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दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल के 2 ब्रांच किए टेकरओवर, चंद घंटों में HC ने लगाया फैसले पर स्टे

Thu, 04 Aug 2016 01:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 04 Aug 2016 01:17 PM IST
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Government strict on private schools, takeover two branches of the Maxfort school
केजरीवाल - फोटो : ani

निजी स्कूलों पर सख्ती दिखाते हुए दिल्ली सरकार ने मैक्सफोर्ट स्कूल की पीतमपुरा व रोहिणी शाखा का टेकओवर कर लिया है। उपराज्यपाल से मिली स्वीकृति के बाद ही सरकार ने स्कूल के अधिग्रहण करने का आदेश जारी किया। 

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अब इस तरह से स्कूल का प्रबंधन और संचालन दिल्ली सरकार के हाथों में आ गया है। स्कूल में जो काम होगा वह शिक्षा निदेशालय के माध्यम से किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में एक आदेश भी जारी किया। 
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उल्लेखनीय है कि दोनों शाखाओं को शिक्षा निदेशालय ने अप्रैल में दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 1973 की धारा 20 के उपबंध(1) केतहत स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 
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शिक्षा निदेशक सौम्या गुप्ता की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उपराज्पाल के सामने स्कूल प्रबंध समिति की ओर से दिए गए जवाब प्रस्तुत किए गए तो उन्होंने पाया कि स्कूल प्रबंध समिति अपने कर्तव्यों का पालन करने में लापरवाही कर रही है। 

नोटिस के बाद जवाब नहीं लगा संतोषजनक

Government strict on private schools, takeover two branches of the Maxfort school
मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला

ऐसे में उपराज्पाल ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 1973 की धारा 20 के उपबंध 1 में निहित अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्कूल प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से हाथ में लेने का आदेश दिया है। यह भी आदेश दिया गया है कि धारा 20 के उपबंध-3 के तहत स्कूल का संचालन शिक्षा निदेशालय की ओर से किया जाएगा।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने मैक्सफोर्ट पीतमपुरा और मैक्सफोर्ट रोहिणी को सत्र 2014-15 से पहले के गरीब व वंचित वर्ग के दाखिलों का रिकॉर्ड नहीं दे पाने, मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने व वित्तीय अनियमिताओं, शिक्षकों की पर्सनल फाइल व सर्विस बुक को सुरक्षित नहीं रखने, स्टॉफ की सैलेरी दस्तावेज व अन्य दस्तावेजों को उपलब्ध नहीं कराने संबंधी शिकायतों के बाद कारण बताओ नोटिस भेजा था।

उसके बाद जब जवाब संतोषजनक नहीं लगा तो टेकओवर करने का फैसला किया गया। दूसरी ओर इस मामले में खास बात यह है कि इसके बाद अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए हैं।

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