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Ghaziabad News: खानपान में लापरवाही से बढ़ा किशोर और युवाओं में आस्टियोपोरोसिस
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गाजियाबाद। ऑस्टियोपोरोसिस अब केवल बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं रह गई है। किशोरियों और युवतियों में भी हड्डियों की कमजोरी का खतरा बढ़ रहा है। खानपान में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन डी की कमी, दूध और दूध से बने पदार्थों से दूरी और नियमित व्यायाम नहीं करने से हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो रही है। चिंता की बात यह है कि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। कई बार मामूली चोट में फ्रैक्चर होने के बाद ही बीमारी का पता चलता है। 20 अक्तूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम जीवन भर अपनी हड्डियों का निर्माण करें, उनकी रक्षा करें और उन्हें मजबूत बनाएं के साथ मनाया जा रहा है।
जिला एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन 150 से 200 मरीजों की जांच में 95 प्रतिशत में विटामिन डी की कमी मिलने का दावा किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, किशोर और युवा वर्ग में शारीरिक गतिविधियां कम होने तथा पोषक तत्वों से भरपूर भोजन नहीं लेने के कारण हड्डियों की सेहत प्रभावित हो रही है। फास्टफूड, अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ और सोडा जैसे पेय पदार्थों का अधिक सेवन भी संतुलित आहार की जगह लेने पर परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि, हड्डियों में कमजोरी की पुष्टि जांच से ही की जा सकती है।
दर्द और फ्रैक्चर को न करें नजरअंदाज
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय पवार के अनुसार, दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र में 94 महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में 93.7 प्रतिशत महिलाओं की बोन मिनरल डेंसिटी असामान्य मिली। इनमें 51.1 प्रतिशत महिलाएं ऑस्टियोपीनिया और 42.6 प्रतिशत ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित पाई गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में पोषक तत्वों की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिससे वे कमजोर और नाजुक हो जाती हैं। रीढ़ में दर्द, पीठ झुकना, लंबाई कम होना और मामूली चोट में फ्रैक्चर होना इसके संभावित संकेत हैं। कई बार शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखता। ऐसे में लगातार कमर या पीठ में दर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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मेनोपॉज के बाद बढ़ता खतरा
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह के अनुसार, बढ़ती उम्र और मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव महिलाओं की हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी भी इसका जोखिम बढ़ाती है। इसलिए जोखिम वाले लोगों को लक्षणों का इंतजार किए बिना चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
संतुलित आहार और व्यायाम जरूरी
एमएमजी असपताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जौहर अली नकवी के अनुसार, नियमित पैदल चलना, संतुलन सुधारने वाले व्यायाम और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां हड्डियों के लिए लाभकारी हैं। किशोरियों और युवतियों को उम्र के अनुसार पौष्टिक भोजन, कैल्शियम और विटामिन डी के पर्याप्त स्रोत तथा नियमित शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से बोन मिनरल डेंसिटी जांच करानी चाहिए। समय रहते जोखिम की पहचान और जीवनशैली में सुधार से हड्डियों को मजबूत रखने और फ्रैक्चर की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।
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जिला एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन 150 से 200 मरीजों की जांच में 95 प्रतिशत में विटामिन डी की कमी मिलने का दावा किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, किशोर और युवा वर्ग में शारीरिक गतिविधियां कम होने तथा पोषक तत्वों से भरपूर भोजन नहीं लेने के कारण हड्डियों की सेहत प्रभावित हो रही है। फास्टफूड, अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ और सोडा जैसे पेय पदार्थों का अधिक सेवन भी संतुलित आहार की जगह लेने पर परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि, हड्डियों में कमजोरी की पुष्टि जांच से ही की जा सकती है।
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दर्द और फ्रैक्चर को न करें नजरअंदाज
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय पवार के अनुसार, दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र में 94 महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में 93.7 प्रतिशत महिलाओं की बोन मिनरल डेंसिटी असामान्य मिली। इनमें 51.1 प्रतिशत महिलाएं ऑस्टियोपीनिया और 42.6 प्रतिशत ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित पाई गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में पोषक तत्वों की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिससे वे कमजोर और नाजुक हो जाती हैं। रीढ़ में दर्द, पीठ झुकना, लंबाई कम होना और मामूली चोट में फ्रैक्चर होना इसके संभावित संकेत हैं। कई बार शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं दिखता। ऐसे में लगातार कमर या पीठ में दर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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मेनोपॉज के बाद बढ़ता खतरा
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह के अनुसार, बढ़ती उम्र और मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव महिलाओं की हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी भी इसका जोखिम बढ़ाती है। इसलिए जोखिम वाले लोगों को लक्षणों का इंतजार किए बिना चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
संतुलित आहार और व्यायाम जरूरी
एमएमजी असपताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जौहर अली नकवी के अनुसार, नियमित पैदल चलना, संतुलन सुधारने वाले व्यायाम और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां हड्डियों के लिए लाभकारी हैं। किशोरियों और युवतियों को उम्र के अनुसार पौष्टिक भोजन, कैल्शियम और विटामिन डी के पर्याप्त स्रोत तथा नियमित शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से बोन मिनरल डेंसिटी जांच करानी चाहिए। समय रहते जोखिम की पहचान और जीवनशैली में सुधार से हड्डियों को मजबूत रखने और फ्रैक्चर की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।