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अदालत ने दिया 22.89 लाख की जुर्माना राशि लौटाने का आदेश
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अदालत ने दिया 22.89 लाख की जुर्माना राशि लौटाने का आदेश
गुरुग्राम। 8 वर्ष पूर्व उपभोक्ता के घरेलू बिजली कनेक्शन का वाणिज्यिक उपयोग करने का आरोप लगाकर 22.89 लाख का जुर्माना वसूलने के मामले में बिजली निगम को अदालत से झटका लगा है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बिजली निगम की याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने निगम को उपभोक्ता की जुर्माना राशि भी लौटाने का आदेश दिया।
उपभोक्ता पक्ष के अधिवक्ता क्षितिज मेहता के मुताबिक, 10 मई 2012 को उद्योग विहार फेज-5 के प्लॉट नंबर-268 स्थित इंद्रसिंह अरोड़ा के यहां पर बिजली निगम अधिकारियों ने छापा मारा। अधिकारियों ने जांच के बाद आरोप लगाया कि उपभोक्ता अपने एचटी कनेक्शन का वाणिज्यिक उपयोग कर रहे थे। निगम अधिकारियों की ओर से 10 माह तक चली जांच के बाद 10 मार्च 2013 को उपभोक्ता पर 22 लाख 89 हजार 224 रुपये का जुर्माना लगा दिया। हालांकि उपभोक्ता की ओर से आला अधिकारियों को भी शिकायत करते हुए कहा गया कि उसका बिजली कनेक्शन तय मानकों पर ही चल रहा है, जिसे अधिकारियों ने अनसुना कर दिया। उपभोक्ता की ओर से बिजली निगम में 22.89 लाख का भारी भरकम जुर्माना जमा कराते हुए 26 अप्रैल 2013 को निगम के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर दी। तमाम सबूतों और गवाहों के आधार पर सिविल जज गगनदीप मित्तल की अदालत ने 6 जनवरी 2017 को निगम के खिलाफ फैसला सुनाते हुए जुर्माना राशि लौटाने का आदेश दिया। जिसे निगम अधिकारियों ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार शर्मा की अदालत में चुनौती दी। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए बिजली निगम से जुर्माना राशि लौटाने का आदेश सुनाया। अधिवक्ता क्षितिज ने बताया कि बिजली निगम की ओर से बिजली चोरी के कई गलत मामलों को अदालत पहले भी खारिज कर चुका है।
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गुरुग्राम। 8 वर्ष पूर्व उपभोक्ता के घरेलू बिजली कनेक्शन का वाणिज्यिक उपयोग करने का आरोप लगाकर 22.89 लाख का जुर्माना वसूलने के मामले में बिजली निगम को अदालत से झटका लगा है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बिजली निगम की याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने निगम को उपभोक्ता की जुर्माना राशि भी लौटाने का आदेश दिया।
उपभोक्ता पक्ष के अधिवक्ता क्षितिज मेहता के मुताबिक, 10 मई 2012 को उद्योग विहार फेज-5 के प्लॉट नंबर-268 स्थित इंद्रसिंह अरोड़ा के यहां पर बिजली निगम अधिकारियों ने छापा मारा। अधिकारियों ने जांच के बाद आरोप लगाया कि उपभोक्ता अपने एचटी कनेक्शन का वाणिज्यिक उपयोग कर रहे थे। निगम अधिकारियों की ओर से 10 माह तक चली जांच के बाद 10 मार्च 2013 को उपभोक्ता पर 22 लाख 89 हजार 224 रुपये का जुर्माना लगा दिया। हालांकि उपभोक्ता की ओर से आला अधिकारियों को भी शिकायत करते हुए कहा गया कि उसका बिजली कनेक्शन तय मानकों पर ही चल रहा है, जिसे अधिकारियों ने अनसुना कर दिया। उपभोक्ता की ओर से बिजली निगम में 22.89 लाख का भारी भरकम जुर्माना जमा कराते हुए 26 अप्रैल 2013 को निगम के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर दी। तमाम सबूतों और गवाहों के आधार पर सिविल जज गगनदीप मित्तल की अदालत ने 6 जनवरी 2017 को निगम के खिलाफ फैसला सुनाते हुए जुर्माना राशि लौटाने का आदेश दिया। जिसे निगम अधिकारियों ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार शर्मा की अदालत में चुनौती दी। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए बिजली निगम से जुर्माना राशि लौटाने का आदेश सुनाया। अधिवक्ता क्षितिज ने बताया कि बिजली निगम की ओर से बिजली चोरी के कई गलत मामलों को अदालत पहले भी खारिज कर चुका है।
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