जीएसटी का एक साल: व्यापारी बोले, मंदा हुआ काम, जीएसटी देखते ही हट जाता है ग्राहक
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए एक साल पूरे होने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात में एक देश, एक कर को एक साल में ही व्यवस्थित तरीके से लागू करने पर राज्य सरकार को इसका श्रेय दिया है। जीएसटी लागू होने से उद्यमी काफी खुश हैं, वहीं व्यापारी इसे लेकर फिफ्टी-फिफ्टी मोड पर हैं। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद से काम में मंदा आया है। ग्राहक जीएसटी देने को तैयार नहीं है। ऐसे में इसका बोझ व्यापारी पर ही आ रहा है। वहीं उद्यमी जीएसटी लागू से होने पर इंस्पेक्टरी राज खत्म होने से इससे काफी खुश हैं
उद्योगपति बीआर भाटिया ने कहा, जीएसटी लागू होने के बाद से उद्योगों को काफी बढ़ावा मिल रहा है। उद्योगपति को टैक्स भरने तथा पूरे देश में एक ही कर व्यवस्था लागू होने से काफी राहत मिली है। पहले देश में 17 तरह के टैक्स होते थे। उन सभी का भुगतान और फिर उनका रिकार्ड रखना काफी परेशानी वाला काम था।
अब जब से जीएसटी लागू हुआ है, ऑनलाइन टैक्स का भुगतान कर काफी राहत मिली है। साथ ही कारोबार में भी बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी के आने से सभी तरह के चेक पोस्ट खत्म हो गए और माल सामानों की आवाजाही तेज हो गई। जिससे न सिर्फ समय बच रहा है बल्कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी इसका काफी लाभ मिल रहा है। जीएसटी का उद्योग जगत ने स्वागत किया है और इसके लिाए केंद्र सरकार बधाई की पात्र है।
एनआईटी-1 नंबर मार्केट, प्रधान, अजय नौनीहाल ने कहा कि जब से जीएसटी लागू हुआ है तब से काम में मंदा ही मंदा है। रेडीमेड कपड़े की खरीददारी में पहले तो कोई टैक्स देता नहीं है, गलती से कोई बिल कटवाता है और उसे जीएसटी मांगे तो वह देने को तैयार नहीं होता है। जोर जबरदस्ती करो तो वह सामान छोड़कर जाने को तैयार हो जाता है।
ऐसे में मजबूर व्यापारी को जीएसटी का भुगतान अपनी जेब से करना पड़ता है। आज की तारीख में तो वे लोग ज्यादा अच्छा कारोबार कर रहे हैं जो जीएसटी के बिना ही काम कर रहे हैं। न तो उन्हें टैक्स भरने की चिंता और न ही कागजी कार्रवाई की परेशानी। ग्राहक को भी वहां से सस्ता माल मिलता है तो वह वहीं जाता है।