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हेराल्ड हाउस खाली करने के मामले में एजेएल की अपील पर फैसला सुरक्षित

Mon, 18 Feb 2019 09:42 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 18 Feb 2019 09:42 PM IST
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In case of evacuating the Herald House Decision reserved on the appeal of AJL
नेशनल हेराल्ड हाउस
दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल हेराल्ड हाउस खाली करने के मामले में एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) की अपील पर याची व केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। एजेएल ने हेराल्ड हाउस खाली करने संबंधी आदेश को चुनौती दी है।
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हाईकोर्ट के सिंगल जज ने 21 दिसंबर को अपने फैसले में दो सप्ताह के अंदर हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश एजेएल को दिया था। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को तीन दिन के भीतर लिखित दलीलें पेश करने का आदेश दिया है। 
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मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन एजेएल 2008 में बंद कर चुका था और कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। 
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कंपनी ने लीज की शर्तों का उल्लंघन कर हेराल्ड को किराये पर दिया था। उनका यह भी तर्क था कि यह संपत्ति समाचार पत्र प्रकाशन व प्रिंटिंग के लिए एजेएल को दी गई थी लेकिन उसने यह काम बंद कर दिया था। 

यंग इंडियन का निर्माण एजेएल के स्वामित्व वाले हेराल्ड हाउस को हथियाने की मंशा से किया गया था। एजेएल के 99 फीसदी शेयर बेहद चतुराई से यंग इंडियन को ट्रांसफर किये गए। 

इससे करीब 413 करोड़ की संपत्ति का हित यंग इंडियन को मिल गया था। इस गोरखधंधे को सामने लाना बेहद जरूरी है। दूसरी ओर एजेएल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र की दलीलों को खारिज करते हुए कहा था कि कंपनी के शेयर ट्रांसफर होने का मतलब उसकी संपत्ति शेयरधारकों के नाम होना नहीं है। 

शेयर धारक किसी कंपनी की संपत्ति के मालिक नहीं होते। याची का यह भी कहना था कि नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन वित्तीय तंगी के कारण बंद किया गया था। वित्तीय हालात सुधरने के बाद नेशनल हेराल्ड, नवजीवन व डिजिटल संस्करण भी शुरू किए जा चुके हैं। ऐसे हालात में लीज रद्द करना गलत है।

एजेएल ने केंद्र सरकार के 30 अक्तूबर के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। केंद्र सरकार ने एजेएल को 15 नवंबर तक हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया था। एजेएल का तर्क था कि सरकार का नोटिस बदनियती से प्रेरित है। हाईकोर्ट ने इस याचिका को 21 दिसंबर को खारिज कर दिया था।
 
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