चूक पड़ी भारी, बुलेट प्रूफ जैकेट होती तो बच जाती अख्तर की जान
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बदमाशों की सूचना पर पहुंची पुलिस यदि बुलेट प्रूफ जैकेट पहने होती तो दारोगा अख्तर खान की जान बच सकती थी। लेकिन पुलिस की यह चूक दारोगा पर भारी पड़ गई। बदमाशों ने जिन हथियारों से पुलिस पर फायरिंग की है, वे आधुनिक नहीं थे।
मौके से 12 और 315 बोर के कारतूस बरामद किए गए हैं। दरअसल, पुलिस विभाग हर थाने में बुलेट प्रूफ जैकेट का इंतजाम रखता है। अगर किसी इलाके में ज्यादा अपराध होते हैं या अपराधियों की संख्या अधिक होती है तो थाने में उसी हिसाब से बुलेट प्रूफ जैकेट मौजूद रहती हैं।
दादरी कोतवाली में भी बुलेट प्रूफ जैकेट का इंतजाम था। अब सवाल उठता है कि जब पुलिस को यह जानकारी मिल गई थी कि नई आबादी की तंग गलियों में बदमाश छिपे हैं। पुलिस को यह भी पता था कि वहां पहले भी कई बार दबिश के दौरान पुलिस पर फायरिंग होती रही है।
किसी भी पुलिसकर्मी के सिर पर हेल्मट भी नहीं था
इसके बाद भी जब दबिश दी गई तो कोई भी पुलिस वाला बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं पहने था। किसी के सिर पर हेल्मट भी नहीं था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक किरण एस ने बताया कि पुलिस को दबिश के दौरान बुलेट प्रूफ जैकेट का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
नई आबादी में मुठभेड़ के दौरान पुलिसकर्मियों का जैकेट न पहनना बड़ी चूक रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मौकेपर पुलिस को 12 और 315 बोल के कारतूस मिले हैं।
इससे साफ है कि बदमाशों ने तमंचा जैसे देशी हथियारों का ही प्रयोग किया है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है।