सरकार से नहीं मिला फंड, सफाई कर्मियों को अप्रैल का वेतन नहीं दे सकते
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सफाई कर्मचारियों को वेतन देने के मामले में दिल्ली सरकार व एमसीडी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला रुक नहीं रहा है। ईस्ट एमसीडी ने हाईकोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि उसे दिल्ली सरकार से पूरा फंड नहीं मिल रहा है।
उसके पास अप्रैल माह का वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। वहीं दिल्ली सरकार ने कहा कि हम पूरा फंड दे रहे हैं और बजट में एक हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है।
दूसरी ओर चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करने के मुद्दे पर प्रदेश सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि केंद्र सरकार एमसीडी से संबंधित मामलों में अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं छिपा सकती।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंतनाथ की खंडपीठ के समक्ष पेश ईस्ट एमसीडी के अधिवक्ता ने कहा कि कुछ कर्मचारियों को छोड़कर अन्य सभी लोगों को फरवरी माह का वेतन भुगतान किया गया है।
अप्रैल का वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं
उन्होंने कहा कि मार्च माह का वेतन भी दे दिया जाएगा। लेकिन अप्रैल का वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार लुका-छुपी का खेल, खेल रही है। सब कुछ जानने के बावजूद वह फंड जारी नहीं कर रही है।
खंडपीठ ने उनका तर्क सुनने के बाद कहा कि एमसीडी का कहना है कि उनके पास पैसा नहीं है जबकि सरकार का तर्क है कि उसने फंड जारी कर दिया। खंडपीठ ने कहा इस समस्या पर अदालत को विचार करना होगा। वहीं कर्मचारी संघ की ओर से पेश अधिवक्ता ने दिल्ली सरकार की ओर से दायर पूरक शपथ पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि सरकार ने फंड रोक रखा है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि चौथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है। लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि इस बात से कोई लेना देना नहीं है।
एमसीडी के लिए 1000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है
केंद्र अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि केंद्र सरकार को सब कुछ पता है। उन्होंने कहा कि कल ही दिल्ली का बजट पेश किया गया है जिसमें एमसीडी के लिए 1000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है।
खंडपीठ ने उनसे पूछा कि याचिका में कहा गया है कि आप ने चौथे दिल्ली वित्त आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया है। आप इसे लागू क्यों नहीं कर रहे। इस पर मेहरा ने कहा कि एक समस्या है। आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में पास कर दिया गया है।
केंद्र सरकार का सहयोग नहीं मिल रहा। खंडपीठ ने उनके तर्को पर असहमति जताते हुए कहा कि सॉरी यह तरीका ठीक नहीं है। आप एक राज्य हैं और हम इस तर्क पर आपकी सराहना नहीं कर सकते हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई 7 अप्रैल तय करते हुए दिल्ली सरकार व अन्य पक्षों को शपथपत्र सहित अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।