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प्रदूषण ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, ग्रेटर नोएडा रहा देश का सबसे प्रदूषित शहर, 476 पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
Thu, 24 Dec 2020 12:03 PM IST
प्राची प्रियम
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 24 Dec 2020 12:03 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : एएनआई
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गौतमबुद्ध नगर जिले में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे लोगों को सांस तक लेना दूभर हो गया है। बुधवार को ग्रेटर नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 476 और नोएडा का 462 दर्ज किया गया। इससे ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा।
जबकि, नोएडा तीसरे स्थान पर रहा। मंगलवार को ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 450 व नोएडा का 437 दर्ज किया गया था। बुधवार को सुबह से ही आसमान में धूल छाई हुई थी। ग्रेटर नोएडा में दो और नोएडा में चार मॉनिटरिंग स्टेशन से प्रदूषण स्तर की जांच की गई।
सुबह से ही अधिकतर स्टेशन डार्क रेड जोन में थे। दोपहर के बाद थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शाम को चार बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बुलेटिन में नोएडा का एक्यूआई 462 व ग्रेटर नोएडा का 476 दर्ज किया गया।
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सूचकांक के अनुसार शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 को मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
जिले के वातावरण में मौजूद पीएम 2.5 के कण इतने छोटे हैं कि इन्हें नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता। सांस लेने के दौरान ये कण फेफड़ों में चले जाते हैं। इससे खांसी और अस्थमा के मरीज परेशान हैं। इन कणों का हवा में स्तर बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदूषण की बड़ी वजह धूल
लोगों का कहना है कि जिले में धूल उड़ रही है। इस पर पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। ये प्रदूषण की बड़ी वजह है। दिल्ली एनसीआर में ग्रेप लागू है। इसके बावजूद भी संबंधित एजेंसियां सख्ती से पालन नहीं कर रही हैं।
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जबकि, नोएडा तीसरे स्थान पर रहा। मंगलवार को ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 450 व नोएडा का 437 दर्ज किया गया था। बुधवार को सुबह से ही आसमान में धूल छाई हुई थी। ग्रेटर नोएडा में दो और नोएडा में चार मॉनिटरिंग स्टेशन से प्रदूषण स्तर की जांच की गई।
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सुबह से ही अधिकतर स्टेशन डार्क रेड जोन में थे। दोपहर के बाद थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शाम को चार बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बुलेटिन में नोएडा का एक्यूआई 462 व ग्रेटर नोएडा का 476 दर्ज किया गया।
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सूचकांक के अनुसार शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 को मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
जिले के वातावरण में मौजूद पीएम 2.5 के कण इतने छोटे हैं कि इन्हें नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता। सांस लेने के दौरान ये कण फेफड़ों में चले जाते हैं। इससे खांसी और अस्थमा के मरीज परेशान हैं। इन कणों का हवा में स्तर बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदूषण की बड़ी वजह धूल
लोगों का कहना है कि जिले में धूल उड़ रही है। इस पर पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। ये प्रदूषण की बड़ी वजह है। दिल्ली एनसीआर में ग्रेप लागू है। इसके बावजूद भी संबंधित एजेंसियां सख्ती से पालन नहीं कर रही हैं।