भारत के सामाजिक ढांचे में बड़े बदलाव की देन है IAS टॉपर टीना की सफलता
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इस साल की आईएएस टॉपर टीना डाबी अपनी इतनी बड़ी सफलता के बाद भी बहुत शांत और आरामपूर्वक हैं। टीना ने लेडी श्रीराम कॉलेज टॉप किया था और स्टूडेंट ऑफ द ईयर का अवार्ड भी जीता था। टीना ने 12वीं में आईसीएसई बोर्ड की परीक्षा में इतिहास और राजनीति विज्ञान में 100 प्रतिशत अंक अर्जित किए थे।
टीना की कहानी 'धैर्य और सामंजस्य' की मिसाल है। लेकिन टीना की ये कहानी सिर्फ उनकी नहीं उनकी मां हिमाली कांबली के निर्णय की भी है, जिन्होंने एक कुशल इंजीनियर होते हुए भी अपनी बेटी के लिए अपनी शिक्षा और समय को देने का संकल्प लिया। उनकी बेटी ने भी उनकी इस तपस्या को अपनी सफलता से साकार किया।
टीना की यह सफलता सिर्फ उन तक सीमित नहीं है, बल्कि वो भारत के गहरे और जटिल सामाजिक ढांचे में परिवर्तन को भी दिखाता है। जिसकी वजह से ही वो यूपीएससी परीक्षा टॉप करने वाली पहली दलित लड़की बन गई हैं। जैसा कि भाजपा के सांसद उदित राज ने ट्वीट कर भी कहा था कि, '40-50 साल पहले टीना के लिए ये मुमकिन नहीं होता।'
टीना के दादा ने किया बहुत संघर्ष
टीना के माता पिता दोनों ही इंजीनियरिंग सेवा से हैं पर वो जाति के बारे में ज्यादा बातें नहीं करते, लेकिन वो इस सच से इंकार भी नहीं करते कि टीना की ये सफलता वर्षों के संघर्ष और पीढ़ियों की लड़ाई के बाद ही मुमकिन हो सकी है।
टीना के पिता जसवंत दाबी को यह बखूबी पता है कि आईएएस कितनी प्रतिष्ठित परीक्षा है। हमारे परिवार में इंजीनियरों की एक लंबी फेहरिस्त है लेकिन टीना पहली आईएएस है। जसवंत का पैतृक गांव राजस्थान का दाबी है और वो याद करते हैं कि उनके दादाजी ने अपने बच्चों के लालन-पालन में कितना संघर्ष किया था।
जसवंत अपने पिता और दादा के बारे में बताते हैं कि दलित होने के क्या नुकसान थे उसे इन दोनों ने ज्यादा जाना। मेरे पिता पढ़ाते थे ताकि वो मेरी शिक्षा के लिए कमा सकें। जसवंत कहते हैं कि हम आज भी वो सब नहीं भूले हैं। टीना के माता पिता एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मिले और 1989 में राजस्थान व महाराष्ट्र के रीति-रिवाजों से शादी कर ली।
मां ने ही कहा साइंस की जगह लो आर्ट्स
टीना की पैदाइश भोपाल की है जहां उन्होंने 7वीं क्लास तक पढ़ाई की। उसके बाद उनके माता-पिता का ट्रांसफर हो जाने के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया। टीना ने जब पूछा गया कि क्या उन्हें पता है कि उनकी सफलता उनके ही समुदाय के दूसरे लोगों के लिए क्या मायने रखता है? इस पर टीना का जवाब होता है कि हमारे यहां लिंग भेद ज्यादा बड़ी समस्या है और इसीलिए मैंने हरियाणा को काम करने के लिए चुना है।
टीना के घर पर आपको उसकी पेंट की हुई मधुबनी पेंटिंग दिख जाएगी। टीना की मां हिमाली अपनी दोनों बेटियों को बचपन में छोटे-मोटे क्राफ्टवर्क खरीदने के लिए प्रेरित करती थी ताकि जिसने उसे बनाया है उसकी मदद हो सके और वो उनसे कनेक्ट भी सकें।
जब टीना से पूछा गया कि क्या उनकी मां ने उनपर कभी इंजीनियर बनने के लिए दबाव नहीं डाला क्योंकि परिवार में सभी इंजीनियर हैं तो इस पर टीना जोर से हंसती हैं। इसके बाद बताती हैं कि उनकी मां ने ही उन्हें कहा कि वो ह्यूमैनिटीज पर ज्यादा अच्छे से काम कर पाएंगी।
टीना बताती हैं कि 11वीं में दो महीने साइंस पढ़ने के बाद उनकी मां ने ही उनसे कहा था कि वो आर्ट्स ले लें। बहुत लोगों को इसपर अचरज हुआ था, लेकिन उसमें मैं अच्छा कर सकी और मुझे लगता है कि आर्ट्स ने ही मुझे संपूर्ण इंसान बनाया है।
'टीना परिवार की पहली टॉपर नहीं हैं'
टीना की मां हिमाली का उनके परिवार से कोई कॉन्टैक्ट नहीं है लेकिन वो बताती हैं कि हमारे परिवार में टीना पहली टॉपर नहीं हैं मेरे पिता पुरूषोत्तम माधोराव कांबली ने भी अपने स्कूल में टॉप किया था।
हिमाली कहती हैं कि मेरे पिता हमेशा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के आभारी रहे कि उन्हें दलितों के साथ होने वाले शोषण को नहीं झेलना पड़ा जैसा कि मेरे दादा और दादी ने झेला। मुझे उनका संघर्ष हमेशा याद रहेगा चाहे कितनी पीढ़ियां ही सफल हो जाएं।
टीना की सफलता पर पूर्व आईएएस अधिकारी पीएस कृष्णन कहते हैं कि टीना की सफलता से यह संदेश जाता है कि विभिन्न तरह के बैकग्राउंड से आने वाले लोग मेरिट के बलबूते कितना चमक रहे हैं।
कृष्णन ये भी कहते हैं कि ये बताता है कि अगर रास्ते से बाधाएं हटाई जाएं तो क्या नहीं हासिल किया जा सकता। इस तरह के सक्सेस स्टोरीज ये दिखाती हैं कि अगर दबे कुचले समुदायों को भी आगे बढ़ने का मौका मिले तो वो किसी भी मकाम को हासिल कर सकते हैं।