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यादव सिंह केस को लेकर दो जिलों में खींचतान
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 29 Mar 2017 11:51 PM IST
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यादव सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। काली कमाई से कुबेर बने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे में चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। केस की सुनवाई को लेकर लखनऊ और गाजियाबाद कोर्ट में खींचतान शुरू हो गई है।
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लखनऊ के जिला जज/विशेष पीएमएलए कोर्ट के न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने नियमों का हवाला देते हुए गाजियाबाद जिला जज रामकृष्ण उपाध्याय से यादव सिंह केस से संबंधित दस्तावेजों की मांग की है।
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उधर इस पत्र का जवाब देते हुए गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने भी नियमों का हवाला देते हुए केस को ट्रांसफर न किए जाने की बात कही है।
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चार अप्रैल को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में यादव सिंह प्रकरण की सुनवाई होनी है।
लखनऊ जिला जज ने 22 मार्च को गाजियाबाद जिला जज को पत्र लिखकर केस से संबंधित दस्तावेजों को यह कहते हुए मांग लिया है कि यादव सिंह का एक केस पीएमएलए कोर्ट में विचाराधीन है। यह न्यायालय सरकार द्वारा अधिकृत है।
पीएमएलए एक्ट की धारा 43, 44, 45, 46, और 71 के प्रावधानों से स्पष्ट है कि धारा 43 में विशेष न्यायालय की व्यवस्था की गई है। इसमें स्पष्ट लिखा गया है कि पीएमएलए एक्ट के अतिरिक्त अन्य किसी धारा का अपराध भी हो तो उसका विचारण विशेष न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
ऐेसे में यादव सिंह के जो भी मुकदमे अन्य न्यायालयों में चल रहे हैं, उनका विचारण भी एक्ट के प्रावधानों के तहत इसी न्यायालय को प्रदत्त हैं। ऐसे में नियमानुसार कार्यवाही करने की कृपा करें।
पीएमएलए विशेष न्यायाधीश के इस पत्र का जवाब देते हुए गाजियाबाद सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने लिखा है कि 28 जुलाई 2016 उत्तर प्रदेश शासन गृह (पुलिस) अनुभाग-9 के अनुसार गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, रामपुर और मैनपुरी जनपदों से संबंधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 3 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रकरणों का विचारण विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोध, सीबीआई गाजियाबाद को संस्तुत एवं अधिकृत किया गया है।
इस अधिसूचना में न्यायिक अधिकारी के नाम के रूप में पवन कुमार तिवारी विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी अंकित है। अपने जवाब में विशेष न्यायाधीश ने पीसी एक्ट के अध्याय-4 की धारा-3 (विशेष न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार) और धारा-4 (विशेष न्यायाधीशों द्वारा विचारण के प्रकरण) का भी हवाला दिया है।
बता दें कि नोएडा में हुए करोड़ों के टेंडर घोटाले में यादव सिंह समेत कई जेई, ठेकेदारों के खिलाफ गाजियाबाद सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की कोर्ट में मामला विचाराधीन है। सीबीआई इस मामले में अपनी चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर चुकी है।
घोटाले में फंसे कई अफसर और ठेकेदार फिलहाल डासना जेल में बंद हैं। जबकि लखनऊ स्थित पीएमएलए कोर्ट में एक मामले की सुनवाई केचलते करीब एक माह पूर्व यादव सिंह को वहां भेजा गया था। तभी से वह लखनऊ जेल में बंद हैं। इसी मामले में आरोपी यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता और एक ठेकेदार के खिलाफ सीबीआई कोर्ट के आदेश पर कुर्की की कार्रवाई भी कर चुकी है।