दिल्ली। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा कि हाइब्रिड युद्ध के दौर में संस्कृति और विरासत की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है। यह बात उन्होंने आईजीएनसीए में मेजर (सेवानिवृत्त) सरस त्रिपाठी की पुस्तक ‘गार्डियन्स ऑफ ग्लोरी: हेरिटेज एंड द आर्म्ड फोर्सेज इन कश्मीर’ के लोकार्पण पर कही।
हसनैन ने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को सभ्यतागत विरासत मिटाने का प्रयास बताया तथा अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा, शारदा पीठ के पुनर्जीवन और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण को सेना की बड़ी उपलब्धियां गिनाया। आईजीएनसीए अध्यक्ष रामबहादुर राय ने पुस्तक को कश्मीर के इतिहास व विरासत को समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय के कला एवं अभिकल्प संकाय के डीन प्रो. रमेश सी गौर ने कहा कि चार वर्षों के शोध पर आधारित यह पुस्तक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में विरासत संरक्षण में सेना की भूमिका को उजागर करती है। लेखक सरस त्रिपाठी ने बताया कि यह पुस्तक आईजीएनसीए की शोध परियोजना से विकसित हुई है। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सैन्य अधिकारियों व शोधार्थियों ने भाग लिया। संवाद
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हसनैन ने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को सभ्यतागत विरासत मिटाने का प्रयास बताया तथा अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा, शारदा पीठ के पुनर्जीवन और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण को सेना की बड़ी उपलब्धियां गिनाया। आईजीएनसीए अध्यक्ष रामबहादुर राय ने पुस्तक को कश्मीर के इतिहास व विरासत को समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
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दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय के कला एवं अभिकल्प संकाय के डीन प्रो. रमेश सी गौर ने कहा कि चार वर्षों के शोध पर आधारित यह पुस्तक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में विरासत संरक्षण में सेना की भूमिका को उजागर करती है। लेखक सरस त्रिपाठी ने बताया कि यह पुस्तक आईजीएनसीए की शोध परियोजना से विकसित हुई है। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सैन्य अधिकारियों व शोधार्थियों ने भाग लिया। संवाद
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