बच्ची की मौत पर ESI अस्पताल में हंगामा
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नोएडा सेक्टर 24 स्थित ईएसआई अस्पताल में सोमवार रात बच्ची की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की हालत गंभीर थी। परिजन उसे देर से अस्पताल लाए थे।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह ग्रेटर नोएडा के देवला गांव में छह साल की उजाला को गाय ने सींग मार दिया था। परिजन उसे वहीं नजदीक के डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन हालत बिगड़ने पर वे उजाला को ईएसआई अस्पताल ले आए। वहां इलाज के दौरान उजाला की मौत हो गई।
इस पर परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए ईएसआई अस्पताल में हंगामा कर दिया। अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जैदी का कहना है कि परिजन बच्ची को काफी देर से अस्पताल लेकर आए थे। उसे सेप्टीसीमिया हो गया था, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
बिन बिजली-पानी अस्पताल में ऑपरेशन ठप
ईएसआई अस्पताल में पानी की सप्लाई अचानक ठप हो गई। वार्डों, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर समेत सभी स्थानों के नल सूख गए। पानी की किल्लत के चलते मंगलवार को ऑपरेशन नहीं हो सके। पानी न मिलने से मरीज, तीमारदार और मेडिकल स्टाफ का बुरा हाल हो गया। अस्पताल को पानी का टैंकर मंगाना पड़ा। वहीं, अचानक अस्पताल की बिजली भी गुल हो गई, जिसका कारण इलेक्ट्रिक पैनल का फुंक जाना बताया गया।
डीजी सेट से बिजली की सप्लाई की गई। अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. आरएस जंगपांगी ने बताया कि पानी को पंप करने वाली मोटर खराब हो गई थी, जिसके कारण दिक्कत हुई। बुधवार से पानी की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। आग बुझाने के लिए जमा पानी को इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि चारों डीसी सेट ठीक हैं। इलेक्ट्रिक पैनल को ठीक करा लिया जाएगा। इंजीनियर की सलाह है कि इलेक्ट्रिक पैनल के पास विशेष तरह के हीटर लगवा दिए जाएं, जिससे इलेक्ट्रिक पैनल में नमी नहीं आएगी।
वहीं, स्त्री विभाग में एक तो कम डॉक्टर हैं और ऊपर से उनमें से कुछ के छुट्टी पर चले जाने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी ही शिकायत लेकर मंगलवार को चिकित्सा निदेशक के पास बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। लेबर रूम में ड्यूटी पर तैनात एक डॉक्टर को बुलाकर मरीज को दिखवाया गया।
डॉ. आरएस जंगपांगी ने बताया कि करीब आठ डॉक्टर स्त्री रोग विभाग में हैं। इन्हें ओपीडी, लेबर रूम, ओटी और इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी होती है। करीब दो डॉक्टर छुट्टी पर हैं। तीन पद रिक्त हैं। मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे में दिक्कत हो जाती है। कई बार तो शाम छह बजे तक ओपीडी चलती रहती है।