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मिशेल ने क्यों रिंग उतारी और पायल को पहना दी

Wed, 28 Jan 2015 09:31 AM IST
Updated Wed, 28 Jan 2015 09:31 AM IST
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I will tell Your story to my daughters Payal : Michelle

‘मैं अपनी बेटियों को तुम्हारी कहानी सुनाने के साथ-साथ हर बेटी को तुम्हारे नक्शेकदम पर चलने की सलाह दूंगी। तुम्हारी कहानी पर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को सलाम करना चाहिए। महज 12 साल की उम्र में बाल विवाह जैसी कुप्रथा रोकने में जो सराहनीय काम किया है, उसे मैं सलाम करती हूं।’

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यह कहना है अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल लावेन रॉबिन्सन ओबामा का। सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम के मंच पर मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा छात्रों समेत युवाओं को एक दोस्ती के मजहब में पिरोने का संदेश दे रहे थे। वहीं पायल के साथ नीचे बैठीं मिशेल उनकी कहानी को अपनी बेटियों तक पहुंचाने की बातें बता रही थीं।
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जब दर्शक ताली बजाते तो मिशेल भी पायल के साथ हाथ पर हाथ मार ताली बजातीं। बात यहीं खत्म नहीं हुई, मिशेल ने बाल विवाह के खिलाफ नन्ही आवाज उठाने संग बाल पंचायत की मुखिया पायल को बराक की दी हुई फिंगर रिंग भी उतारकर पहना दी। डियर...मैं तुम्हें क्या दूं, क्योंकि कोई लफ्ज ही नहीं हैं, तुम्हारी बहादुरी व जज्बे के आगे।
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पायल ने धन्यवाद करते हुए पहले तो रिंग रख ली, लेकिन सी ऑफ के साथ ही रिंग सम्मान सहित मिशेल की उंगली में पहना दी। मुझे आपका प्यार चाहिए, भेंट नहीं।

इनकी भी कहानी सुनी मिशेल ने

I will tell Your story to my daughters Payal : Michelle

मिशेल और बराक ने इसके बाद पायल सहित अयूब व दीपक से मुलाकात की और उनकी कहानियां भी सुनीं। दीपक की दास्तां सुनने के बाद मिशेल ने मां की तरह उसका हाथ भी हाथों में थाम लिया और कटी उंगली देख बोलीं, यह तुम्हें हर पल आगे बढ़ना का संदेश देगी।


मिशेल और बराक ने बच्चों को संदेश देते हुए कहा कि आगे बढ़ने के लिए पैसा, अमीर परिवार न होना कमजोरी नहीं है, बल्कि यह कमियां तो आगे बढ़ने का संदेश देती हैं।

उन्होंने बच्चों को कहा कि हर बड़े कामयाब आदमी के पीछे पैसा नहीं, बल्कि उसका संघर्ष छिपा होता है। बच्चों का कहना है कि मिशेल व बराक की कहानी सुनने के बाद अब उन्हें लगता है कि वे भी एक दिन इनकी तरह कामयाब आदमी बनेंगे।

कौन हैं ये पायल

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राजस्थान के अलवर जिले के हिंसला गांव की 12 वर्षीय पायल जांगिड ने बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़ने के बाद बाल पंचायत बनाई और बच्चों के मसलों को सुलझाने लगीं।


वहीं, राजस्थान की कुप्रथा बाल विवाह का पता लगने के बाद परिवार समेत बचपन बचाओ आंदोलन तक जानकारी पहुंचाकर बेटियों की जिंदगी को बचाया।

बाल श्रम से करवाया मुक्त

अयूब व दीपक बाल श्रम के तहत राजधानी की फैक्टरियों में काम कर रहे थे। बचपन बचाओ आंदोलन ने उन दोनों को छुड़वाया था। बाल मजदूरी के दौरान ही दीपक की उंगली कट गई थी। इन दिनों दोनों बाल आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

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