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....खाली दौड़ रही हैं बसें, सीमाओं पर जनसैलाब, पैदल चल रहे लोगों को बसों में सफर की नहीं है इजाजत
Sat, 28 Mar 2020 07:51 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 28 Mar 2020 07:51 AM IST
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पैदल जाते हुए लोग
- फोटो : अमर उजाला
.....बॉर्डर सील, खाली चल रही हैं बसें, सड़कों पर सैकड़ों पैदल चलते लोग। लॉकडाउन के दौरान गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा की सीमाएं तो सील कर दी गई हैं, लेकिन पलायन करती भीड़ को सहूलियत के नाम पर पैदल सीमाओं को लांघने की इजाजत है।
हैरत की बात तो यह है कि बसें सड़कों पर दिख भी रही हैं तो बॉर्डर तक भी पहुंचने के लिए इन बसों में सफर करने की इजाजत नहीं है। डीटीसी-क्लस्टर ड्राइवर कंडक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष चांद बाबू गोला ने कहा कि अभी भी सड़कों पर खाली बसें दौड़ रही हैं।
लेकिन इन बसों में केवल जरूरी कार्यों के लिए आने जाने वाले कर्मियों को आईडी कार्ड दिखाने के बाद ही आने जाने की इजाजत दी जा रही हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि लॉकडाउनके दौरान लगी पाबंदी के बाद आखिरकार यात्रियों की सुविधा में इस्तेमाल होने वाली बसें खाली होने के बावजूद जनसैलाब पैदल है और बसें खाली।
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इससे न तो संक्रमण पर शिकंजा कसेगा और न ही सरकार की आय में बढ़ोतरी होगी। अंतरराज्जीय बसों का अगर संचालन होने की वजह से दूसरे शहरों के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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हैरत की बात तो यह है कि बसें सड़कों पर दिख भी रही हैं तो बॉर्डर तक भी पहुंचने के लिए इन बसों में सफर करने की इजाजत नहीं है। डीटीसी-क्लस्टर ड्राइवर कंडक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष चांद बाबू गोला ने कहा कि अभी भी सड़कों पर खाली बसें दौड़ रही हैं।
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लेकिन इन बसों में केवल जरूरी कार्यों के लिए आने जाने वाले कर्मियों को आईडी कार्ड दिखाने के बाद ही आने जाने की इजाजत दी जा रही हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि लॉकडाउनके दौरान लगी पाबंदी के बाद आखिरकार यात्रियों की सुविधा में इस्तेमाल होने वाली बसें खाली होने के बावजूद जनसैलाब पैदल है और बसें खाली।
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इससे न तो संक्रमण पर शिकंजा कसेगा और न ही सरकार की आय में बढ़ोतरी होगी। अंतरराज्जीय बसों का अगर संचालन होने की वजह से दूसरे शहरों के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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ऐसे में दिहाड़ीदार श्रमिक अपने परिवार के साथ रोटी के लिए अब अपने गांव के लिए पलायन कर रहे हैं। आगे सैकड़ों किलोमीटर का पैदल चलने के जज्बे के साथ आगे बढ़ने वाले दिल्ली की सीमाओं पर भी पैदल चलने को विवश है।