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Gurugram News: मुख्यमंत्री राहत कोष से चिकित्सा सहायता आवेदन प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल
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- जरूरतमंदों को मात्र 15 दिन में मिलेगी आर्थिक मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मुख्यमंत्री राहत कोष से चिकित्सा सहायता के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल व पारदर्शी हो गई है। अब लोगों को इसके लिए किसी बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की आवश्यकता नहीं होगी। प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाकर सरल पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे पात्र व्यक्तियों को मात्र 15 दिनों के भीतर चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
कोई भी पात्र नागरिक सरल पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष के अंतर्गत चिकित्सा आधार पर वित्तीय सहायता के लिए परिवार पहचान पत्र के माध्यम से आवेदन कर सकता है। आवेदन के साथ चिकित्सा बिल, ओपीडी पर्ची और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
सरकार द्वारा इस सहायता की अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है, जो कि इलाज खर्च का 25 प्रतिशत होगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह सहायता एक वित्तीय वर्ष में केवल एक बार ही दी जाएगी।
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उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने स्पष्ट किया कि यदि कोई बीमारी आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना में कवर नहीं हो रही है, तो उस स्थिति में आयुष्मान कार्ड धारक भी इस योजना का लाभ ले सकते है। इस योजना की समीक्षा और अनुमोदन के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें सांसद, विधायक, उपायुक्त, सिविल सर्जन, जिला परिषद व नगर निकायों के अध्यक्ष, पंचायत समिति प्रमुख शामिल होंगे तथा नगराधीश को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मुख्यमंत्री राहत कोष से चिकित्सा सहायता के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल व पारदर्शी हो गई है। अब लोगों को इसके लिए किसी बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की आवश्यकता नहीं होगी। प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाकर सरल पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे पात्र व्यक्तियों को मात्र 15 दिनों के भीतर चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
कोई भी पात्र नागरिक सरल पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष के अंतर्गत चिकित्सा आधार पर वित्तीय सहायता के लिए परिवार पहचान पत्र के माध्यम से आवेदन कर सकता है। आवेदन के साथ चिकित्सा बिल, ओपीडी पर्ची और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
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सरकार द्वारा इस सहायता की अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है, जो कि इलाज खर्च का 25 प्रतिशत होगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह सहायता एक वित्तीय वर्ष में केवल एक बार ही दी जाएगी।
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उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने स्पष्ट किया कि यदि कोई बीमारी आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना में कवर नहीं हो रही है, तो उस स्थिति में आयुष्मान कार्ड धारक भी इस योजना का लाभ ले सकते है। इस योजना की समीक्षा और अनुमोदन के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें सांसद, विधायक, उपायुक्त, सिविल सर्जन, जिला परिषद व नगर निकायों के अध्यक्ष, पंचायत समिति प्रमुख शामिल होंगे तथा नगराधीश को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।