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'इकलाख को जो बचाने आए वो भी हिन्दू ही थे'

Fri, 02 Oct 2015 02:21 PM IST
सलमान रावी/ बीबीसी संवाददाता
सलमान रावी/ बीबीसी संवाददाता Updated Fri, 02 Oct 2015 02:21 PM IST
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Who came to save those  were Hindu.

उत्तर प्रदेश के दादरी इलाके के बिसाहड़ा गाँव में - जो दिल्ली से लगभग सटा है, दूर-दूर तक वीरानी छाई हुई है। दुकानें बंद हैं और लोग सड़कों से नदारद।

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सरकारी अधिकारियों, पुलिस और मीडिया के लोगों के जमावड़े के बीच इकलाख अहमद का घर है जहाँ मातम का माहौल है। गोमांस खाने की अफवाह के बाद हुई हिंसा में इस गाँव के इकलाख अहमद की पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी।
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उनके बेटे जख्मी हैं और उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। इकलाख की माँ असगरी उस घड़ी को याद कर बिलख उठती हैं जिस वक्त कई लोगों ने उनके घर पर एक साथ हमला कर दिया था।
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असगरी कहती हैं, "गाँव वालों ने बहुत बुरा किया हमारे साथ। बिना कसूर, बिना गलती के। आजतक हमारा झगड़ा तक नहीं हुआ किसी से। पता नहीं हमें क्यों मारने को आए। अब यह अफवाह उड़ाई कि गो हत्या की है। जो मांस रखा हुआ था वो बकरे का था।"

"अब दिल टूट गया है"

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कहा जा रहा है कि पास के ही मंदिर से किसी ने माइक से ऐलान किया था कि इकलाख के घर गोमांस खाया जा रहा है। मंदिर के पास के ही रहने वाले पंकज कुमार का कहना है कि माइक की आवाज सुनकर जब तक वो घर से बहार निकल पाते, तब तक एक बड़ा हुजूम इकलाख के घर की तरफ जा चुका था।

इकलाख अहमद के बड़े भाई जमील पूरे वाकिए से काफी मायूस हैं। वो कहते हैं कि अब वो गाँव छोड़कर चले जाएंगे। हालांकि उनका यह भी कहना था कि जिस वक्त हमला हो रहा था उस वक्त भी जो लोग उनके घरवालों को बचाने आए थे वो भी हिन्दू ही थे।

जमील कहते हैं, "अब ऊपरवाला जाने किसका हाथ है इस सब के पीछे। कई पुश्तों से हम यहाँ रहते आ रहे हैं। कभी कुछ नहीं हुआ। अब दिल टूट गया है।"

"हमारा गाँव कभी ऐसा नहीं था। जब हमला हुआ तो बीच बचाव करने वाले, भीड़ से हमारे लोगों को छुड़ाने वाले भी हिन्दू ही थे। हमारे हिन्दू पड़ोसियों ने ही पुलिस को खबर की थी।"

'सोची समझी साज़िश'

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पूरे गाँव में इकलाख का घर एकमात्र मुसलमान घर है और घर के लोगों का कहना है कि गोहत्या के लिए अगर गाय लाई जाती तो वो सबके सामने से ही आती।

उन्हें लगता है कि अफवाह एक सोची समझी साजिश होगी क्योंकि हमले से पहले ही सोशल मीडिया पर गोहत्या की अफवाहें प्रचारित की जाने लगी थीं। इलाके के विधायक सतबीर गुज्जर का भी कहना था कि हमले से काफी पहले ही माहौल ख़राब किया जाने लगा और लोगों को भड़काने की कोशिश की गई।

हालांकि इसके पुख़्ता सुबूत नहीं मिल पाए मगर पीड़ित परिवार के सदस्यों का कहना है कि हमला करने वाले ''किसी प्रताप सेना से जुड़े हुए हैं" जो सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाह फैला रहे थे।

इकलाख के सबसे बड़े पुत्र सरताज भारतीय वायु सेना में हैं और चेन्नई में तैनात हैं। उनका कहना था कि इस बार ईद पर वो घर नहीं आ पाए थे। जिस दिन घटना घटी उस दिन उन्होंने देर रात घर पर बात भी की थी।

'हमला करने वाले 'देश भक्त' नहीं हो सकते'

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सरताज कहते हैं, "फिर रात 11 बजे के बाद फोन आया कि इस तरह की घटना घट गई। मैंने फोन से ही एम्बुलेंस भिजवाने की कोशिश की। मगर नोएडा में कहीं भी एम्बुलेंस नहीं मिल पाई। मैंने ज़िलाधिकारी को मेल भी किया, मगर कोई जवाब न मिला।"

सरताज का कहना है कि हमला करने वाले 'देश भक्त' नहीं हो सकते। "अगर देश भक्त हैं तो सरहद पर जाकर लड़ो। आपस में क्यों मार-काट मचाए हुए हो?"

पुलिस ने अब तक इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है जबकि गौतमबुद्ध नगर के अतिरिक्त जिला अधिकारी राजेश कुमार यादव ने बीबीसी से कहा कि घटना में शामिल कुछ और लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है।

हालांकि घटना के बाद राजनेताओं और अधिकारियों का बिसाहड़ा में तांता लगा है, यहाँ के रहने वाले लोगों को अभी तक यह समझ नहीं आ रहा है कि आपसी भाईचारे के साथ रह रहे लोगों के बीच इस तरह की वारदात आख़िर हुई कैसे!

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