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Gurugram News: द्वारका एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट को ग्रहण
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फोटो- 1
एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट में लगे ट्री गार्ड टूटे पड़े और पौधे गायब
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। द्वारका एक्सप्रेसवे पर हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई ग्रीन बेल्ट अब उपेक्षा का शिकार हो रही है। एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन के किनारे बनी ग्रीन बेल्ट में बड़ी संख्या में ट्री गार्ड टूटे पड़े हैं जबकि अधिकतर स्थानों से पौधे पूरी तरह गायब हो चुके हैं।
ग्रीन बेल्ट की यह दयनीय स्थिति न केवल पर्यावरण को प्रभावित कर रही है बल्कि क्षेत्र की खूबसूरती भी घटा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण किया गया था लेकिन देखरेख के अभाव में पौधे सूख गए या किसी ने उखाड़ दिए। वहीं, टूटे हुए ट्री गार्ड यह साबित करते हैं कि रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट से जुड़ा रखरखाव कार्य वन विभाग के अधीन आता है। उनका दावा है कि विभाग को कई बार सूचना दी जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस कारण ग्रीन बेल्ट विकसित होने के बजाय दिन-ब-दिन खत्म होती जा रही है। स्थानीय निवासी सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को उठा रहे हैं और अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र की हरियाली बढ़ाई जा सके। एनएचएआई के परियोजना निदेशक आकाश पाढ़ी ने बताया कि यह ट्री गार्ड वन विभाग द्वारा लगाए गए थे। ऐसे में रखरखाव की जिम्मेदारी वन विभाग की है।
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एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट में लगे ट्री गार्ड टूटे पड़े और पौधे गायब
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। द्वारका एक्सप्रेसवे पर हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई ग्रीन बेल्ट अब उपेक्षा का शिकार हो रही है। एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन के किनारे बनी ग्रीन बेल्ट में बड़ी संख्या में ट्री गार्ड टूटे पड़े हैं जबकि अधिकतर स्थानों से पौधे पूरी तरह गायब हो चुके हैं।
ग्रीन बेल्ट की यह दयनीय स्थिति न केवल पर्यावरण को प्रभावित कर रही है बल्कि क्षेत्र की खूबसूरती भी घटा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण किया गया था लेकिन देखरेख के अभाव में पौधे सूख गए या किसी ने उखाड़ दिए। वहीं, टूटे हुए ट्री गार्ड यह साबित करते हैं कि रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट से जुड़ा रखरखाव कार्य वन विभाग के अधीन आता है। उनका दावा है कि विभाग को कई बार सूचना दी जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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इस कारण ग्रीन बेल्ट विकसित होने के बजाय दिन-ब-दिन खत्म होती जा रही है। स्थानीय निवासी सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को उठा रहे हैं और अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र की हरियाली बढ़ाई जा सके। एनएचएआई के परियोजना निदेशक आकाश पाढ़ी ने बताया कि यह ट्री गार्ड वन विभाग द्वारा लगाए गए थे। ऐसे में रखरखाव की जिम्मेदारी वन विभाग की है।
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