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मंत्री को लंबे समय से निगम में जमे भ्रष्ट अधिकारियों का सौंपा चिट्ठा

Fri, 06 Aug 2021 06:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 06:18 PM IST
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The letter handed over to the minister of corrupt officials in the corporation for a long time
गुरुग्राम। नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा गरम है। आगामी दिनों में निगम के उन अधिकारियों का स्थानांतरण हो सकता है, जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। निगम के कुछ पूर्व व मौजूदा पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को गृह व शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज से मुलाकात की। पार्षदों की विज से मुलाकात के बाद अधिकारियों में भी बेचैनी बढ़ गई है।
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न सिर्फ भ्रष्टाचार बल्कि फिजूलखर्ची के मामले में भी गुरुग्राम नगर निगम प्रदेश में बदनाम है। अधिकारियों की मनमानी के कारण निगम में मशीनरी व कर्मचारियों पर जमकर पैसा बहाया जा रहा है। इससे निगम को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। वहीं, प्रदेश में अधिकारियों की लंबी-चौड़ी फौज होने के बावजूद गुरुग्राम निगम के कई अधिकारियों को मानेसर निगम समेत अन्य विभागों में अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
इन तमाम मुद्दों को लेकर बृहस्पतिवार को पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ जाकर गृह मंत्री अनिल विज से मुलाकात की। इनमें डिप्टी मेयर सुनीता यादव के पति अनिल यादव, वार्ड-22 की पार्षद सुनीता यादव के पति नीरज यादव, वार्ड-13 के पार्षद ब्रह्म यादव व एक अन्य समेत 4 लोग शामिल रहे। बताया जा रहा है कि पार्षदों ने मंत्री को विज को कई अधिकारियों के कार्यों व उनके गड़बड़झालों का पूरा चिट्ठा सौंपा है। अनिल विज ने भी पार्षदों द्वारा दी गई जानकारी को गंभीरता से लेते हुए मामले की आंतरिक तौक पर जांच कराने के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
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अतिरिक्त चार्ज हटाने की मांग
पार्षदों ने मंत्री विज से उन अधिकारियों का खास तौर पर उल्लेख किया है, जिनको बेवजह अतिरिक्त चार्ज दिए गए हैं। पार्षदों का कहना है कि गुरुग्राम नगर निगम में पहले से ही काम का काफी बोझ है, ऐसे में दूसरे विभागों का अतिरिक्त जिम्मा देने की बात समझ में नहीं आती। वहीं, नगर निगम में कंसल्टेंट, एडवाइजर, क्लर्क समेत अतिरिक्त स्टाफ के जमे होने की जानकारी भी दी है। मालूम हो कि नगर निगम के जनप्रतिनिधि पिछले काफी समय से फिजूलखर्ची रोकने व कामकाज में पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं, लेकिन शासन स्तर से अब तक कोई खास कार्रवाई नहीं की गई है। स्थिति यह है कि जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर हुई है, उनके विभाग तक में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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