{"_id":"581b75814f1c1bc52b436896","slug":"nhay-will-start-today-with-khay-mahaparva-chhath","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहाय खाय के साथ आज से शुरू होगा महापर्व छठ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहाय खाय के साथ आज से शुरू होगा महापर्व छठ
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 03 Nov 2016 11:06 PM IST
विज्ञापन
छठ
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। चार दिवसीय छठ पूजा के लिए छठ व्रतियों की ओर से जोर-शोर से तैयारियां की जा रही हैं। नहाय खाय के साथ शुक्रवार से पूजन सामग्री की खरीदारी शुरू हो जाएगी। इसमें मौसमी फलों से लेकर बांस की टोकरी, गन्ना, नारियल, गुड़, सिंघाड़ा आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
इसके लिए पुरानी सब्जी मंडी, घंटाघर सब्जी मंडी, नवीन सब्जी मंडी, नंदग्राम आदि जगहों पर पूजन सामग्री के बाजार सज गए हैं।नहाय खाय के दिन छठ व्रती शुद्धिकरण के लिए पवित्र नदी में स्नान कर गंगाजल से पूरे घर को शुद्ध करने के बाद सेंधा नमक और घी से बना खाना खाते हैं।
विज्ञापन
इस दिन लौकी और चने की दाल खाने का नियम है। आज ही के दिन से छठ पूजन में प्रयोग होने वाली सभी सामग्रियों की खरीदारी शुरू हो जाती है।पस्थान के अभाव और हिंडन नदी में गंदा पानी होने के कारण अब लोग अपने घर की छतों पर और स्वीमिंग पूल आदि के किनारे भी छठ पूजा करने लगे हैं।
विज्ञापन
छतों पर पीतल के बर्तन या टब में पानी भरकर श्रद्धालु उसी में अर्घ्य देते हैं। शिप्रा सनसिटी आदि सोसाइटी में स्वीमिंग पूल की सफाई कर उसमें पूजा की जाती है। इसके अलावा राजनगर एक्सटेंशन स्थित रिवर हाइट्स के स्वीमिंग पूल में, क्रासिंग के गोल्फ लिंक सहित अधिकतर सोसाइटीज के स्वीमिंग पूल में छठ पूजा की तैयारियां की गई हैं।
प्रकृति की पूजा है छठ
छठ व्रत मुख्य रूप से भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है। शिव शक्ति मंदिर मोहन नगर के मुख्य पुजारी गिरीश मिश्रा ने बताया कि ब्रह्मवैवर्त पुराण में प्रकृति की देवी देवसेना का वर्णन है जो सबसे श्रेष्ठ मातृ मानी जाती हैं। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इस देवी को षष्ठी देवी भी कहा जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में एक कथा है।
प्रथम मनु पुत्र प्रियव्रत को कोई संतान नही थी। एक बार महाराजा प्रियव्रत ने कश्यप मुुनि को अपना दुख सुनाया। कश्यप जी ने राजा को पुत्रेष्टि यज्ञ करने का परामर्श दिया। इस यज्ञ के फल के रूप में महारानी मालिनी ने एक सुंदर लेकिन मृत पुत्र को जन्म दिया। इससे पूरे नगर में शोक छा गया।
महाराज अपने पुत्र का शव हृदय से लगाकर लेकर विलाप करने लगे तभी एक चमत्कार हुआ। आकाश से एक विमान पृथ्वी पर उतरा, जिसमें से एक दिव्य नारी प्रकट हुईं। उन्होंने बताया कि वह ब्रह्मा की मानस पुत्री षष्ठी देवी हैं और विश्व के समस्त बालकों की रक्षिता हैं। वह सभी बालकों को आयु प्रदान करती हैं।
इतना कह कर देवी ने मृत बालक का शरीर स्पर्श किया और बालक जीवित हो उठा। इससे प्रसन्न होकर राजा ने देवी की अनेक प्रकार से पूजा और स्तुति की। देवी ने प्रसन्न होकर राजा से कहा कि तुम पृथ्वी पर ऐसी व्यवस्था करो की सभी हमारी पूजा करें और सबका कल्याण हो।
इसके बाद से ही सभी शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि को षष्ठी महोत्सव मनाने लगे इसीलिए बिहार आदि क्षेत्रों में पुत्र प्राप्ति के लिए और पुत्र की लंबी आयु के लिए इस व्रत को किया जाता है। इस व्रत को 12 वर्षों तक करने वाली स्त्री सौभाग्यशाली रहती है। काशी में यह व्रत डाला छठ के नाम से जाना जाता है।
हिंडन मैली, सोसायटी में ही करेंगे छठ पूजा
विंडसर एंड नोवा छठ पूजा समिति के सदस्य मृत्युंजय सिंह ने बताया कि शनिवार को खरना होगा, जिसमें व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखेंगे और शाम को गुड़ की खीर और पूड़ी बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।
शिप्रा सनसिटी फेस-1 के छठ समिति के पदाधिकारी संजय सिंह ने बताया कि पिछले कई साल से शिप्रा सनसिटी के स्वीमिंग पूल को छठ पर्व के दिन अर्घ्य देने के लिए तैयार किया जाता है। इसमें शुद्ध जल भरा जाता है और काफी सजावट की जाती है।
राजनगर एक्सटेंशन की रहने वाली अल्पना पाठक ने बताया कि हिंडन में अब इतना गंदा पानी होता है कि पवित्रता का अहसास नहीं होता। छठ पर्व काफी नियम और पवित्रता का व्रत है इसलिए सोसायटी के स्वीमिंग पुल में ही इस बार अर्घ्य देंगे।
मिथिलांचल सेवा समिति के अध्यक्ष पवन झा ने बताया कि लाखों की संख्या में छठ व्रती हिंडन घाट पर अर्घ्य देने आते हैं, लेकिन प्रशासन इसको गंभीरता से नहीं लेता और पूर्वांचल के लोगों की उपेक्षा की जा रही है।