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नरेश त्यागी हत्याकांड: फरार चल रहे विधायक के भाई गिरीश ने चकमा दे कोर्ट में किया सरेंडर
Mon, 08 Nov 2021 06:48 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 08 Nov 2021 06:48 PM IST
सार
पुलिस ने सद्दीक नगर निवासी जितेंद्र त्यागी और मनोज कुमार के अलावा डिफेंस कॉलोनी मोदीनगर निवासी अर्पण चौधरी तथा सौंदा रोड मोदीनगर निवासी विपिन शर्मा को गिरफ्तार किया था। जबकि लोहियानगर निवासी गिरीश पाल त्यागी घटना के बाद से ही फरार चल रहा था।
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जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गाजियाबाद के नरेश त्यागी हत्याकांड में फरार चल रहे गिरीश पाल त्यागी ने आखिरकार 14 माह बाद सरेंडर कर दिया। गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष समेत करीब 200 वकीलों के घेरे में गिरीश कोर्ट पहुंचा। सीजेएम कोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज करने पर उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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9 सितंबर 2020 को लोहिया नहर में मॉर्निंग वॉक के दौरान भाजपा विधायक अजीत पाल त्यागी के मामा नरेश त्यागी की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। 20 नवंबर 2020 में पुलिस ने खुलासा किया कि विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी ने ही भाड़े के शूर्ट्स से मामा की हत्या कराई थी। जितेंद्र त्यागी ने शूटर मुहैया कराए थे।
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पुलिस ने सद्दीक नगर निवासी जितेंद्र त्यागी और मनोज कुमार के अलावा डिफेंस कॉलोनी मोदीनगर निवासी अर्पण चौधरी तथा सौंदा रोड मोदीनगर निवासी विपिन शर्मा को गिरफ्तार किया था। जबकि लोहियानगर निवासी गिरीश पाल त्यागी घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। मृतक के परिजनों द्वारा मोर्चा खोलने पर गिरीश पाल त्यागी हाईकोर्ट पहुंचा था। उसने निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने या जमानत लेने के लिए दो माह तक गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई राहत न देते हुए निचली अदालत में जाने के आदेश दिए थे। वहीं, निचली अदालत ने भी गिरीश को सरेंडर के लिए आखिरी व चौथा मौका देते हुए 8 नवंबर की तारीख निर्धारित की थी।
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समय से पहले और 25 मिनट में हो गया सरेंडर
गिरीश पाल त्यागी सुबह करीब सवा 10 बजे कोर्ट परिसर में पहुंचा। इस दौरान गिरीश की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मोहित त्यागी, उनके पिता व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनीष त्यागी के अलावा करीब 200 वकील मौजूद थे। गिरीश त्यागी वकीलों के घेरे में सरेंडर करने कोर्ट पहुंचा। 10.40 बजे जमानत अर्जी खारिज होने पर उसे जेल भेजने के आदेश दिए गए। सुबह करीब सवा 11 बजे गिरीश के चिकित्सीय परीक्षण के बाद 12 बजे उसे जिला जेल में दाखिल कर दिया गया। अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने बताया कि आमतौर पर सरेंडर का वक्त साढ़े 12 बजे होता है। लेकिन, गिरीश पाल त्यागी का सरेंडर सवा 10 बजे ही करा दिया गया।
गिरफ्तार करने की बजाय मूकदर्शक बनी रही पुलिस
गिरीश त्यागी की सरेंडर की सूचना पुलिस को लग गई थी। जिसके चलते काफी संख्या में पुलिसबल तैनात था। गौर करने वाली बात यह है कि गिरीश को वकीलों के घेरे में देख पुलिस उसे गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। सिहानी गेट थाने की पुलिस गिरीश को गिरफ्तार करने की बजाय उसकी सुरक्षा में कोर्ट की हवालात के बाहर खड़ी रही।
एहतियात के तौर पर बुलाई पीएसी
गिरीश त्यागी के गिरफ्तार न होने पर नरेश त्यागी के परिजनों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था। आरोपी गिरीश के भाई अजीत पाल त्यागी वर्तमान में सत्ता पक्ष के विधायक हैं, जबकि पिता राजपाल त्यागी पूर्व मंत्री हैं। मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण कोर्ट परिसर में एहतियात के तौर पर पीएसी भी तैनात की गई।