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नक्शे में छेड़छाड़, फंसे कर्मचारी
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 01 Sep 2016 12:40 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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मिर्जापुर गांव स्थित सेना की एक जमीन के नक्शे में छेड़छाड़ करके उसकी नकल जारी करना कलक्ट्रेट कर्मचारियों को भारी पड़ गया है। डीएम ने मामले में संज्ञान लेते हुए नकल जारी करने वाले आरआरके अशोक कुमार गुप्ता और अभिलेख रखरखाव के लिए जिम्मेदार प्रवीण त्यागी को सस्पेंड कर दिया। इन दोनों समेत चार लोगों को नामजद करते हुए कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ कविनगर थाने में तहरीर दी गई है।
मामला मिर्जापुर स्थित सेना की जमीन से जुड़ा हुआ है। मेरठ छावनी के रक्षा संपदा अधिकारी एन. नाथ ने इस गांव के वाह साहब के बंदोबस्ती शिजरे की नकल के लिए कलक्ट्रेट स्थित अभिलेखागार में आवेदन किया था।
इस नकल को जारी करते हुए संबंधित संबंधित बंदोबस्ती शिजरे (मोमिया सीट) को छह जगहों से काट दिया गया। इससे करीब दो बीघा जमीन को कम कर दिया गया। माना जा रहा है कि इस खेल में कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से करोड़ों के वारे-न्यारे किए गए।
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मामला डीएम निधि केसरवानी तक पहुंचा तो उन्होंने जारी दोनों नकलों को तत्काल निरस्त करते हुए आरआरके अशोक कुमार गुप्ता और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार अरेंजर पटवार प्रवीण त्यागी को सस्पेंड कर दिया।
शुरूआती जांच दो अन्य कर्मचारी मदन ट्रेसर और इकबाल अहमद का नाम भी सामने आया है। चारों के खिलाफ डीएम के आदेश पर कविनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने को तहरीर दी गई है।
नगर निगम अब हर जोन में छोड़ेगा विज्ञापन ठेके
विज्ञापन ठेके में अब शहर में एक ही फर्म का वर्चस्व नहीं चलेगा। विज्ञापन नियमावली पास होने के बाद अब नगर निगम हर जोन में अलग-अलग विज्ञापन ठेके छोड़ेगा। इसकी शुरूआत निगम ने कविनगर जोन से की है।
नगर निगम ने कविनगर जोन में विज्ञापन ठेके के लिए टेंडर कॉल किए हैं। दो दिन यह टेंडर बिकेंगे और इसके बाद 9 सितंबर को यह टेंडर खोले जाएंगे। नगर निगम 2 साल के लिए यह ठेका प्रीमियम के आधार पर देगा।
सबसे ज्यादा प्रीमियम देने वाली फर्म को निगम यह ठेका देगा। ठेका लेने वाली फर्म को कविनगर जोन क्षेत्र में निर्धारित स्थानों पर होर्डिंग्स और यूनिपोल लगाने की अनुमति होगी।
अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए डीएमआरसी ने बदला डिजाइन
अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए पहले से निर्धारित जगह से सटी एक प्राइवेट कंपनी की जमीन पर स्टेशन बनाने के लिए डीएमआरसी तैयार है। इसके लिए डीएमआरसी ने अपने पुराने डिजाइन में बदलाव लाते हुए नए डिजाइन और जमीन की रिक्वायरमेंट से संबंधित प्रस्ताव जीडीए को भेजा है। उधर, जीडीए वीसी का कहना है कि उन्हें अभी भी पूर्व निर्धारित स्टेशन के लिए सेल्सटैक्स विभाग से जमीन मिलने का इंतजार है।
जीडीए पिछले एक साल से सेल्सटैक्स विभाग से उनकी दो हजार वर्गमीटर से अधिक जमीन अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए मांग रहा है। इस जमीन के बदले में जीडीए जमीन, पैसा या फ्लैट देने को तैयार है लेकिन यह मामला शासन के पास लंबित है।
इस बीच डीएमआरसी ने यह मुद्दा उठाया कि स्टेशन के लिए जमीन मिलने में देरी से मेट्रो प्रोजेक्ट लेट हो जाएगा। जीडीए ने सेल्सटैक्स विभाग की जमीन के पास ही एक प्राइवेट कंपनी से उनकी जमीन मांगी।
कंपनी स्टेशन के लिए जमीन देने को तैयार हो गई। यह बात जीडीए ने डीएमआरसी के सामने रखी तो उसने इस पर विचार करने के लिए समय मांगा। अब डीएमआरसी ने इस जमीन पर स्टेशन बनाने को हामी भरी है।
डीएमआरसी के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि उन्हें सेल्सटैक्स विभाग की जमीन के पास स्टेशन के लिए करीब 12-13 सौ वर्गमीटर जमीन चाहिए। यह जमीन स्टेशन के सिर्फ एक साइड के लिए चाहिए, दूसरी साइड के लिए जमीन मिल चुकी है।
इस संबंध में जीडीए को प्रस्ताव भेज दिया है जिसमें नए डिजाइन को दर्शाया गया है। उधर, जीडीए वीसी विजय यादव ने बुधवार को बताया कि उन्हें अब भी सेल्सटैक्स विभाग से जमीन मिलने का इंतजार है।
उन्होंने कहा कि जब तक विभाग उनकी जमीन की मांग को निरस्त नहीं कर देता, तब तक यह इंतजार रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राइवेट कंपनी से जमीन तब खरीदी जाएगी जब सेल्सटैक्स विभाग लिखित रूप से जमीन देने को मना कर देगा।
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मामला मिर्जापुर स्थित सेना की जमीन से जुड़ा हुआ है। मेरठ छावनी के रक्षा संपदा अधिकारी एन. नाथ ने इस गांव के वाह साहब के बंदोबस्ती शिजरे की नकल के लिए कलक्ट्रेट स्थित अभिलेखागार में आवेदन किया था।
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इस नकल को जारी करते हुए संबंधित संबंधित बंदोबस्ती शिजरे (मोमिया सीट) को छह जगहों से काट दिया गया। इससे करीब दो बीघा जमीन को कम कर दिया गया। माना जा रहा है कि इस खेल में कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से करोड़ों के वारे-न्यारे किए गए।
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मामला डीएम निधि केसरवानी तक पहुंचा तो उन्होंने जारी दोनों नकलों को तत्काल निरस्त करते हुए आरआरके अशोक कुमार गुप्ता और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार अरेंजर पटवार प्रवीण त्यागी को सस्पेंड कर दिया।
शुरूआती जांच दो अन्य कर्मचारी मदन ट्रेसर और इकबाल अहमद का नाम भी सामने आया है। चारों के खिलाफ डीएम के आदेश पर कविनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने को तहरीर दी गई है।
नगर निगम अब हर जोन में छोड़ेगा विज्ञापन ठेके
विज्ञापन ठेके में अब शहर में एक ही फर्म का वर्चस्व नहीं चलेगा। विज्ञापन नियमावली पास होने के बाद अब नगर निगम हर जोन में अलग-अलग विज्ञापन ठेके छोड़ेगा। इसकी शुरूआत निगम ने कविनगर जोन से की है।
नगर निगम ने कविनगर जोन में विज्ञापन ठेके के लिए टेंडर कॉल किए हैं। दो दिन यह टेंडर बिकेंगे और इसके बाद 9 सितंबर को यह टेंडर खोले जाएंगे। नगर निगम 2 साल के लिए यह ठेका प्रीमियम के आधार पर देगा।
सबसे ज्यादा प्रीमियम देने वाली फर्म को निगम यह ठेका देगा। ठेका लेने वाली फर्म को कविनगर जोन क्षेत्र में निर्धारित स्थानों पर होर्डिंग्स और यूनिपोल लगाने की अनुमति होगी।
अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए डीएमआरसी ने बदला डिजाइन
अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए पहले से निर्धारित जगह से सटी एक प्राइवेट कंपनी की जमीन पर स्टेशन बनाने के लिए डीएमआरसी तैयार है। इसके लिए डीएमआरसी ने अपने पुराने डिजाइन में बदलाव लाते हुए नए डिजाइन और जमीन की रिक्वायरमेंट से संबंधित प्रस्ताव जीडीए को भेजा है। उधर, जीडीए वीसी का कहना है कि उन्हें अभी भी पूर्व निर्धारित स्टेशन के लिए सेल्सटैक्स विभाग से जमीन मिलने का इंतजार है।
जीडीए पिछले एक साल से सेल्सटैक्स विभाग से उनकी दो हजार वर्गमीटर से अधिक जमीन अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए मांग रहा है। इस जमीन के बदले में जीडीए जमीन, पैसा या फ्लैट देने को तैयार है लेकिन यह मामला शासन के पास लंबित है।
इस बीच डीएमआरसी ने यह मुद्दा उठाया कि स्टेशन के लिए जमीन मिलने में देरी से मेट्रो प्रोजेक्ट लेट हो जाएगा। जीडीए ने सेल्सटैक्स विभाग की जमीन के पास ही एक प्राइवेट कंपनी से उनकी जमीन मांगी।
कंपनी स्टेशन के लिए जमीन देने को तैयार हो गई। यह बात जीडीए ने डीएमआरसी के सामने रखी तो उसने इस पर विचार करने के लिए समय मांगा। अब डीएमआरसी ने इस जमीन पर स्टेशन बनाने को हामी भरी है।
डीएमआरसी के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि उन्हें सेल्सटैक्स विभाग की जमीन के पास स्टेशन के लिए करीब 12-13 सौ वर्गमीटर जमीन चाहिए। यह जमीन स्टेशन के सिर्फ एक साइड के लिए चाहिए, दूसरी साइड के लिए जमीन मिल चुकी है।
इस संबंध में जीडीए को प्रस्ताव भेज दिया है जिसमें नए डिजाइन को दर्शाया गया है। उधर, जीडीए वीसी विजय यादव ने बुधवार को बताया कि उन्हें अब भी सेल्सटैक्स विभाग से जमीन मिलने का इंतजार है।
उन्होंने कहा कि जब तक विभाग उनकी जमीन की मांग को निरस्त नहीं कर देता, तब तक यह इंतजार रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राइवेट कंपनी से जमीन तब खरीदी जाएगी जब सेल्सटैक्स विभाग लिखित रूप से जमीन देने को मना कर देगा।