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Delhi NCR News: रिजर्व सीट को सामान्य श्रेणी को दिए जाने के सवाल पर बंटा हाईकोर्ट
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- डबल बेंच की सुनवाई में दोनों न्यायमूर्तियों के अलग-अलग राय के चलते मामला बड़ी बेंच को सौंपा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षित मेडिकल सीट को खाली रहने की स्थिति में जनरल कैटेगरी (अनारक्षित) में बदलने के मामले में विभाजित फैसला सुनाया है। दो जजों की बेंच के अलग-अलग मतों के कारण मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष बड़ी बेंच के लिए भेज दिया है। मामला डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड-पोस्ट डिप्लोमा सेंट्रलाइज्ड एंट्रेंस टेस्ट 2025 से जुड़ा है। पंचकुला स्थित सरकारी अस्पताल में रेडियो-डायग्नोसिस की एकमात्र सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी। कोई योग्य ओबीसी उम्मीदवार उपलब्ध न होने पर जनरल कैटेगरी की डॉक्टर अदिति पंवार ने इस सीट को डी-रिजर्व (आरक्षण मुक्त) कर जनरल कैटेगरी को देने की मांग की थी। पहले एकल पीठ ने डॉ. पवार के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन एनबीईएमएस ने इस फैसले को दो जजों की खंडपीठ में चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की राय : न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला ने सिंगल बेंच के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि मेडिकल सीटों का व्यर्थ जाना राष्ट्रीय क्षति है। उन्होंने कहा, आरक्षण सामाजिक न्याय का साधन है, जब कोई योग्य आरक्षित उम्मीदवार उपलब्ध न हो तो सीट खाली रखना न तो आरक्षण के उद्देश्य को पूरा करता है और न ही जनहित में है। उन्होंने मेडिकल शिक्षा को दुर्लभ सार्वजनिक संसाधन बताते हुए सीट रूपांतरण को उचित ठहराया।
न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की राय : न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने असहमति जताते हुए कहा कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान या कार्यकारी निर्देश के अदालत आरक्षित सीट को डी-रिजर्व करने का आदेश नहीं दे सकती। उन्होंने इसे न्यायिक क्षेत्राधिकार की सीमा लांघने वाला कदम बताया और कहा कि यह कार्यपालिका के दायरे में आता है।
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यह है मामला : डॉ. अदिति पंवार ने यूआर कैटेगरी में 142वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने पंचकुला सरकारी अस्पताल को पहली प्राथमिकता दी, लेकिन सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होने के कारण विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने अपनी दूसरी प्राथमिकता (निजी अस्पताल) को अस्वीकार कर आरक्षित सीट पर दावा किया। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज ने सीट को नीट-पीजी पूल में ट्रांसफर करने का पक्ष रखा। एकल पीठ ने डॉ. पंवार के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ एनबीईएमएस ने अपील की।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षित मेडिकल सीट को खाली रहने की स्थिति में जनरल कैटेगरी (अनारक्षित) में बदलने के मामले में विभाजित फैसला सुनाया है। दो जजों की बेंच के अलग-अलग मतों के कारण मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष बड़ी बेंच के लिए भेज दिया है। मामला डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड-पोस्ट डिप्लोमा सेंट्रलाइज्ड एंट्रेंस टेस्ट 2025 से जुड़ा है। पंचकुला स्थित सरकारी अस्पताल में रेडियो-डायग्नोसिस की एकमात्र सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी। कोई योग्य ओबीसी उम्मीदवार उपलब्ध न होने पर जनरल कैटेगरी की डॉक्टर अदिति पंवार ने इस सीट को डी-रिजर्व (आरक्षण मुक्त) कर जनरल कैटेगरी को देने की मांग की थी। पहले एकल पीठ ने डॉ. पवार के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन एनबीईएमएस ने इस फैसले को दो जजों की खंडपीठ में चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की राय : न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला ने सिंगल बेंच के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि मेडिकल सीटों का व्यर्थ जाना राष्ट्रीय क्षति है। उन्होंने कहा, आरक्षण सामाजिक न्याय का साधन है, जब कोई योग्य आरक्षित उम्मीदवार उपलब्ध न हो तो सीट खाली रखना न तो आरक्षण के उद्देश्य को पूरा करता है और न ही जनहित में है। उन्होंने मेडिकल शिक्षा को दुर्लभ सार्वजनिक संसाधन बताते हुए सीट रूपांतरण को उचित ठहराया।
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न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की राय : न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने असहमति जताते हुए कहा कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान या कार्यकारी निर्देश के अदालत आरक्षित सीट को डी-रिजर्व करने का आदेश नहीं दे सकती। उन्होंने इसे न्यायिक क्षेत्राधिकार की सीमा लांघने वाला कदम बताया और कहा कि यह कार्यपालिका के दायरे में आता है।
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यह है मामला : डॉ. अदिति पंवार ने यूआर कैटेगरी में 142वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने पंचकुला सरकारी अस्पताल को पहली प्राथमिकता दी, लेकिन सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होने के कारण विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने अपनी दूसरी प्राथमिकता (निजी अस्पताल) को अस्वीकार कर आरक्षित सीट पर दावा किया। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज ने सीट को नीट-पीजी पूल में ट्रांसफर करने का पक्ष रखा। एकल पीठ ने डॉ. पंवार के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ एनबीईएमएस ने अपील की।