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नेत्रहीनों की आंख बनेंगे स्मार्ट शूज
प्रद्युम्न उपाध्याय/ अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 27 Oct 2016 01:17 AM IST
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हाईटेक कॉलेज में नेत्रहीनों के लिए बनाए स्मार्ट शूज दिखाते स्टूडेंट्स
- फोटो : अमर उजाला
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हाईटेक इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स की ओर से बनाया ‘स्मार्ट शूज फॉर ब्लाइंड’ नेत्रहीन लोगों की आंखें बन सकते हैं। स्मार्ट शूज के जरिए नेत्रहीन व्यक्ति बगैर किसी की मदद के आम लोगों की तरह जीवन जी सकेंगे।
शूज की मदद से नेत्रहीनों के सामने और दाएं-बाएं आने वाले सब्जेक्ट (ऑब्स्टीकल) का पहले से ही पता लग जाएगा। वहीं, शूज में लगे जीपीएस की मदद से नेत्रहीनों के परिजन उन्हें ट्रैक कर सकेंगे।
नेत्रहीनों की मुश्किलों को दूर करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन फाइनल ईयर के स्टूडेंट पूजा पांडेय, अनु यादव, महिमा रावत और पंकज शर्मा ने यह डिवाइस तैयार की है।
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उन्होंने बताया कि स्मार्ट शूज में नेत्रहीन लोगों की मदद के लिए तीन सेंसर अल्ट्रासोनिक , स्लो मीटर और मोस्चर सेंसर लगाए गए हैं। अल्ट्रासोनिक सेंसर व स्लो मीटर की मदद से सामने और दाएं-बाएं आने वाली चीजों को उन्हें वाइब्रेशन के जरिए पहले से ही पता चल जाएगा। नेत्रहीनों की दूसरों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
जीपीएस-जीएसएम मॉड्यूल पर काम करेगा शूज
नेत्रहीन लोगों के परिजनों की चिंता को कम करने के लिए स्मार्ट शूज में जीपीएस के साथ जीएसएम मॉड्यूल भी लगाया गया है। जीपीएस के जरिए नेत्रहीन व्यक्ति की लोकेशन हमेशा परिजनों के पास होगी।
वहीं जीएसएम मॉड्यूल की मदद से अगर नेत्रहीन व्यक्ति कहीं गिर जाता है तो उसकी सूचना परिजनों को एसएमएस के जरिए तत्काल मिलेगी। इसके लिए स्टूडेंट्स ने एक एप भी डिजाइन किया है।
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शूज की मदद से नेत्रहीनों के सामने और दाएं-बाएं आने वाले सब्जेक्ट (ऑब्स्टीकल) का पहले से ही पता लग जाएगा। वहीं, शूज में लगे जीपीएस की मदद से नेत्रहीनों के परिजन उन्हें ट्रैक कर सकेंगे।
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नेत्रहीनों की मुश्किलों को दूर करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन फाइनल ईयर के स्टूडेंट पूजा पांडेय, अनु यादव, महिमा रावत और पंकज शर्मा ने यह डिवाइस तैयार की है।
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उन्होंने बताया कि स्मार्ट शूज में नेत्रहीन लोगों की मदद के लिए तीन सेंसर अल्ट्रासोनिक , स्लो मीटर और मोस्चर सेंसर लगाए गए हैं। अल्ट्रासोनिक सेंसर व स्लो मीटर की मदद से सामने और दाएं-बाएं आने वाली चीजों को उन्हें वाइब्रेशन के जरिए पहले से ही पता चल जाएगा। नेत्रहीनों की दूसरों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
जीपीएस-जीएसएम मॉड्यूल पर काम करेगा शूज
नेत्रहीन लोगों के परिजनों की चिंता को कम करने के लिए स्मार्ट शूज में जीपीएस के साथ जीएसएम मॉड्यूल भी लगाया गया है। जीपीएस के जरिए नेत्रहीन व्यक्ति की लोकेशन हमेशा परिजनों के पास होगी।
वहीं जीएसएम मॉड्यूल की मदद से अगर नेत्रहीन व्यक्ति कहीं गिर जाता है तो उसकी सूचना परिजनों को एसएमएस के जरिए तत्काल मिलेगी। इसके लिए स्टूडेंट्स ने एक एप भी डिजाइन किया है।