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एक माह में तीन गुना बढ़े आईसीयू बेड, वेंटिलेटर भी हुए दोगुना
Sat, 11 Jul 2020 04:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 11 Jul 2020 04:27 AM IST
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जीटीबी अस्पताल
राजधानी में बीते एक माह में आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाकर तीन गुना हो गई है। सरकारी ही नहीं, निजी कोविड अस्पतालों में भी बेड की संख्या बढ़ी है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कोविड अस्पतालों में 10 जून तक आईसीयू बेड की संख्या 590 थी। फिलहाल यह बढ़कर 1950 हो गई है।
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इनमें सरकारी अस्पतालों में कोरोना के आईसीयू बेड 950 और निजी अस्पतालों मे 1000 हैं। निजी अस्पतालों में अभी 60 फीसदी बेड भरे हुए हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में 30 फीसदी बेड पर मरीज भर्ती है और 70 फीसदी खाली है।
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दो बड़े अस्पतालों में 380 बेड
सरकार ने 6 जुलाई को ही राजधानी के दो बड़े कोविड अस्पतालों में आईसीयू बेड बढ़ाए हैं। राजीव गांधी अस्पताल में बेड की संख्या 45 से बढ़ाकर 200 और एलएनजेपी में 60 से बढ़ाकर 180 की गई है। इसके अलावा पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल जीटीबी में भी बेेड बढ़ानेेे की योजना पर काम चल रहा है। इस समय अस्पताल में 60 आईसीयू बेड हैं। इसे बढ़ाकर 500 तक किया जाना है।
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वेंटिलेटर भी हुआ दोगुना
राजधानी में बीते एक माह में कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर की संख्या भी दोगुनी हो गई है। 10 जून तक राजधानी के अस्पतालों में 505 वेंटिलेटर थे, जिसे बढ़ाकर करीब दोगुना कर दिया गया है। इस समय विभिन्न कोविड अस्पतालों में 905 वेंटिलेटर बेड हैं। इनमें निजी अस्पतालों में 500 और सरकारी अस्पतालों में 405 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं।
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर पीके सिंघल बताते हैं कि महज दस फीसदी कोरोना संक्रमितों को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है। इनमें से 2 फ़ीसदी को ही वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। उन्होंने आईसीयू और वेंटिलेटर बेड की संख्या लगातार बढ़ाने के सरकार के प्रयास की सराहना की।
निजी अस्पतालों की आईसीयू में ज्यादा मरीज भर्ती होने के विषय में उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों के दिमाग में यह रहता है कि निजी अस्पतालों में ज्यादा बेहतर देखभाल होगी।