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आज से ऑफिस पहुंचने में होगी परेशानी
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 02 May 2016 01:49 AM IST
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इन घटनाओं के पीछे भी इसी तरह के नशेड़ियों का हाथ हो सकता है। शिमला शहर में सुरक्षित पार्किंग की कमी है। लिहाजा लोगों को अपनी कारें सड़क के किनारे ही खड़ी करनी पड़ती हैं। कभी गाड़ी चोरी का डर और कभी नुकसान का खौफ कार मालिकों को हमेशा सताता है।
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-एनसीआर में डीजल-पेट्रोल की टैक्सियों पर सुप्रीम कोर्ट के बैन लगाने का सीधा असर रोजाना कैब या टैक्सियों से सफर करने वालों पर पड़ेगा। सोमवार से ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। गाजियाबाद और नोएडा से करीब 12 हजार टैक्सियां और कैब सड़क से हट जाएंगी।
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ऐसे में लोगों को कैब मिलने में दिक्कत होगी। टैक्सियों की संख्या कम हो जाने से लोगों को या तो घंटों इंतजार करना होगा या अन्य विकल्प तलाशना पड़ेगा। गाजियाबाद और टीएचए से करीब 15 हजार लोग दिल्ली, नोएडा और गुड़गांव की कंपनियों में नौकरी करते हैं।
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अधिकांश कर्मचारी कैब ऑफिस जाते हैं। अब दिल्ली-एनसीआर में इनके चलने पर पाबंदी लग जाने से इन लोगों की मुसीबत बढ़ जाएगी। वहीं टैक्सी-कैब कंपनियों की मानें तो उनका बिजनेस करीब 50 प्रतिशत प्रभावित हो गया। अब कंपनियां भी सीएनजी टैक्सी का विकल्प चुनने के लिए मजबूर हो गई हैं।
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गाजियाबाद-नोएडा में टैक्सियों के आंकड़े
गाजियाबाद में डीजल की 3021 टैक्सी और पेट्रोल की 402 टैक्सी या कैब रजिस्टर्ड है। नोएडा में डीजल की 8397 टैक्सियां रजिस्टर्ड हैं। वहीं नोएडा में रजिस्टर्ड पेट्रोल की 597 टैक्सी या कैब चलती हैं।
हालांकि इनमें से कई टैक्सी-कैब ऑल इंडिया परमिट पा चुकी, जिन्हें छूट मिली है। बावजूद इसके डीजल-पेट्रोल वाली हजारों टैक्सी और कैब दिल्ली और दूसरे इलाकों से नोएडा और गाजियाबाद में आती हैं। इनके एकाएक सड़क से हटने का प्रभाव पड़ेगा।
काम के सिलसिले में रोजाना दिल्ली, नोएडा जाना होता है। पेट्रोल और डीजल की कैब नहीं चलेंगी, तो सड़कों पर कैब की संख्या कम हो जाएगी। कैब के लिए दिक्कत उठानी पडेगी। -अंकुर
कैब के जरिए आसानी से आ जा सकते हैं। अब इनकी संख्या कम होगी तो काफी इंतजार करना होगा। साथ ही अन्य कैब यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर दाम भी बढ़ा सकते हैं। - नीतिश त्रिपाठी
कैब और टैक्सी ट्रांसपोर्टर परेशान
विजयनगर की प्रिंस कैब सर्विस के संचालक राहुल ने बताया कि ऐसी गाड़ियों के बंद होने से करीब 50 फीसदी बिजनेस प्रभावित हो गया। उनकी 12 गाड़ियां चलती थीं। इनमें से तीन सीएनजी और 9 डीजल-पेट्रोल की थी।
यह गाड़ियां नोएडा की कंपनियों में लगी थी। उनका कहना है कि अब सोमवार से डीजल-पेट्रोल की कैब नहीं चल पाने से दिक्कत होगी। उन्हें अब नई सीएनजी कैब खरीदनी पड़ेगी। इससे बिजनेस का नुकसान तो होगा ही इनवेस्टमेंट भी करना पड़ेगा।
आल इंडिया परमिट वालों के साथ भी पेंच
भूरे लाल कमेटी के निर्देशों के मुताबिक ऑल इंडिया परमिट वाले डीजल-पेट्रोल के वाहन केवल दिल्ली-एनसीआर को केंद्र में रखकर व्यापार नहीं कर सकते। अगर कोई आल इंडिया परमिट वाहन है तो वह दिल्ली से सवारी लेकर एनसीआर में नहीं छोड़ सकता। ऐसे ही एनसीआर से दिल्ली में नहीं छोड़ी जाएंगी।