अनाज मंडी अग्निकांडः किसी को सांस फूलने के बाद हार्ट अटैक, किसी का जला शरीर
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अनाज मंडी हादसे में मौत के शिकार 43 लोगों में से किसी की जान सांस फूलने के बाद हार्ट अटैक आने से हुई तो किसी की बेहोश होने के बाद जलने से। यह खुलासा इनके पोस्टमार्टम में हुआ है। फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टरों को फेफड़ों में कई तरह के कण चिपके मिले हैं। पहचान के लिए इनके नमूने रोहिणी एफएसएल भेजे गए हैं। बीते सोमवार रात साढ़े नौ बजे तक लोकनायक अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम चलते रहे।
डॉक्टरों ने 17 लोगों के पोस्टमार्टम एक दिन में कर दिए। उनके अनुसार, हार्ट अटैक आने के पीछे दो वजहें हो सकती हैं। एक सांस न लेने के चलते हृदय पर अत्यधिक दबाव पड़ना और दूसरा हादसे का मंजर आंखों से देखने और अपनों के मारे जाने का दुख।
दरअसल, इमारत में आग बुझाने के बाद जांच के लिए पहुंची एफएसएल और एनडीआरएफ की टीम ने पुष्टि की थी कि ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटन से होने की आशंका है।
उन्होंने बताया था कि इमारत में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक दाना जलने से कार्बन मोनो ऑक्साइड फैल गई थी।
मंगलवार को एक वरिष्ठ फॉरेंसिक डॉक्टर ने बताया कि 17 लोगों की फॉरेंसिक रिपोर्ट में काफी समानताएं मिली हैं। किसी के शरीर का 30 फीसदी आग कीचपेट में आया था तो किसी का 20 फीसदी।
लगभग सभी रिपोर्ट्स के आधार पर कहा जा सकता है कि इमारत में ऑक्सीजन न मिलने की वजह से लोगों की सांस फूलने लगी। पांच शवों के पोस्टमार्टम में उनकी मौत हार्ट अटैक से होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, इनके फेफड़े भी सिकुड़े मिले थे।
इससे साफ जाहिर है कि पहले इन्हें सांस लेने में दिक्कतें हुईं और फिर हार्ट अटैक से मौत।
उधर, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने बताया कि बबलू, असाबूल और महबूब तीनों की मौत के कारण एक जैसे हैं। इनके फेफड़े काफी सिकुड़े हुए मिले हैं। साथ ही, इनमें कई अति सूक्ष्म कण भी मिले हैं। इनके शरीर पर जलने के निशान भी हैं।
लोकनायक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, तौफीर और शोकिर को आग लगने के बाद हार्ट अटैक आया था। डॉक्टरों ने बताया कि लगभग सभी मृतकों में आंतरिक अंगों का रंग बदला हुआ दिखा। इससे स्पष्ट होता है कि घुटन से उनकी मौतें हुई हैं। हालांकि, विसरा जांच के लिए एफएसएल भेजा हुआ है।
डॉक्टरों ने बताया कि मंगलवार को भी पोस्टमार्टम जारी हैं। आमतौर पर शाम 5 से 6 बजे के बाद पोस्टमार्टम नहीं किए जाते, लेकिन अब डॉक्टर देर रात तक यह काम कर रहे हैं।
कार्बन मोनो ऑक्साइड घातक : एम्स
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फॉरेसिंक विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक का कहना है कि आग की घटनाओं में धुआं इमारत के अंदर भर जाता है औऱ
इसके कारण वहां मौजूद लोगों को घुटन महसूस होने लगती है। इमारत में कार्बन मोनो ऑक्साइड फैल जाए तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई भी पोस्टमार्टम एम्स में नहीं हुआ है, इसलिए वे सटीक जानकारी नहीं दे सकते। विशेषज्ञ होने के नाते उनका
मानना है कि घुटन की वजह से लोगों की मौत हुई।