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Gurugram News: निजी स्कूल वाहन चालकों को नहीं है प्रशासन का डर, छात्रों को छतों पर बैठाकर कर रहे सफर

Mon, 19 May 2025 10:59 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 19 May 2025 10:59 PM IST
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Private school drivers have no fear of the administration, they are travelling with students on the roofs
प्रशासन की अनदेखी के कारण नियमों को ताक पर रख चल रहे चालक
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गुरुदत्त भारद्वाज

पुन्हाना। गत वर्ष महेंद्रगढ़ के कनीना में हुए स्कूली बस हादसे के बाद जिले की पुलिस ने निजी स्कूलों के वाहनों की जांच का अभियान चलाया,लेकिन ये अभियान केवल खानापूर्ति तक ही सीमित रहा। शहर सहित आसपास के बड़े गांव में चल रहे निजी स्कूल संचालक बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं। ऐसे स्कूलों द्वारा बच्चों को लाने-ले जाने के लिए चलाए जा रहे स्कूल के वाहन नियमों को ताक पर रख कर चलाए जा रहे हैं। ऐसा नहीं की स्थानीय प्रशासन इस सब से अंजान है बल्कि अधिकतर वाहन पुन्हाना लघु सचिवालय के सामने से गुजरते हैं।
स्थानीय प्रशासन द्वारा ऐसे वाहनों की जांच तो दूर की बात है बल्कि कभी स्कूल के वाहनों को लेकर कोई जांच अभियान तक नहीं चलाया गया। प्रशासन की लापरवाही के कारण इन निजी स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है। स्कूल बसों का प्रयोग न कर खुले आम ऐसे स्कूल थ्री व्हीलर, वैन सहित अन्य दोपहिया वाहनों में स्कूल ठूंस-ठूंस कर स्कूल लाने-ले जाने का काम कर रहे है। स्कूल संचालकों की इस मनमानी व प्रशासन की लापरवाही के सामने बच्चों के अभिभावक बेबस हैं।
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पुन्हाना शहर सहित आसपास के गांवों में दर्जनों निजी स्कूल खुले हुए हैं। इन स्कूलों में दूर दराज से आने वाले बच्चों के लिए बसे, थ्री व्हीलर व वैन सहित अन्य फोर व्हीलर चलाए हुए हैं। स्कूल संचालक बच्चों को स्कूल तक लाने व वापस घर तक ले जाने के लिए अभिभावकों से मनमाना चार्ज वसूल करते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर इन बच्चों को वाहनों में क्षमता से अधिक भरकर व वाहनों के पीछे लटकाकर इन्हें स्कूल लाने व ले जाने का काम कर रहे हैं। जिला पुलिस जिले भर के स्कूलों में जाकर यातायात के नियमों के बारे में भले ही जागरूक कर रही हो, लेकिन ऐसे स्कूलों पर पुलिस के इस अभियान का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा बल्कि ऐसे स्कूल के वाहन नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि निजी स्कूलों की अधिकतर बसें ऐसी हैं जो पूरी तरह कंडम हैं, ऐसे वाहनों में बच्चों के साथ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके अलावा ऐसे वाहनों की फिटनेस तक नहीं है। बड़े-बड़े शहरों में चलने वाले स्कूलों से खरीदकर लाए गए ऐसे वाहन कंडम घोषित किए हुए हैं लेकिन निजी स्कूल संचालक ऐसे वाहनों में बच्चों को बैठाकर उनकी जीवन से खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं।


स्कूल के वाहनों को लेकर जल्द ही चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। किसी भी सूरत में बच्चों की जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे वाहनों की फिटनेस के साथ-साथ वाहनों के कागजात व ड्राइवरों के लाइसेंस की जांच की जाएगी। - मुनीष सहगल, आरटीओ, नूंह
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