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उम्मीद का उजियारा: बंद होने की कगार पर पहुंचे स्टार्टअप को ई-कॉमर्स से दी उड़ान

Sat, 02 Jan 2021 04:57 PM IST
प्राची प्रियम संवाद न्यूज एजेंसी, गाजियाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, गाजियाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 02 Jan 2021 04:57 PM IST
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Stories of those who fought to establish their startup through E commerce 
बंद होने की कगार पर पहुंचे स्टार्टअप को ई-कॉमर्स से दी उड़ान - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन व कोरोना के दौरान बने प्रतिकूल हालात ने लोगों को कुछ नया करने और सोचने को प्रोत्साहित किया। नंदग्राम निवासी कपड़ा व्यापारी नितिन भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं। उन्होंने लॉकडाउन से पहले टी-शर्ट्स और लोअर बनाने व बेचने का काम शुरू किया था। 
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अचानक लॉकडाउन लगने से उनके सामने नए व्यापार को बचाने का संकट आ गया। लॉकडाउन खुलने के बाद भी खरीदार नहीं आ रहे थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले इस युवा ने आपदा को अवसर में बदलते हुए अपने व्यापार को ऑनलाइन ले जाने का निर्णय लिया। 
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अब वह ई-कॉमर्स एप के माध्यम से माल की डिलीवरी कर रहे हैं। अभी वह लोकल स्तर पर ही 50 किमी तक डिलीवरी कर रहे हैं। आगे डिमांड बढ़ने पर बड़े स्तर पर सप्लाई करने की योजना है। निराशा के दौर में उन्होंने सही फैसला लेते हुए न केवल अपना व्यापार बचाए रखा, बल्कि एक नई शुरुआत भी की। 
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इससे उन्हें सामान्य खरीदार के साथ एक नया वर्ग मिल रहा है। जिसकी कोई सीमा नहीं है। इसके लिए वह अपनी बेहतर ब्रांडिंग और क्वालिटी पर लगातार काम कर रहे हैं। नितिन ने बताया कि उनका शुरू से ही अपना काम करने का मन था। पढ़ाई करने के बाद उन्होंने इसे आगे बढ़ाते हुए लोअर व टीशर्ट की मैन्युफैक्चरिंग का काम शुरू किया। 

काम शुरू करने के कुछ वक्त बाद ही कोरोना संक्रमण के चलते सब की तरह उनका भी काम बंद हो गया। लॉकडाउन के चार महीनों में ग्राहक बिखर गए थे। शुरू होने के बाद भी काम काफी मंदा था। फिर उन्होंने ई-कॉमर्स के जरिये भी डिलीवरी शुरू की। वह खुद भी सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार प्रमोशन करते हैं और दूसरों से भी करवाते हैं।

 

खुशियों से भरा रहा साल
2020 में कई लोगों को मुश्किलों का सामना पड़ा लेकिन मेरे और मेरे परिवार के लिए ये साल कई खुशियां भी लेकर आया। इस साल मेरे बेटे सृजन ने आईआईटी रुड़की में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। बेटी सृष्टि कई सालों से पढ़ाई व नौकरी के लिए शहर से बाहर ही रहती थी। 

उसके साथ रहने का हम सबको मौका मिला। कई नई बातें उससे हमने समझीं और कई बातें हमसे उसने समझीं। इससे सभी को परिवार और उसका महत्व समझ में आया इसलिए ये साल उतना भी बुरा नहीं रहा, जितना समझा जा रहा है। 
-सीमा वार्ष्णेय, सीए, पटेलनगर थर्ड

संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी
पटेलनगर सेकेंड निवासी नितिन शर्मा ने बताया कि इस साल काफी संघर्ष रहा। शुरुआती दिनों में जब लॉकडाउन लगा तो ऐसा लगा कि जीवन खत्म होने की कगार पर है, पैसे खत्म हो रहे थे, ना नौकरी थी ना घर से बाहर निकलकर कमाने की कोई संभावना, लेकिन इन्हीं दिनों में मैंने अपना काम शुरू किया। 

मैं एक इंजीनियर होने के नाते अपने काम को लेकर आगे चला और आज 2020 के जाते-जाते मैंने अपनी फर्म तैयार कर ली है, जिसमें मैं सिविल वर्क इंटीरियर वर्क और आर्किटेक्ट सर्विस लोगों से साझा करता हूं। मैंने सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया और अपने आपको एक आत्मनिर्भर व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया।

 

बदल गया पढ़ने-पढ़ाने का तरीका
महागुनपुरम में रहने वाले विकास कुमार सिंह क्रॉसिंग रिपब्लिक में अपना निजी कोचिंग सेंटर चलाते हैं। कोरोना के चलते उनका कोचिंग संस्थान भी बंद है। शुरुआत में कुछ दिन इंतजार किया। आगे स्थिति और बिगड़ती देख उनके सामने बड़ी चुनौती आ गई। वह अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह कोचिंग पर ही निर्भर थे। बड़े संस्थानों की तरह उनके पास कोई हाईटेक संसाधन भी नहीं थे। 

ऐसे में उन्होंने व्हॉट्सएप ग्रुप से ही पढ़ाने की शुरुआत की। वह तकनीकी से अभ्यस्त थे, लेकिन इस तरह कभी जरूरत नहीं पड़ी। कोरोना के खराब होते हालात के साथ उन्होंने भी अपने को तैयार किया। देखते-देखते ही वह रिकॉर्डेड और लाइव वीडियो के माध्यम से पढ़ाने लगे। 

आज वह और उनके साथी पूरी कोचिंग ऑनलाइन ही चला रहे हैं। विकास की तरह ज्यादातर सामान्य स्टूडेंट और अध्यापकों के लिए ऑनलाइन क्लास अभी कल्पना से दूर थी, लेकिन फिलहाल पूरी शिक्षा व्यवस्था ही ऑनलाइन चल रही है।

योग-व्यायाम भी हो गया ऑनलाइन
कोरोना संक्रमण के दौर में पूरी तरह घरों में कैद होने के दौरान लोगों के सामने फिटनेस की बड़ी चुनौती थी। आपके पास समय था, लेकिन न दौड़ने के लिए पार्क और न एक्सरसाइज के लिए जिम। ऐसे में बड़ी तादाद में लोगों ने योग का सहारा लिया। 

योग से जुड़े लोगों ने अपना विस्तार करते हुए ऑनलाइन सिखाना और अभ्यास करना शुरू किया। योगाचार्या डॉ. सरोज सिरोही प्रतिदिन ऑनलाइन योग का प्रशिक्षण दे रहीं हैं। ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से बड़ी संख्या में देश-विदेश के लोग उनसे योग सीख रहे हैं। साथ ही पार्क में जुटने वाली मंडली भी कोरोना के बाद ऑनलाइन ही एक दूसरे से जुड़ कर योग कर रही है।
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