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Gurugram News: निजी अकादमियों की भारी फीस से खिलाड़ी परेशान
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क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और तैराकी जैसे खेलों में प्रशिक्षण के लिए खर्च करना पड़ रहा मोटा पैसा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। साइबर सिटी में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन प्रतिभा को निखारने के लिए खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से भी मजबूत होना पड़ रहा है। क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और तैराकी जैसे खेलों में बेहतर प्रशिक्षण हासिल करने के लिए निजी अकादमियों का रुख करने वाले खिलाड़ियों को हर महीने मोटी फीस चुकानी पड़ रही है।
ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए खेलों में आगे बढ़ना आसान नहीं है। कई परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और खेल प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। जिले में सरकारी खेल नर्सरियां संचालित होने के बावजूद इनमें खिलाड़ियों के लिए सीमित स्थान होने के कारण बड़ी संख्या में खिलाड़ी निजी अकादमियों पर निर्भर हैं। जिले में खेलों के प्रति युवाओं का रुझान लगातार बना हुआ है। क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और तैराकी जैसे खेलों में कॅरिअर बनाने की इच्छा रखने वाले बच्चे नियमित अभ्यास के लिए अकादमियों में दाखिला लेते हैं। निजी अकादमियों में खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए मैदान, कोचिंग और खेल के अनुसार जरूरी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन इसके लिए परिवारों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। फीस के अलावा खेल उपकरण, किट, जूते, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और आने-जाने का खर्च भी उठाना पड़ता है।
बाइटस...
निजी अकादमी में नियमित अभ्यास करने के लिए फीस देनी पड़ती है। किट और अन्य जरूरी सामान पर भी खर्च होता है। - गोल्डन मुखिया, क्रिकेट खिलाड़ी
अकादमी की फीस के साथ आने-जाने और जूतों का खर्च भी रहता है। खिलाड़ियों के लिए मुश्किल हो जाता है। - पारुल, फुटबॉल खिलाड़ी
टेबल टेनिस में प्रशिक्षण के साथ रैकेट, शटल और अन्य जरूरी सामान पर भी खर्च करना पड़ता है। - निवान, टेबल टेनिस खिलाड़ी
जिले में अगर सरकारी स्विमिंग पूल की व्यवस्था होती, तो निजी अकादमी में प्रशिक्षण लेने नहीं जाना पड़ता। - आर्ना, तैराकी खिलाड़ी
वर्जन
जिले में सरकारी खेल नर्सरियों के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था है। खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराने के लिए खेल नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। पंचायत स्तर पर भी नर्सरियों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - आरती कोहली, जिला खेल अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। साइबर सिटी में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन प्रतिभा को निखारने के लिए खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से भी मजबूत होना पड़ रहा है। क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और तैराकी जैसे खेलों में बेहतर प्रशिक्षण हासिल करने के लिए निजी अकादमियों का रुख करने वाले खिलाड़ियों को हर महीने मोटी फीस चुकानी पड़ रही है।
ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए खेलों में आगे बढ़ना आसान नहीं है। कई परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और खेल प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। जिले में सरकारी खेल नर्सरियां संचालित होने के बावजूद इनमें खिलाड़ियों के लिए सीमित स्थान होने के कारण बड़ी संख्या में खिलाड़ी निजी अकादमियों पर निर्भर हैं। जिले में खेलों के प्रति युवाओं का रुझान लगातार बना हुआ है। क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और तैराकी जैसे खेलों में कॅरिअर बनाने की इच्छा रखने वाले बच्चे नियमित अभ्यास के लिए अकादमियों में दाखिला लेते हैं। निजी अकादमियों में खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए मैदान, कोचिंग और खेल के अनुसार जरूरी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन इसके लिए परिवारों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। फीस के अलावा खेल उपकरण, किट, जूते, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और आने-जाने का खर्च भी उठाना पड़ता है।
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बाइटस...
निजी अकादमी में नियमित अभ्यास करने के लिए फीस देनी पड़ती है। किट और अन्य जरूरी सामान पर भी खर्च होता है। - गोल्डन मुखिया, क्रिकेट खिलाड़ी
अकादमी की फीस के साथ आने-जाने और जूतों का खर्च भी रहता है। खिलाड़ियों के लिए मुश्किल हो जाता है। - पारुल, फुटबॉल खिलाड़ी
टेबल टेनिस में प्रशिक्षण के साथ रैकेट, शटल और अन्य जरूरी सामान पर भी खर्च करना पड़ता है। - निवान, टेबल टेनिस खिलाड़ी
जिले में अगर सरकारी स्विमिंग पूल की व्यवस्था होती, तो निजी अकादमी में प्रशिक्षण लेने नहीं जाना पड़ता। - आर्ना, तैराकी खिलाड़ी
वर्जन
जिले में सरकारी खेल नर्सरियों के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था है। खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराने के लिए खेल नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। पंचायत स्तर पर भी नर्सरियों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - आरती कोहली, जिला खेल अधिकारी
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