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नैनो यूरिया की पहली खेप अगले सप्ताह आएगी, किसानों में उत्साह
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गुरुग्राम। नैनो यूरिया की पहली खेप अगले सप्ताह गुरुग्राम पहुंच रही है। किसानों को नैनो तरल यूरिया का बेसब्री से इंतजार है। खाद एक्सपर्ट और इफ्को के क्षेत्रीय अध्यक्ष बलविंदर सिंह नाइक ने कहा कि यह खाद किसानों और खेतों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
बलविंदर सिंह ने गुजरात से वर्चुअल के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस बारे में गुरुग्राम इफ्को के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक राजेंद्र शर्मा ने बताया कि इफ्को द्वारा देशभर के अनुसंधान केंद्रों व खेतों में विभिन्न फसलों पर 11000 से अधिक क्षेत्रों में ट्रायल किया गया था। इस ट्रायल में सामान्य यूरिया की मात्रा में 50% कमी करते हुए नैनो यूरिया तरल का प्रयोग किया गया। इन सभी फसलों में नैनो यूरिया के उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए हैं। इसकी पहली खेप अब अगले सप्ताह गुरुग्राम सहित प्रदेश के अन्य जिलों में पहुंच रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो यूरिया की आधा लीटर मात्रा एक बोरा सामान्य यूरिया के बराबर काम करेगी। सामान्य यूरिया के फसल में प्रयोग करने पर पौधों को नाइट्रोजन 35 से 40% मात्रा ही मिलती है शेष नाइट्रोजन की मात्रा वायु, मृदा, भूमिगत जल को प्रदूषित करती है। परंतु नैनो यूरिया के प्रयोग करने पर पौधों को नाइट्रोजन की 85% मात्रा उपलब्ध होगी। इससे कृषि लागत में कमी आएगी। उपज में वृद्धि होने से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और इससे उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। साथ ही वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण व भूमिगत जल प्रदूषण में कमी आएगी।
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नैनो यूरिया की विशेषता यह है कि किसानों को अब 45 किलोग्राम यूरिया के थैले को ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए इफ्को नैनो यूरिया तरल की 500 एमएल की बोतल ही पर्याप्त होगा।
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बलविंदर सिंह ने गुजरात से वर्चुअल के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस बारे में गुरुग्राम इफ्को के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक राजेंद्र शर्मा ने बताया कि इफ्को द्वारा देशभर के अनुसंधान केंद्रों व खेतों में विभिन्न फसलों पर 11000 से अधिक क्षेत्रों में ट्रायल किया गया था। इस ट्रायल में सामान्य यूरिया की मात्रा में 50% कमी करते हुए नैनो यूरिया तरल का प्रयोग किया गया। इन सभी फसलों में नैनो यूरिया के उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए हैं। इसकी पहली खेप अब अगले सप्ताह गुरुग्राम सहित प्रदेश के अन्य जिलों में पहुंच रही है।
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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो यूरिया की आधा लीटर मात्रा एक बोरा सामान्य यूरिया के बराबर काम करेगी। सामान्य यूरिया के फसल में प्रयोग करने पर पौधों को नाइट्रोजन 35 से 40% मात्रा ही मिलती है शेष नाइट्रोजन की मात्रा वायु, मृदा, भूमिगत जल को प्रदूषित करती है। परंतु नैनो यूरिया के प्रयोग करने पर पौधों को नाइट्रोजन की 85% मात्रा उपलब्ध होगी। इससे कृषि लागत में कमी आएगी। उपज में वृद्धि होने से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और इससे उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। साथ ही वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण व भूमिगत जल प्रदूषण में कमी आएगी।
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नैनो यूरिया की विशेषता यह है कि किसानों को अब 45 किलोग्राम यूरिया के थैले को ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए इफ्को नैनो यूरिया तरल की 500 एमएल की बोतल ही पर्याप्त होगा।