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सामने दम तोड़ रही थी पत्नी, लाचार देख रहे थे अरुण
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गुरुग्राम। चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी में फ्लैट की छत गिरने से हुए हादसे में अरुण श्रीवास्तव और उनकी पत्नी सुनीता श्रीवास्तव मलबे में दब गए थे। जिसमें अरुण श्रीवास्तव तो बच गए लेकिन उनकी पत्नी जिंदगी की जंग हार गईं। वह लाचार होकर मलबे में दबी पत्नी को जिंदगी की जंग हारते हुए देखते रहे। 17 घंटे मलबे में दबे रहने के दौरान अरुण श्रीवास्तव ने कई बार पत्नी को इस उम्मीद में पुकारा कि शायद कोई जवाब आए लेकिन कोई जवाब नहीं आया। बाद में प्रशासन ने सुनीता श्रीवास्तव की मौत की पुष्टि की। जिसे मानने को अरुण श्रीवास्तव तैयार नहीं थे।
सोसाइटी के लोगों ने बताया कि हादसे वाली शाम को अरुण श्रीवास्तव और उनकी पत्नी चाय पीते हुए टीवी देख रहे थे। 10 दिन पहले ही वह बृहस्पतिवार को कहीं बाहर से अपने फ्लैट पर वापस आए थे। इसी दिन हादसा हो गया। हादसे के बाद अरुण श्रीवास्तव मलबे में 17 घंटे तक फंसे रहे। वह जरा भी हिल नहीं पा रहे थे। उनके बगल में ही उनकी पत्नी मलबे में दबी हुई थीं। बचाव कार्य करने वालों के मुताबिक सुनीता श्रीवास्तव मलबे में इस प्रकार दबी थीं कि वह दम तोड़ चुकी थीं। अरुण श्रीवास्तव के सामने ही उन्होंने दम तोड़ दिया था। दोनों कुछ ही दूरी पर फंसे हुए थे।
जिंदगी की जंग जीते अरुण
शुक्रवार को जब एनडीआरएफ के जवान अरुण श्रीवास्तव को मलबे से निकालने के बाद स्ट्रेचर पर बाहर लाए तो उन्होंने हाथ हिला कर स्वयं के सकुशल होने का संकेत दिया। उन्होंने अपने ऑफिस के एक सहकर्मी से हाथ भी मिलाया। वहां मौजूद डॉक्टर्स और अधिकारियों ने भी उनके सही सलामत होने की बात बताई। अस्पताल में उन्होंने अपने परिचितों से पत्नी का बचाव नहीं कर पाने पर अफसोस जताया।
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सोसाइटी के लोगों ने बताया कि हादसे वाली शाम को अरुण श्रीवास्तव और उनकी पत्नी चाय पीते हुए टीवी देख रहे थे। 10 दिन पहले ही वह बृहस्पतिवार को कहीं बाहर से अपने फ्लैट पर वापस आए थे। इसी दिन हादसा हो गया। हादसे के बाद अरुण श्रीवास्तव मलबे में 17 घंटे तक फंसे रहे। वह जरा भी हिल नहीं पा रहे थे। उनके बगल में ही उनकी पत्नी मलबे में दबी हुई थीं। बचाव कार्य करने वालों के मुताबिक सुनीता श्रीवास्तव मलबे में इस प्रकार दबी थीं कि वह दम तोड़ चुकी थीं। अरुण श्रीवास्तव के सामने ही उन्होंने दम तोड़ दिया था। दोनों कुछ ही दूरी पर फंसे हुए थे।
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जिंदगी की जंग जीते अरुण
शुक्रवार को जब एनडीआरएफ के जवान अरुण श्रीवास्तव को मलबे से निकालने के बाद स्ट्रेचर पर बाहर लाए तो उन्होंने हाथ हिला कर स्वयं के सकुशल होने का संकेत दिया। उन्होंने अपने ऑफिस के एक सहकर्मी से हाथ भी मिलाया। वहां मौजूद डॉक्टर्स और अधिकारियों ने भी उनके सही सलामत होने की बात बताई। अस्पताल में उन्होंने अपने परिचितों से पत्नी का बचाव नहीं कर पाने पर अफसोस जताया।
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