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हरियाणा का रण: भाजपा के बागी ने त्रिकोणीय कर दिया मुकाबला, पहले कांग्रेस और बसपा का था कब्जा

Mon, 14 Oct 2019 05:46 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: देव कश्यप Updated Mon, 14 Oct 2019 05:46 AM IST
सार

  • पृथला विधानसभा सीट पर इस बार फिर मुकाबला रोचक रहने वाला है
  • भाजपा से बागी नयनपाल रावत के मैदान में होने के कारण त्रिकोणीय मुकाबला
  • जाट बाहुल्य इस सीट पर हरिजन, ब्राह्मण और ठाकुरों की संख्या अच्छी खासी है

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Haryana assembly election 2019 prithla assembly triangulated fight due to BJP Rebel leader
पृथला विधानसभा के गांव में टूटी पड़ी सड़क - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

दो जिलों में पड़ने वाली पृथला विधानसभा सीट पर इस बार फिर मुकाबला रोचक रहने वाला है। पिछले विधानसभा चुनाव की तरफ इस बार भी यहां कोई अलटफेर हो सकता है। टिकट न मिलने से भाजपा से बागी नयनपाल रावत के मैदान में होने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

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वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद आस्तित्व में आई इस सीट पर वर्ष 2009 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे रघुबीर सिंह तेवतियां ने जीत दर्ज कर विधानसभा चुनाव का रुख किया था। उस समय बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे टेकचंद शर्मा दूसरे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2014 में कांग्रेस ने दोबारा तेवतिया को और बसपा ने टेकचंद शर्मा को टिकट दिया था। तब पासा पलटा और टेकचंद शर्मा बसपा की टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने भाजपा के नयनपाल रावत को करीब 11 सौ वोटों के अंतर से पटखनी दी थी। पूरे प्रदेश में पृथला एकमात्र सीट थी, जहां से बसपा ने हरियाणा में अपना खाता खोला था।
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जाट बाहुल्य इस सीट पर हरिजन, ब्राह्मण और ठाकुरों की संख्या भी अच्छी खासी है। पृथला में देहात क्षेत्र अधिक होने के कारण यहां चुनावी मुकाबला काफी रोचक रहता है। कांग्रेस ने एक बार फिर से यहां रघुबीर तेवतिया पर ही अपना दांव लगाया है, जबकि भाजपा ने पिछले बार के उपविजेता नयनपाल रावत का टिकट काट कर सोहनपाल छोंकर को दिया है। इससे नाराज नयनपाल रावत पार्टी से बगावत कर निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
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इस कारण अब भाजपा को यहां दोहरी मेहनत करनी पड़ रही है। अपने प्रत्याशी के साथ-साथ बागी नयनपाल रावत के साथ जुड़े पार्टी के कार्यकर्ताओं को मनाने में भी उनको अपना समय देना पड़ रहा है। वहीं बसपा से विधायक रहे टेकचंद शर्मा कुछ समय पहले ही पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे में बसपा ने इस बार यहां से नए चेहरे सुरेंद्र वशिष्ठ को मैदान में उतारा है। इस बार यहां से कुल 10 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में पृथला सीट पर इस बार फिर चुनावी मुकाबला काफी रोचक होने वाला है।

बल्लभगढ़ और पलवल के गांवों से बनी पृथला सीट

वर्ष 2008 में हुए परिसीमन से पहला पृथला विधानसभा का अधिकांश हिस्सा बल्लभगढ़ विस सीट का होता था। परिसीमन के दौरान पलवल विधानसभा के 39 गांवों को भी पृथला में शामिल कर पृथला सीट बनाई गई थी।

10 प्रत्याशी हैं मैदान में

प्रत्याशी का नाम                पार्टी का नाम    चुनाव चिन्ह
सोहनपाल छोंकर                 भाजपा            कमल
रघुबीर सिंह तेवतिया            कांग्रेस            हाथ
सुरेंद्र वशिष्ठ                         बसपा            हाथी
नरेंद्र सिंह अत्री                    इनेलो            चश्मा
कल्याण शर्मा              लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी    ऑटो रिक्शा
नयनपाल रावत                  निर्दलीय           हेलीकॉप्टर
राजेश तेवतिया                  निर्दलीय           गैस सिलेंडर
सुरेंद्र कुमार                       निर्दलीय            चूड़ियां
कालीचरण                        निर्दलीय           बाल्टी
जोगिंद्र सिंह                      निर्दलीय           कैंची

  • कुल मतदाता : 190367
  • पुरुष मतदाता : 103142
  • महिला मतदाता : 87221
  • ट्रांसजेंडर मतदाता : 04
  • कुल मतदान केंद्र : 209

क्या कहते हैं स्थानीय

ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां की समस्याएं भी शहरी क्षेत्र से अलग है। क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। इस बार क्षेत्र के लोग समस्याओं का समाधान करने वाले प्रत्याशी को ही अपना वोट देंगे। - गिर्राज सिंह, गांव साहूपुरा

ग्रामीण अंचल होने के कारण कभी भी किसी नेता ने हमारे विकास के बारे में नहीं सोचा। हर कोई बस हमारा वोट मांगता है और उसके बाद भूल जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में विकास कार्य आशा अनुरूप नहीं हो पाए हैं। - गोवर्धन लाल

पृथला विधानसभा क्षेत्र लोगों की आजीविका का साधन खेतीबाड़ी है। मगर बिजली कटौती के कारण किसानों को काफी परेशानी होती है। इसके अलावा टूटी सड़कें, बढ़ती अविकसित कॉलोनियों की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। - वेदपाल

विधानसभा में पृथला औद्योगिक क्षेत्र और इंडस्ट्रीयल मॉडल टाउन (आईएमटी) भी आते हैं। इसके बावजूद क्षेत्र के युवा पढ़ने लिखने के बाद भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं। रोजगार की समस्या दूर करवाने प्रत्याशी को ही विधायक बनाकर चंडीगढ़ भेजेंगे। - रोशन लाल, साहूपुरा

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