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एशिया की सबसे सुरखित जेल में कैदियों ने लगाई सेंध

Tue, 30 Jun 2015 04:50 PM IST
Updated Tue, 30 Jun 2015 04:50 PM IST
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How to Tihar prison after 40 years absconding

करीब 40 वर्ष बाद एक बार फिर से तिहाड़ जेल में दीवार में सेंधमारी कर कैदी के फरार होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जेल की तीन स्तरीय सुरक्षा को धता बताकर दो दीवारों को फांदने और जेल की बाहरी दीवार में बड़ी सेंधमारी करके एक विचाराधीन कैदी फरार हो गया जबकि दूसरे को मौके से ही पकड़ लिया गया। वारदात के करीब 24 घंटे बाद जेल-प्रशासन ने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

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दर्ज प्राथमिकी में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है कि कैदी दीवार फांद कर भागे या दीवार में सेंधमारी करके। प्राथमिकी के मुताबिक जेल संख्या सात के रोजा वार्ड में बंद विचाराधीन कैदी फैजान और जावेद जेल संख्या सात से फरार हो गए।

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वारदात के समय शनिवार शाम ही फैजान को मौके से पकड़ लिया गया जबकि जावेद भागने में सफल रहा। वारदात शनिवार शाम की है, लेकिन हरि नगर पुलिस को इसकी सूचना रविवार रात को दी। इस पूरे मामले में तिहाड़-प्रशासन की ओर से जबरदस्त लापरवाही की गई। मामले को अपने स्तर पर ही सुलझाने और किरकिरी से बचने के चक्कर में तिहाड़-प्रशासन ने काफी देर कर दी।
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कैदी परिचय:
फैजान
उम्र 18 वर्ष
वजन 51 किग्रा.
लम्बाई5 फुट 6 इंच

जावेद
उम्र 19 वर्ष
वजन 57 किग्रा.
लम्बाई 5 फुट 8 इंच

इस तरह भागने में हुए कामयाब

How to Tihar prison after 40 years absconding

हालांकि सूत्रों की मानें तो जावेद और फैजान रोजा खोलने के नाम पर शनिवार सुबह जेल संख्या सात के रोजा वार्ड से बाहर निकले और मौका देखकर जेल संख्या सात की करीब 16 फुट की दीवार फांद कर बाहर निकले।


इसके बाद 16 फुट की एक और दीवार फांद कर जेल की बाहरी दीवार तक पहुंचे। सूत्रों की मानें तो 16 फुट की दो दीवारों को फांदने में दीवार के पास रखे मलबे से भी मदद मिली। दीवार के ऊपर लगी कंटीली तारों को समेटने के लिए कैदियों ने तौलिये का भी इस्तेमाल किया है।

इसके बाद दोनों बाहरी दीवार (18 फुट की उंचाई) की सेंधमारी में लग गए। सेंधमारी में माहिर जावेद पहले दीवार के निचले हिस्से में सेंधमारी शुरू की लेकिन वहां दीवार में पत्थर था इसलिए जमीन से करीब तीन फुट की ऊंचाई पर दीवार में सेंधमारी शुरू की और दो घंटे में ही करीब डेढ़ फुट लंबी-चौड़ी सेंधमारी कर दी।

दिन में भागना मुश्किल था लिहाजा करीब छह से सात घंटे दोनों कैदी उसी जगह पर छिपे रहे और अंधेरा होने पर दोनों दीवार से होते हुए बाहर नाले की ओर निकले। जावेद तो भागने में सफल रहा लेकिन फैजान भागने की हिम्मत नहीं दिखा पाया और मौके पर ही पकड़ा गया।

जेल में ही हुई थी दोनों की पहचान

How to Tihar prison after 40 years absconding

जावेद और फैजान दोनों जेल संख्या सात के वार्ड संख्या चार के ब्लॉक एक के बैरक पांच में रहते थे। रोजे की वजह से दोनों को पिछले कुछ दिनों से रोजा वार्ड में रखा गया था। जावेद सेंधमारी में माहिर है और नेब सराय थाने से 2 जून 2015 से जेल में बंद था।

वह मूल रूप से देवली का रहने वाला बताया जा रहा है। इससे पहले 24 मार्च 2015 को भी जेल आया था लेकिन 13 अप्रैल को उसे जमानत मिल गई थी। जबकि फैजान पहली बार 8 नवंबर 2014 को जेल आया था उसके बाद दिसंबर 2014 में उसे जमानत मिल गई थी। दोबारा 24 जून को वह तिहाड़ जेल पहुंचा था। फैजान जैतपुर थाने से बंद था और मूल रूप से मदनपुर खादर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है।

दोनों कैदियों की पहले से कोई जान-पहचान नहीं थी, जेल में ही दोनों की पहचान हुई थी। फैजान ने पूछताछ में बताया है कि उसने जावेद को बताया कि अब मेरा भाई मेरी जमानत नहीं कराएगा तब उसने जेल से भागने की तरकीब बताई और इस साजिश में शामिल किया।

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