दिल्ली वालों को इलाज में नहीं आएगी कोई दिक्कत, अस्पतालों में 80 फीसदी बिस्तर होंगे आरक्षित
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दिल्ली के उन बाशिंदों को जो यहां वोट देने का अधिकार रखते हैं जल्द ही उन्हें राजधानी के सरकारी अस्पतालों में 80 फीसदी बिस्तर आरक्षित मिल सकेंगे। दिल्ली सचिवालय में गुरुवार को आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 15 सिंतबर से पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) में पायलट प्रोजेक्ट तौर पर शुरू करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस कारण कई बार राजधानी के लोगों को ही समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा। इसलिए सरकार अभी पायलट प्रोजेक्ट जीटीबी अस्पताल में शुरू करने जा रही है।
यहां 17 में से 13 काउंटर दिल्ली वासियों के लिए आरक्षित होंगे। इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचने पर मरीज को अपना वोटर कार्ड दिखाना होगा। दिल्ली और बाहरी राज्यों के मरीजों के बाकायदा अलग-अलग रंग के कार्ड बनाए जाएंगे।
दिल्ली वालों को मुफ्त दवा भी
दिल्ली वालों को ही मुफ्त दवा की सुविधा भी मिलेगी। जबकि रक्त जांच, एक्सरे जैसी सामान्य सुविधाएं सभी के लिए निशुल्क रहेंगी। इसके अलावा अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं भी सभी मरीजों के लिए रहेंगी। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत अस्पताल में दिल्ली वालों के लिए 80 फीसदी बिस्तर और बाहरी राज्य के मरीजों को 20 फीसदी बिस्तर आरक्षित रहेंगे।
इस प्रोजेक्ट को लेकर मरीजों और तीमारदारों को जानकारी देने के लिए जीटीबी अस्पताल को निर्देश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि अस्पतालों में दिल्ली वासियों को भर्ती, जांच, दवाएं, ऑपरेशन आदि सुविधाओं में वरियता दी जाएगी।
अगर कोई मरीज 18 वर्ष की आयु से कम है तो उसे अपने माता-पिता का पहचान पत्र अस्पताल में दिखाना होगा। दिल्ली का पहचान पत्र होने के बाद ही उसे चिकित्सीय सुविधाओं में वरीयता दी जाएगी। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और जीटीबी प्रबंधन मौजूद था।