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शिकारियों सा किया गैंगरेप, अब मिलेगी मौत!

Wed, 27 Aug 2014 01:52 PM IST
Updated Wed, 27 Aug 2014 01:52 PM IST
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HC retains death punishment of gang rape accused.

दिल्ली हाईकोर्ट ने छावला क्षेत्र निवासी युवती के अपहरण, गैंगरेप और हत्या के दोषी तीनों युवकों की मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि इनके प्रति उदारता दिखाना समाज में गलत संदेश देना होगा।

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न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजयोग और न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने तीनों दोषियों की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाए फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। खंडपीठ ने कहा कि तीनों समाज के लिए खतरा है और ऐसे अपराधियों को जीने का अधिकार नहीं है।
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वर्ष 2012 में हुए इस हत्याकांड में तीन दिन बाद युवती का शव बरामद हुआ था। अदालत ने तीनों की सजा की पुष्टि के लिए मामले की फाइल तुरंत हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
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खंडपीठ ने अपने फैसले में तीनों दोषियों के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उन्हें सुधरने का मौका देते हुए उनके प्रति दया बरती जाए। अदालत ने कहा कि तीनों ने सड़क पर युवती को देखा और उस पर शिकारी की तरह टूट पड़े।

इतना ही नहीं जिस प्रकार एक असहाय युवती के साथ दरिंदगी की उससे उनके सुधरने की आशा नहीं है। दोषियों का कृत्य जघन्य से जघन्यतम श्रेणी के अपराध में आता है और उसके लिए एक मात्र सजा मृत्युदंड ही है। इससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा।

क्या था छावला गैंगरेप मामला

HC retains death punishment of gang rape accused.

अभियोजन पक्ष के अनुसार 9 फरवरी 2012 को 19 वर्षीय युवती तीन सहेलियों के साथ अपने कार्यालय से वापस लौट रही थी। रात करीब 8.35 बजे तीनों आरोपियों ने कुतुब विहार से जबरन अपहरण कर लिया और कार से रेवाड़ी, हरियाणा ले गए।

घटना के तीन दिन बाद युवती का शव बरामद हुआ। अभियोजन पक्ष के अनुसार युवती के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के कई निशान थे। इसके अलावा उन्होंने गैंगरेप के दौरान सभी मानवीय सीमाएं पार कर दीं। उन्होंने लोहे की रॉड से हमला करने के अलावा उस पर तेजाब भी डाल दिया था।

आरोप है कि दोषी रवि युवती से दोस्ती करना चाहता था, लेकिन मना करने पर अपने दो साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में 49 गवाह पेश किए।

निचली अदालत में हुई सुनवाई के बाद अब हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत ने दोषियों रवि कुमार (23) राहुल (27) और विनोद (23) को सभी साक्ष्यों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 376 (2) (जी) व 302 के तहत अपहरण, गैंगरेप व हत्या के आरोप में मृत्युदंड की सजा दी है और उनकी नजर में यह एक उचित फैसला है।

गैंगरेप और हत्या के तरीके से अदालत भी आहत

HC retains death punishment of gang rape accused.

अनामिका (बदला हुआ नाम) की जिस प्रकार मौत हुई, उससे अदालत भी सन्न और भावुक हो गई। कोर्ट ने कहा कि युवती को पता नहीं था कि 9 फरवरी के बाद उसके जीवन का इस तरह अंत होगा। दोषियों के मन में मानवता की कोई भावना नहीं थी और ऐसे व्यक्तियों का समाज में कोई स्थान नहीं है।

खंडपीठ ने कहा कि 9 फरवरी को अनामिका अपनी सहेलियों के साथ घर लौट रही थी। अचानक उनके पास कार आकर रुकी और उसमें बैठे युवकों ने उसे कार में खींच लिया। युवती के साथ जा रही दोस्त कार का नंबर भी नोट नहीं कर पाई। मात्र इतना पता लगा कि लाल रंग की इंडिका थी।

खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान में कोई भी महिला सुरक्षित नहीं है। भारत में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध के कारण ही कानून में संशोधन किया गया। 16 दिसंबर की घटना के बाद हुए बदलाव के तहत दुष्कर्म और हत्या के मामलों में मृत्युदंड की सजा मिल सकती है। यह भी ऐसा ही एक मामला है जिसमें मृत्युदंड जरूरी है।

खंडपीठ ने कहा कि दोषियों ने अनामिका से दुष्कर्म ही नहीं किया बल्कि हत्या से पहले उसके संवेदनशील अंग को भी जला दिया। साक्ष्यों से स्पष्ट है कि शारीरिक पीड़ा और चोटों के निशान से ही उसकी मौत हुई थी। अदालत ने कहा कि इस मामले में दोषियों ने क्रूरता की चरम सीमा को पार किया।

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