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नोटबंदी के काले असर से आजाद हुआ ये बाजार, कैशलेस होता है सारा व्यापार
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Sun, 18 Dec 2016 02:13 PM IST
सार
एमजी रोड का बाजार हुआ ‘कैशलेस’, प्लास्टिक मनी और मोबाइल वॉलेट के जरिये किया जा रहा है लेनदेन
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नोटबंदी के बाद साइबर सिटी के एमजी रोड का बाजार ‘कैशलेस’ हो गया है। प्लास्टिक मनी और मोबाइल वॉलेट के जरिये एमजी रोड के बाजार की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है। मॉल की दुकानों से लेकर रेहड़ी पटरी के छोटे दुकान व फास्ट फूड संचालक सभी कैशलेस हो गए हैं।
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छोटे दुकानदारों के लिए उनका मोबाइल ही बैंक बन गया है। यहां आने वाले अधिकांश लोग प्लास्टिक मनी से ही खरीददारी करते हैं। बता दें कि नोटबंदी के बाद एमजी रोड का बाजार बहुत अधिक प्रभावित हुआ था। यहां के कारोबार में 30-40 फीसदी तक गिरावट आ गई थी।
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छोटे स्टॉल के जरिये मॉल में कमाने खाने वाले लोगों का कारोबार बिल्कुल ठप हो गया था। चाय, फास्ट फूड संचालक, गोलगप्पे बेचने वाले, मेहंदी लगाने वाले, टैरोकार्ड रीडर, पॉपकॉन बेचने वालों का कारोबार चौपट हो गया था।
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नोटबंदी के बाद अपने कारोबार को डूबता देख छोटे कारोबारियों ने खुद को अपडेट किया है। मॉल के बाहर चाय-पकौड़ी बेचने वाले पंकज कहते हैं कि नोटबंदी के बाद पहली बार उन्होंने पेटीएम का प्रयोग शुरू किया। इसी से लोग पकौड़े की कीमत देते हैं। अब ठीक-ठाक दुकानदारी होने लगी है।
97 फीसदी से अधिक आउटलेट कैशलेस
वहीं, मॉल्स के बड़े स्टोर और आउटलेट 97 फीसदी से अधिक कैशलेस हो गए हैं। आउटलेस मैनेजरों का कहना है कि पहले महीने में अधिक 20-30 फीसदी ही काम कैशलेस होता था। अब यह 2-3 फीसदी ही रहा है।
इसमें वह लोग शामिल हैं, जिनके पास कार्ड नहीं हैं या जो कूपन से खरीददारी करने आते हैं। डेबिट, क्रेडिट और ई-वॉलेट के जरिये खर्च करने की आदत यहां आने वाले लोगों में हो गई है। इसमें युवा से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
सभी चीजें अब पटरी पर लौट आई हैं। नाइक शोरूम के वरिष्ठ अधिकारी शिवम सलूजा कहते हैं यहां पर अब केवल प्लास्टिक मनी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। चाय भी पेटीएम से मंगवाते हैं। एमजी मॉल में स्टॉल लगाने वाली टैरोकार्ड रीडर स्वाति प्रिया कहती है कि एक क्लाइंट का चार्ज 500 रुपये है।
नोटबंदी के बाद यह तो बिल्कुल ठप हो गया था। इसे देखते हुए मोबीक्विक और पेटीएम वॉलेट के साथ स्वाइप मशीन रख ली है। इससे कुछ ग्राहक आने लगे हैं। वहीं, दूसरी ओर सीएनजी ऑटो चालकों ने भी पेटीएम और ओला से करार कर लिया है। जिससे लोगों को आसानी हो गई है।
इसमें वह लोग शामिल हैं, जिनके पास कार्ड नहीं हैं या जो कूपन से खरीददारी करने आते हैं। डेबिट, क्रेडिट और ई-वॉलेट के जरिये खर्च करने की आदत यहां आने वाले लोगों में हो गई है। इसमें युवा से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
सभी चीजें अब पटरी पर लौट आई हैं। नाइक शोरूम के वरिष्ठ अधिकारी शिवम सलूजा कहते हैं यहां पर अब केवल प्लास्टिक मनी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। चाय भी पेटीएम से मंगवाते हैं। एमजी मॉल में स्टॉल लगाने वाली टैरोकार्ड रीडर स्वाति प्रिया कहती है कि एक क्लाइंट का चार्ज 500 रुपये है।
नोटबंदी के बाद यह तो बिल्कुल ठप हो गया था। इसे देखते हुए मोबीक्विक और पेटीएम वॉलेट के साथ स्वाइप मशीन रख ली है। इससे कुछ ग्राहक आने लगे हैं। वहीं, दूसरी ओर सीएनजी ऑटो चालकों ने भी पेटीएम और ओला से करार कर लिया है। जिससे लोगों को आसानी हो गई है।