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स्कूल में जमे हैं शादी के बर्तन-दोने-पत्तल

Thu, 04 Dec 2014 08:55 AM IST
Updated Thu, 04 Dec 2014 08:55 AM IST
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How's school, wedding dishes cups and plates in the campus.

कहीं शादी के बर्तन तो कहीं खाकर फेंके गए दोने-पत्तल। ये स्कूल है या बारातघर। सदपुरा गांव स्थित प्राइमरी स्कूल आने वालों के दिमाग में कुछ ऐसे ही सवाल उठते हैं। यहां आने वाले विद्यार्थियों को शादी के मौसम में अक्सर छुट्टी बताकर लौटा दिया जाता है। स्कूल की इंचार्ज पर दबाव होने के कारण वह कुछ बोल नहीं पातीं। परेशान होकर गांव के ही कुछ लोगों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की है।

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बुधवार को अमर उजाला की टीम जब स्कूल पहुंची तो सुबह 9.30 बजे सामान्य दिनों की तरह कक्षाएं लगी थीं। यहां प्रांगण के एक कोने में जूठे बर्तन पड़े थे। टेंट के लिए लगी बल्लियों को भी नहीं हटाया गया था।
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कक्षाओं के सामने दोने पत्तल और कूड़ा पड़ा था। शौचालय के आगे भी गंदगी से विद्यार्थी उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। नाम नहीं छापने पर एक अध्यापक ने बताया कि लोग आयोजन से पूर्व तो सफाई की बात कहते हैं मगर उसके बाद भूल जाते हैं।
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ऊपर से बनता है दबाव

How's school, wedding dishes cups and plates in the campus.

स्कूल ही अपने स्तर पर साफ-सफाई कराता है। शादियों के मौसम में ये नजारा आम होता है। कई बार तो आयोजनों के कारण बच्चों की छुट्टी भी करनी पड़ती है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ वर्ष पूर्व स्कूलों में होने वाले आयोजनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई न प्रभावित हो।

स्कूल के एक शिक्षक बताते हैं कि शादी के मौसम में स्कूल में आयोजन करके गंदगी फैला जाते हैं। गांव वालों को मना करने पर कभी सरपंच तो कभी शिक्षा अधिकारियों से दबाव बनाया जाता है। गांव में पढ़ाना है तो विरोध तो नहीं कर सकते।

इतना ही नहीं आयोजनों के बाद सफाई भी खुद ही कराते हैं। जिन लोगों ने स्कूल में आयोजन किए वही लोग किसी और आयोजन पर शिकायत कर देते हैं। डर के कारण कोई कुछ नहीं बोलता। वहीं सरपंच इस तरह के किसी भी आयोजन से इंकार करते नजर आते हैं। अधिकारी जांच का भरोसा बंधाते हैं, लेकिन फिर भी यहां के स्कूल बदले बदले नजर आ रहे हैं, जिन्हें स्कूल कहना ही बेमानी नजर आता है।

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