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हिंदी हैं हम: खाकी वर्दी में भी हिंदी के लिए धड़कता है पूर्व अध्यापक एएसआई रामकुमार का दिल

Sat, 05 Sep 2020 06:39 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फरीदाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 05 Sep 2020 06:39 PM IST
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Hindi hain hum Faridabad police ASI Ramkumar teaches hindi to his fellowmates
एएसआई रामकुमार - फोटो : अमर उजाला

हिंदी के वजूद की लड़ाई के लिए आज भी खाकी वर्दी में अध्यापक रामकुमार (गुरुजी) का दिल धड़कता है। उन्होंने वर्ष 1992 में अपने गांव मांडौढ़ी झज्जर में एक स्कूल की स्थापना की। इस स्कूल में बच्चों को पढ़ाते समय उन्होंने हिंदी की कई खामियां महसूस कीं, जिसके बाद खुद हिंदी के वजूद की लड़ाई में एक सिपाही की तरह कूद पड़े। 

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सौभाग्य से इसी साल रामकुमार हरियाणा पुलिस में भर्ती हो गए। इसके बाद वर्ष 1998 से 2008 तक मधुबन स्थित हरियाणा पुलिस पब्लिक स्कूल में शिक्षक के रूप में तैनात रहे। वर्तमान में फरीदाबाद पुलिस आयुक्त कार्यालय में जनसूचना अधिकार प्रकोष्ठ के प्रभारी के पद पर तैनात हैं। 
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हिंदी को लेकर इनकी पीड़ा नौकरी में आने के बाद भी कम नहीं हुई। पुलिस सेवा में रहते हुए इन्होंने 1967 में भारत सरकार द्वारा देवनागरी लिपी व हिंदी वर्तनी का मानकीकरण नाम से किए गए संशोधन को पढ़ा, समझा व उस पर आधारित एक पुस्तक ‘अब हिंदी बेहद आसान’ लिखी। 
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इस पुस्तक में हिंदी में किए गए संशोधन को अत्यंत सरल रूप में लिखने व पढ़ने के लिए समझाया गया है, जिसमें व्यंजन संयोग व पंचमाक्षर का प्रयोग बेहद महत्वपूर्ण है।

कार्यशालाओं में किया समझाने का प्रयास
हिंदी को लेकर उनकी लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने ड्यूटी के बाद कई बार शिक्षकों की कार्यशाला का भी प्रतिनिधित्व किया व हिंदी शब्दावली व लेखन को विस्तार से समझाने का प्रयास किया। 

रामकुमार ने बताया कि उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया है कि भाषा वह यंत्र है, जिसके माध्यम से हम पढ़ने, लिखने का ज्ञान प्राप्त करते हैं। यह जितनी सुदृढ़ होगी, इसके परिणाम उतने की सार्थक सिद्ध होंगे।

पाठ्यक्रम के लिए आज भी जारी है लड़ाई

एएसआई रामकुमार (गुरुजी) की हिंदी को लेकर लड़ाई अभी थमी नहीं हैं। अपने हिंदी लेखन को लेकर प्रकाशित पुस्तक ‘अब हिंदी बेहद आसान’ को पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए एएसआई रामकुमार लगातार प्रयास में जुटे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने 2018 में भारत सरकार के हिंदी निदेशालय व हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी मुलाकात की हैं।

पुलिस सेवा पदक से भी सम्मानित
एएसआई रामकुमार अपने कर्तव्यों के प्रति भी काफी संजीदा हैं। उन्होंने समय से अपने दायित्वों को पूरा करने पर विशेष महत्व दिया है। उनकी कार्यकुशलता, लेखन में रुचि और पुलिस की कार्यप्रणाली में उपयोग होने वाले उर्दू के शब्दों को हिंदी में लिखने की कला सिखाने को लेकर पुलिस सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी सैकड़ों बार विभिन्न पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं।
 
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