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बिना लीज रेंट प्राइवेट संस्था को करोड़ों की जमीन देगा निगम
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Wed, 13 Jul 2016 11:48 PM IST
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लंढाौरा बाजार में पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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मुंबई में हेमा मालिनी के ट्रस्ट को बेहद सस्ते दामों पर जमीन देकर महाराष्ट्र की भाजपा सरकार मुश्किल में फंस गई है, लेकिन अब ऐसा ही गाजियाबाद नगर निगम में सत्तासीन भाजपा करने की तैयारी कर रही है।
नगर निगम डॉक्टरों की एक निजी संस्था ‘नीमा’ को बेशकीमती जमीन मुफ्त में देने की तैयारी कर रहा है। कुछ पार्षदों की सिफारिश पर इस संस्था को करीब 2200 वर्ग मीटर जमीन 15 साल के लिए दी जा रही है।
15 साल बाद फिर से इसकी अवधि अगले 15 साल के लिए बढ़ा दी जाएगी। निगम पार्षद ही पूर्व में प्राइवेट संस्था या बिल्डरों को जमीन दिए जाने का विरोध कर चुके हैं। पूर्व में ‘नीमा’ और हज हाउस को जमीन देने के यह प्रस्ताव कार्यकारिणी समिति में आए थे, लेकिन महापौर और पार्षदों ने जमीनों के सभी मामलों पर चर्चा करने से इंकार कर दिया था।
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अब फिर सदन में इन प्रस्तावों को रखा गया है। ‘नीमा’ संस्था निगम से जमीन लेकर इस पर आयुर्वेद चिकित्सालय और पंचकर्म केंद्र खोलने की तैयारी कर रही है। इसके लिए एमओयू का ड्राफ्ट भी तैयार हो चुका है।
यह संस्था करोड़ों की इस जमीन की एवज में न तो निगम को एक मुश्त पैसा देगी और न ही मासिक किराया। निगम पार्षद सिर्फ इस बात पर संतुष्ट हैं कि जमीन पर मालिकाना हक निगम का रहेगा।
एमओयू की शर्तों के अनुसार फिलहाल निगम 15 साल के लिए जमीन देगा, इसके बाद 15-15 साल के लिए फिर इस अनुबंध का विस्तार कर दिया जाएगा। एमओयू में यह भी नहीं बताया कि गया है कि यह जमीन कब तक इस संस्था के पास रहेगी।
बोर्ड एजेंडे में दिया अधूरा प्रस्ताव
नगर निगम अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को बोर्ड बैठक के एजेंडे में रखा है, लेकिन संस्था और निगम के बीच कौन सी शर्तें रहेंगी। कितने साल के लिए जमीन दी जाएगी। निगम को इससे क्या फायदा होगा इसकी जानकारी नहीं दी गई।
प्राइवेट संस्था को निशुल्क नगर निगम जमीन नहीं दे सकता। सदन में इस पर चर्चा करेंगे। नियम विरुद्ध काम नहीं करेंगे। निगम एक्ट के मुताबिक नगर निगम सिर्फ सरकारी विभाग को सामुदायिक सुविधाओं के लिए जमीन ट्रांसफर कर सकता है। - बाबू सिंह आर्य, बसपा पार्षद दल नेता
निगम अगर किसी संस्था के साथ प्राइवेट पार्टनरशिप करता है तो जमीन संस्था को दी जा सकती है। एक्ट के मुताबिक ही जमीन दी जाएगी। - राजेंद्र त्यागी, भाजपा पार्षद
प्राइवेट संस्था को जमीन देने के प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी। सदन के निर्णय के अनुरूप ही काम होगा। सदन इसे निरस्त करता है या निगम एक्ट इसकी अनुमति नहीं देता है तो जमीन नहीं दी जाएगी। - अशु वर्मा, महापौर
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नगर निगम डॉक्टरों की एक निजी संस्था ‘नीमा’ को बेशकीमती जमीन मुफ्त में देने की तैयारी कर रहा है। कुछ पार्षदों की सिफारिश पर इस संस्था को करीब 2200 वर्ग मीटर जमीन 15 साल के लिए दी जा रही है।
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15 साल बाद फिर से इसकी अवधि अगले 15 साल के लिए बढ़ा दी जाएगी। निगम पार्षद ही पूर्व में प्राइवेट संस्था या बिल्डरों को जमीन दिए जाने का विरोध कर चुके हैं। पूर्व में ‘नीमा’ और हज हाउस को जमीन देने के यह प्रस्ताव कार्यकारिणी समिति में आए थे, लेकिन महापौर और पार्षदों ने जमीनों के सभी मामलों पर चर्चा करने से इंकार कर दिया था।
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अब फिर सदन में इन प्रस्तावों को रखा गया है। ‘नीमा’ संस्था निगम से जमीन लेकर इस पर आयुर्वेद चिकित्सालय और पंचकर्म केंद्र खोलने की तैयारी कर रही है। इसके लिए एमओयू का ड्राफ्ट भी तैयार हो चुका है।
यह संस्था करोड़ों की इस जमीन की एवज में न तो निगम को एक मुश्त पैसा देगी और न ही मासिक किराया। निगम पार्षद सिर्फ इस बात पर संतुष्ट हैं कि जमीन पर मालिकाना हक निगम का रहेगा।
एमओयू की शर्तों के अनुसार फिलहाल निगम 15 साल के लिए जमीन देगा, इसके बाद 15-15 साल के लिए फिर इस अनुबंध का विस्तार कर दिया जाएगा। एमओयू में यह भी नहीं बताया कि गया है कि यह जमीन कब तक इस संस्था के पास रहेगी।
बोर्ड एजेंडे में दिया अधूरा प्रस्ताव
नगर निगम अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को बोर्ड बैठक के एजेंडे में रखा है, लेकिन संस्था और निगम के बीच कौन सी शर्तें रहेंगी। कितने साल के लिए जमीन दी जाएगी। निगम को इससे क्या फायदा होगा इसकी जानकारी नहीं दी गई।
प्राइवेट संस्था को निशुल्क नगर निगम जमीन नहीं दे सकता। सदन में इस पर चर्चा करेंगे। नियम विरुद्ध काम नहीं करेंगे। निगम एक्ट के मुताबिक नगर निगम सिर्फ सरकारी विभाग को सामुदायिक सुविधाओं के लिए जमीन ट्रांसफर कर सकता है। - बाबू सिंह आर्य, बसपा पार्षद दल नेता
निगम अगर किसी संस्था के साथ प्राइवेट पार्टनरशिप करता है तो जमीन संस्था को दी जा सकती है। एक्ट के मुताबिक ही जमीन दी जाएगी। - राजेंद्र त्यागी, भाजपा पार्षद
प्राइवेट संस्था को जमीन देने के प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी। सदन के निर्णय के अनुरूप ही काम होगा। सदन इसे निरस्त करता है या निगम एक्ट इसकी अनुमति नहीं देता है तो जमीन नहीं दी जाएगी। - अशु वर्मा, महापौर