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बुराड़ी में बच्ची से रेप के मामले मे कोर्ट ने कहा क्यों न एसआईटी को सौंप दी जाए जांच

Wed, 17 Aug 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 17 Aug 2016 12:09 AM IST
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In the case of child rape in Burari why the Court should not be handed over to SIT probe
कोर्ट

हाईकोर्ट ने बुराड़ी क्षेत्र में 14 वर्ष की बच्ची से रेप व हत्या मामले की जांच एसआईटी को सौंपने व दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर दिल्ली पुलिस व बुराड़ी थानाध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।

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न्यायमूर्ति एके पाठक ने यह निर्देश डीसीडब्ल्यू द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। अदालत ने पुलिस को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच क्यों न एसआईटी को सौंप दी जाए।
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इसके अलावा डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष के खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई और क्यों न प्राथमिकी रद्द कर दी जाए। इतना ही नहीं अदालत ने पीड़िता के परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने दोनों पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के अलावा सरकारी वकील को एसआईटी के गठन पर भी दिशा-निर्देश लेने का निर्देश देते हुए सुनवाई 26 सितंबर तय की है।

डीसीडब्ल्यू ने दायर याचिका में बुराड़ी के संबंधित पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए रेप से पीड़ित 14 वर्षीय बच्ची की नृशंस हत्या की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाने का आग्रह किया है। 

हाईकोर्ट ने थानाध्यक्ष को जारी किया नोटिस

In the case of child rape in Burari why the Court should not be handed over to SIT probe
कोर्ट - फोटो : file photo

याचिका में पीड़ित परिवार की सुरक्षा व मुआवजे के अलावा डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष के खिलाफ बुराड़ी थानाध्यक्ष द्वारा प्राथमिकी को रद्द करने का आग्रह किया गया है।

डीसीडब्ल्यू की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने अदालत को बताया कि मामले की जांच एसआईटी को सौंपना जरूरी है क्योंकि पुलिस पीड़िता के माता-पिता को भयभीत करने की कोशिश कर रही है।

पेश मामले के अनुसार, 14 वर्षीय बच्ची को दिसंबर 2015 में अपहरण कर 12 दिन तक रेप किया गया। उसके बाद 15 मई 2016 को उसका पुन: अपहरण कर रेप किया गया। 

पुलिस ने मामले में 19 मई को मामला दर्ज किया। मामला डीसीडब्ल्यू में पहुंचा तो पुलिस से जवाब मांगा गया। पुलिस पर आरोप लगा कि उसने पीड़िता को अपना बयान बदलने के लिए दबाव बनाया। 

उधर पुलिस ने 22 दिनों के बाद आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया। इतना ही नहीं पुलिस ने पीड़िता के नाम का खुलासा करने पर डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।

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