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जीएसटी से एनसीआर की इंडस्ट्रीज को मिलेगी संजीवनी

Thu, 04 Aug 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद Updated Thu, 04 Aug 2016 12:36 AM IST
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NCR will provide the industry with GST lifesaving
GST BILL - फोटो : demo pic

जीएसटी के लागू होने से एनसीआर की इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा फायदा होगा। दिल्ली और यूपी का टैक्स एकसमान होने से अब यहां के उत्पादों को आर्डर मिलने शुरू हो जाएंगे।

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अभी तक टैक्स में अंतर होने से ज्यादातर आर्डर दिल्ली के कारोबारियों को मिलते थे। मंदी की मार झेल रही एनसीआर की इंडस्ट्री अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी। पांच साल में आठ हजार बदहाल इंडस्ट्रीज पर ताले लटक गए हैं।
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जीएसटी का फायदा यों तो पूरे देश के कारोबारियों को होगा, लेकिन एनसीआर की इंडस्ट्री और बाजार के लिए यह आक्सीजन का काम करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली और यूपी के वैट टैक्स में 12 फीसदी का अंतर है। दिल्ली में वैट दो फीसदी है, जबकि यूपी में 14 परसेंट। इसका सबसे ज्यादा नुकसान दिल्ली से सटे क्षेत्रों के कारोबारियों को हो रहा था।
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आलम यह था कि देश-दुनिया में मोटर पार्ट्स, गारमेंट्स और मेडिसन सप्लाई करने वाले एनसीआर को कई साल से आर्डर ही नहीं मिल रहे थे, जबकि यहां के माल की गुणवत्ता बेहतर थी। इसके साथ ही थोक व रिटेल बाजार में भी मंदी थी। ज्यादातर खरीदारी दिल्ली से हो रही थी। यहां तक कि दिल्ली से यूपी में कालाबाजारी भी की जा रही थी।

दो साल में कालाबाजारी का माल पकड़कर पांच सौ करोड़ से ज्यादा का टैक्स वसूला जा चुका है।अब एकसमान टैक्स होने से जहां एनसीआर के जनपदों के उद्योगों को आर्डर मिलने शुरू हो जाएंगे, वहीं यहां के बाजार में रौनक छाएगी। ग्राहक बढ़ने से सामान की खरीदारी बढ़ेगी। इससे श्रमिकों को रोजगार मिलने के साथ ही ट्रांसपोर्ट सेक्टर का भी कायाकल्प हो सकेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार गाजियाबाद में पांच हजार, बुलंदशहर में एक हजार और नोएडा, हापुड़, मेरठ व बागपत में पांच-पांच सौ इंडस्ट्रीज पर ताले लटक चुके हैं।जीएसटी लागू होना इंडस्ट्रीज की जरूरत थी।


ऐसा नहीं होता तो एनसीआर का दो सौ साल पुराना उद्योग बर्बाद हो जाता। अब बेहतर गुणवत्ता के साथ हम देश-दुनिया के बाजार में कंप्टीशन खड़ा कर सकेंगे।

निश्चित रूप से एनसीआर का कारोबार नई ऊर्जा के साथ बाजार में छाप छोड़ेगा। अब हमको दिल्ली का डर नहीं रहेगा। - हरिओम चौहान, अध्यक्ष इंडस्ट्रीज एसोसिएशन।

रिटेल और थोक बाजार पर टैक्स के अंतर की मार पड़ रही थी। ऐसे में बाजार पर दिल्ली के कम टैक्स वाले और टैक्स चोरी कर लाए गए सामान का कब्जा था। वैट के बाद अब बाजार में पक्के बिल का गाजियाबाद का सामान छा सकेगा।
- राजीव त्यागी, अध्यक्ष मेडिसन एसोसिएशन।
 

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