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दल मिले, वोटरों के दिल मिलने मुश्किल
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 24 Jan 2017 10:41 PM IST
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चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। सत्ता के महासंग्राम में सभी राजनीतिक दलों की नजरें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं। मामला सत्ता का है तो ‘दुश्मन’ भी ‘दोस्त’ बन गए और कांग्रेस-सपा में गठजोड़ हो गया। दोनों राजनीतिक दल भले ही मिल गए हों, लेकिन दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं और वोटरों के दिल मिलने बाकी हैं।
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हालांकि का पुराना इतिहास गवाह रहा है कि गठबंधन धर्म निभाने में गाजियाबाद के लोग पीछे रहे हैं। 2012 और 2014 के चुनाव में रालोद और कांग्रेस का गठबंधन रहा, लेकिन विधानसभा में सिर्फ एक सीट जीत पाए। लोकसभा चुनाव में स्थिति और भी खराब रही।
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दरअसल, सपा और कांग्रेस का अलग-अलग वोट बैंक है। वोटिंग मशीन में अगर चुनाव चिन्ह ‘हाथ का पंजा’ नहीं दिखाई दिया तो उनकी वोटिंग की प्राथमिकता बदल जाती है। यही स्थिति समाजवादी पार्टी के वोटरों की भी है। अपने दलों के लिए तो कार्यकर्ता समर्पित हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि गठबंधन का धर्म निभाते हुए सहयोगी दल के प्रत्याशी को भी उतनी ही तवज्जो दें। ऐसे में बड़ी संख्या में दोनों दलों के वोट छिटक सकते हैं।
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2012 में गठबंधन के प्रत्याशियों की स्थिति
2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद सीट से सुरेंद्र प्रकाश गोयल चुनाव लड़े थे। उन्हें सिर्फ 37159 वोट मिले थे। वह तीसरे नंबर पर रहे थे। मुरादनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस-रालोद के संयुक्त प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार मुन्नी महज 49364 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे थे, जबकि इस सीट पर रालोद के वोटरों की संख्या भी अच्छी-खासी थी।
साहिबाबाद विधानसभा सीट पर कांग्रेस-रालोद के संयुक्त प्रत्याशी सतीश चंद्र त्यागी 51195 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। लोनी में रालोद-कांग्रेस के प्रत्याशी मदन भैया दूसरे नंबर पर रहे। मदन भैया का अपना व्यक्तिगत वोट बैंक भी है।
बावजूद इसके गठबंधन उन्हें जिता नहीं पाया। जिले में सिर्फ मोदीनगर सीट ऐसी रही जहां रालोद-कांग्रेस गठबंधन से प्रत्याशी रहे सुदेश शर्मा ने जीत हासिल की। ऐसे में अब सपा और कांग्रेस गठबंधन के राजनीति में नया इतिहास रचने की उम्मीद भी कम ही है।
समाजवादियों की सीएम कुर्सी पर नजर
गठबंधन में जिले की चार सीटें कांग्रेस पर भले चली गई हो, लेकिन समाजवादी पार्टी की नजर सीएम की कुर्सी पर है। ऐसे में सपा के संगठन पदाधिकारी कार्यकर्ताओं को निष्ठा का पाठ पढ़ा रहे हैं। सोमवार को सपा महानगर अध्यक्ष संजय यादव ने पार्टी कार्यालय पर कार्यकर्ताओं को जी-जान से चुनाव लड़वाने के निर्देश दिए। स्वागत समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि प्रत्याशी सपा का जीते या कांग्रेस का फायदा समाजवादी पार्टी का ही है। ऐसे में कांग्रेस गठबंधन में भी पूरे जोश से मेहनत करें।