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बिना जाने दुश्मन से लड़ रहे हैं डाक्टर 

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2020 05:12 PM IST
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unknown enemy fighting doctor's
डॉक्टर्स डे: फोटो भी लगा सकते हैं बिना जाने दुश्मन से लड़ रहे हैं डाक्टर  - मरीज के स्वस्थ होने पर उसकी मुस्कुराहट देती है सुकून  माई सिटी रिपोर्टर  गाजियाबाद जनपद में ऐसे डाक्टरों की कमी नहीं है, जो कोरोना संक्रमण से लड़ाई में पूरे मनोयोग से जनसेवा में लगे हैं। यह मनोयोग ही डाक्टरों को भगवान का दूसरा रूप बनाता है, ऐसे डाक्टरों को डॉक्टर दिवस पर सैल्यूट।  एक जुलाई को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के रूप में मनाया जाता है।  इस वर्ष डाक्टर दिवस का थीम, डाक्टरों के प्रति हिंसा को लेकर जीरो सहनशीलता रखा गया है। ----------------- बिना दुश्मन कोरोना को जाने ही लड़ रहे लड़ाई ः डा. दीपा त्यागी प्रांतीय चिकित्सक संघ की प्रदेश मंत्री एवं महिला अस्पताल की सीएमएस डा. दीपा त्यागी कहती हैं कोरोना काल में हमारी स्थिति सीमा पर लड़ने वाले जवान जैसी है, फर्क यह है कि हमें दुश्मन का पता नहीं है। जो मरीज हमारे पास आता है, उसे भी नहीं पता। सही मायने में इस समय हमारा परिवार भी कोरोना फ्रंट पर लड़ रहा है। मेरे पति और बच्चों के सहयोग से ही सेवा कर पाना संभव हो रहा है। मेरे थक कर घर पहुंचने पर पति पूरी तरह से न सिर्फ देखभाल करते हैं, बल्कि खाना भी बनाकर खिलाते हैं। काम करने के पैसे तो सब पाते हैं लेकिन कौन ईमानदारी से काम कर रहा है, यह महत्वपूर्ण है। नागरिकों को संविधान की ओर से दिए गए मूल अधिकार के लिए हम लोग सेवा करते हैं लेकिन डॉक्टरों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार से आहत हूं। डा. दीपा ने बताया कि अब तक कई कोरोना संक्रमित महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी तक कर चुकी हैं। उनका चालक भी संक्रमित हो गया, लेकिन बिना डरे अस्पताल में डटी हुई हैं। उनका कहना है कि अब टैस्टिंग सुविधाएं बेहतर होने से हम थोड़ा सुरक्षित हो गए हैं। ---------------- इलाज के बाद स्वस्थ होने पर मरीज की मुस्कुराहट देती है सुकून ः  डा. आरपी सिंह  सरकारी सेवा में जनपद के एकमात्र फिजीशियन डा. आरपी सिंह भी कोरोना काल में बिना रूके और बिना थके दिन रात एक किए हुए हैं। संक्रमण की शुरूआत में ही जब कई डाक्टरों ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए अस्पताल से दूरी बना ली थी, तब डा. आरपी सिंह ने ही मोर्चा संभाला था। जिला अस्पताल में बनाए गए आईसोलेशन वार्ड की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आ पड़ी थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जनपद का पहला कोरोना संक्रमित डा. सिंह के उपचार में स्वस्थ होकर घर लौटा। इस बीच खुद बुखार से पीड़ित होने पर क्वारेंटीन में चले गए थे। डा. आरपी सिंह अब बुखार के लिए बनाई गई विशेष ओपीडी संभाल रहे हैं। आजकल दो बजे तक ओपीडी के सभालने के बाद भर्ती मरीजों की देखभाल, कोरोना पॉजीटिव आने पर उन्हें कोविड अस्पताल भेजने के अलावा इमरजेंसी डयूटी करना उनकी दिनचर्या है। घर में जाते तो हैं लेकिन घर में होने के बावजूद बेटियों से नहीं मिल पाते हैं। डा. सिंह का कहना है कि इलाज के बाद स्वस्थ होने पर मरीज की मुस्कुराहट बड़ा सुकून देती है।  ----------- गरीब और सैनिक से नहीं फीस नहीं लेते डा. बीपी त्यागी  पूरे कोरोना काल में मरीजों की सेवा करते रहे वरिष्ठ नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डा. बीपी त्यागी बताते हैं कि समाजसेवा के लिए पेशे में आया था, वही कर रहा हूं। डाक्टर दिवस पर साथियों को भी यही संदेश देना चाहता हूं। इस मौके पर सरकार से अपील करता हूं कि संकट की इस घड़ी में जो डाक्टर सेवाभाव से काम करना चाहते हैं उन्हें कोई परेशानी न होने दे। सेवा करना हर अच्छे डाक्टर का फर्ज है। उन सभी को धन्यवाद जो डाक्टरी पेशे को आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं। डा. त्यागी अपने हर्ष ईएनटी हॉस्पिटल में सैनिकों से परामर्श शुल्क नहीं लेते। उनके अस्पताल के बाहर की बोर्ड लगा है कि आप लोग देश की सीमा पर शुल्क अदा कर चुके हैं। उन्होंने लॉकडाउन के समय में अस्पताल में आने वाले मरीजो का निशुल्क परामश देने के साथ ही आपरेशन में फीस भी नहीं लिया।   --------------- पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री की याद में मनाया जाता है डाक्टर्स डे गाजियाबाद। पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डा. विधानचंद्र राय के सम्मान में डाक्टर दिवस का आयोजन किया जाता है। आजादी से पहली डा. राय लंदन के प्रतिष्ठित सेंट बार्थोलोम्य अस्पताल से डाक्टर की पढ़ाई करने पहुंचे तो डीन ने भारतीय होने के नाते उन्हें दाखिला देने से इंकार कर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार दाखिले के लिए आवेदन करते रहे और 30वें प्रयास में डीन ने उनका आवेदन स्वीकार कर लिया। मात्र सवा दो वर्षों में ही उन्होंने फिजीशियन और सर्जन की रॉयल कॉलेज की सदस्यता हासिल कर ली। पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे और चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया।  ------------- आशुतोष यादव 
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