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नया बस अडडा मेट्रो : फिर फंसा फंडिंग का पेंच

Tue, 24 May 2016 01:26 AM IST
नीरज/ गाजियाबाद
नीरज/ गाजियाबाद Updated Tue, 24 May 2016 01:26 AM IST
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New Bus Metro: Then screw implicated funding
video wall screen on metro
दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक निर्माणाधीन मेट्रो प्रोजेक्ट में एक बार फिर फंडिंग का पेंच फंस गया है। 2200 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में अब तक कुल 340 करोड़ रुपए का ही भुगतान हो सका है।
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इस योजना में धन के अभाव को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने 26 मई को लखनऊ में एक बैठक बुलाई है। बैठक में जीडीए वीसी विजय यादव समेत तीन विभागों के प्रमुख भाग लेंगे।
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इस प्रोजेक्ट में बीस प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 80 प्रतिशत राशि का वहन राज्य सरकार को करना है। शासन ने इस मामले में फंडिंग पैटर्न तय कर रखा है, जिसके तहत अस्सी प्रतिशत में आधी राशि जीडीए और आधी राशि का भुगतान नगर निगम, आवास विकास परिषद व यूपीएसआईडीसी को संयुक्त रूप से करना है।
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अब तक आवास विकास परिषद ने 50 करोड़ और यूपीएसआईडीसी ने 3.3 करोड राशि ही दी है। वहीं नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट में अब तक कोई भुगतान नहीं किया है। जीडीए केवीसी विजय यादव ने सोमवार को बताया कि इन तीन विभागों की तरफ से समय पर अपेक्षित राशि न मिलने से दिक्कतें आई हैं।

उन्होंने बताया कि इस बारे में उनकी तरफ से शासन को बताया गया था, जिसके बाद यह बैठक बुलाई गई है। उन्होंने बताया कि जीडीए अपने हिस्से के भुगतान में कभी पीछे नहीं रहा है। जीडीए ने गत 19 अप्रैल को डीएमआरसी को 50 करोड रुपए दिए थे जिसके बाद अब तक भुगतान की कुल राशि 340 करोड़ हुई है।

40 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा
उधर डीएमआरसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फंड की कमी को लेकर समय-समय पर जीडीए को बताया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि समय से फंड मिलता रहे तो निर्धारित लक्ष्य दिसंबर, 2017  तक इस लाइन पर मेट्रो तैयार मिलेगी।

उन्होंने दावा किया कि अब तक इस प्रोजेक्ट में 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वहीं जीडीए के वीसी ने दावा किया कि मेट्रो निर्धारित लक्ष्य से एक-दो महीने आगे-पीछे हो सकती है।
बोले अधिकारी
आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता एससी राय ने कहा कि परिषद अपने हिस्से में से 50 करोड़ दे चुका है और अब 284 करोडु देना है। परिषद को अवस्थापना निधि से ही धन आवंटित करना है लेकिन इस निधि में फिलहाल धन का अभाव है। मुख्य सचिव के साथ होने वाली बैठक में इस बात को रखा जाएगा।

यूपीएसआईडीसी के रीजनल मैनेजर अजय यादव ने कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट में अपने हिस्से की राशि देने के लिए लोनी व साहिबाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों पर सेस लगाया गया था लेकिन इसकी रिकवरी काफी धीमी होने के कारण अपेक्षित भुगतान नहीं किया जा सका है।


उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में भुगतान के लिए उनके पास धन जुटाने का कोई और सोर्स नहीं है। वहीं नगर आयुक्त ने कहा कि इस मामले में जीडीए ने उनसे कभी धन की मांग ही नहीं की है।
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