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...तो आज दौड़ रही होती हाईस्पीड ट्रेन
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 23 Jun 2016 12:29 AM IST
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हाईस्पीड ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
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हाईस्पीड ट्रेन गाजियाबाद में एनएच 58 से ही गुजरेगी। 2011 की डीपीआर में जो रूट तय हुआ था, उसमें कोई खास बदलाव नहीं होगा। लेकिन मलाल इस बात का रहेगा कि अगर एनएचएआई एनएच 58 से हाईस्पीड ट्रेन को गुजरने नहीं देने की जिद पर न अड़ी होती तो यह प्रोजेक्ट चार साल लेट नहीं होता।
वैसे हाईस्पीड की राह में अभी एक रोड़ा मेरठ कैंट इलाके को लेकर भी है। इस इलाके में करीब 4 किलोमीटर की सुरंग खोदी जानी है और इसके लिए छावनी बोर्ड से एनओसी लेनी होगी। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अधिकारियों को आशंका है कि कहीं कैंट एनओसी देने में देर न कर दे क्योंकि यह मामला सैन्य क्षेत्र से जुड़ा है।
हाईस्पीड को देर करने में कोई कसर नहीं छोडी
2011 से 2014 तक शहरी विकास मंत्रालय में कई बैठकें हुईं। हर बैठक में एनएचएआई ने हाईस्पीड के लिए एनएच-58 के रूट पर आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों से परेशान होकर शहरी विकास मंत्रालय ने 2014 में रिटायर्ड आईएएस योगेंद्र नारायण की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की।
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इस कमेटी ने एक मई 2015 को मंत्रालय को यह रिपोर्ट सौंपी कि एनएच-58 का रूट ही हाईस्पीड ट्रेन के लिए उपयुक्त है। 14 जुलाई 2015 को कमेटी की इस रिपोर्ट पर अपनी सहमति देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय को भेजा गया।
मंत्रालय ने छह महीने तक इस रिपोर्ट पर कोई जवाब नहीं भेजा। इस साल 20 जनवरी को राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने गाजियाबाद में पड़ने वाले एनएच-58 के हिस्से को डिनोटिफिकेशन कर दिया।
यानी इस हिस्से को एनएर्चएआई से मुक्त तो कर दिया लेकिन उसने डिनोटिफिकेशन के बारे में शहरी विकास मंत्रालय को जानकारी देना तक जरूरी नहीं समझा। सूत्रों ने बताया कि कुछ महीने बाद जब यह जानकारी शहरी विकास मंत्रालय को हुई तब एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। एनसीआरपीबी के अधिकारियों का कहना है कि यह डिनोटिफिकेशन अगर 2011 में कर दिया गया होता तो आज हाईस्पीड ट्रेन दौड़ रही होती।
अब नहीं अटकेंगी मंत्रालय में फाइलें: केंद्र ने हाईस्पीड ट्रेन में अपनी दिलचस्पी दिखाते हुए 2013 में 100 करोड़ की सीट कैपिटल से एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड नामक कंपनी बनाई लेकिन एनएचएआई की उक्त आपत्ति के चलते कंपनी सक्रिय नहीं हो पाई। यह कंपनी अब एक्टिव हुई है। रेलवे ट्रैफिक के वरिष्ठ अधिकारी विनय कुमार सिंह को कंपनी का एमडी बनाया गया है।
हालांकि उन्होंने अभी ज्वाइन नहीं किया है। सूत्रों ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय के सचिव को इस कंपनी का अध्यक्ष बनाया गया है। इससे यह फायदा होगा कि हाईस्पीड से संबंधित फाइलें मंत्रालय में अटकेंगी नहीं और काम तेज गति से होगा। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल यह कंपनी हाईस्पीड की डीपीआर को पुनरीक्षित करते हुए कास्टिंग रिवाइज का काम कर रही है।
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वैसे हाईस्पीड की राह में अभी एक रोड़ा मेरठ कैंट इलाके को लेकर भी है। इस इलाके में करीब 4 किलोमीटर की सुरंग खोदी जानी है और इसके लिए छावनी बोर्ड से एनओसी लेनी होगी। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अधिकारियों को आशंका है कि कहीं कैंट एनओसी देने में देर न कर दे क्योंकि यह मामला सैन्य क्षेत्र से जुड़ा है।
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हाईस्पीड को देर करने में कोई कसर नहीं छोडी
2011 से 2014 तक शहरी विकास मंत्रालय में कई बैठकें हुईं। हर बैठक में एनएचएआई ने हाईस्पीड के लिए एनएच-58 के रूट पर आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों से परेशान होकर शहरी विकास मंत्रालय ने 2014 में रिटायर्ड आईएएस योगेंद्र नारायण की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की।
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इस कमेटी ने एक मई 2015 को मंत्रालय को यह रिपोर्ट सौंपी कि एनएच-58 का रूट ही हाईस्पीड ट्रेन के लिए उपयुक्त है। 14 जुलाई 2015 को कमेटी की इस रिपोर्ट पर अपनी सहमति देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय को भेजा गया।
मंत्रालय ने छह महीने तक इस रिपोर्ट पर कोई जवाब नहीं भेजा। इस साल 20 जनवरी को राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने गाजियाबाद में पड़ने वाले एनएच-58 के हिस्से को डिनोटिफिकेशन कर दिया।
यानी इस हिस्से को एनएर्चएआई से मुक्त तो कर दिया लेकिन उसने डिनोटिफिकेशन के बारे में शहरी विकास मंत्रालय को जानकारी देना तक जरूरी नहीं समझा। सूत्रों ने बताया कि कुछ महीने बाद जब यह जानकारी शहरी विकास मंत्रालय को हुई तब एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। एनसीआरपीबी के अधिकारियों का कहना है कि यह डिनोटिफिकेशन अगर 2011 में कर दिया गया होता तो आज हाईस्पीड ट्रेन दौड़ रही होती।
अब नहीं अटकेंगी मंत्रालय में फाइलें: केंद्र ने हाईस्पीड ट्रेन में अपनी दिलचस्पी दिखाते हुए 2013 में 100 करोड़ की सीट कैपिटल से एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड नामक कंपनी बनाई लेकिन एनएचएआई की उक्त आपत्ति के चलते कंपनी सक्रिय नहीं हो पाई। यह कंपनी अब एक्टिव हुई है। रेलवे ट्रैफिक के वरिष्ठ अधिकारी विनय कुमार सिंह को कंपनी का एमडी बनाया गया है।
हालांकि उन्होंने अभी ज्वाइन नहीं किया है। सूत्रों ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय के सचिव को इस कंपनी का अध्यक्ष बनाया गया है। इससे यह फायदा होगा कि हाईस्पीड से संबंधित फाइलें मंत्रालय में अटकेंगी नहीं और काम तेज गति से होगा। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल यह कंपनी हाईस्पीड की डीपीआर को पुनरीक्षित करते हुए कास्टिंग रिवाइज का काम कर रही है।