{"_id":"5883ab494f1c1bfa7aeffbcb","slug":"madan-bhaiya-and-sudn-rawat-nomination","type":"story","status":"publish","title_hn":"मदन भैया और सुधन रावत ने किया नामांकन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मदन भैया और सुधन रावत ने किया नामांकन
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sun, 22 Jan 2017 12:24 AM IST
विज्ञापन
सुधन रावत
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नामांकन प्रक्रिया के पांचवें दिन लोनी से रालोद प्रत्याशी के रूप में मदन भैया और मुरादनगर से बसपा प्रत्याशी सुधन रावत ने नामांकन दाखिल किया। हालांकि शनिवार को एक भी निर्दलीय प्रत्याशी अपना पर्चा दाखिल करने नहीं पहुंचा।
ऐसे में माना जा रहा है कि अब सोमवार को गाजियाबाद की विभिन्न विधानसभाओं से बड़ी संख्या में प्रत्याशी अपना नामांकन दाखिल करेंगे।शनिवार दोपहर मदन भैया अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने कलक्ट्रेट पहुंचे।
उनके साथ गई समर्थकों की भीड़ को पुलिस ने कलक्ट्रेट मेन गेट पर ही रोक दिया। चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित अपने पांच समर्थकों के साथ ही मदन भैया नामांकन कक्ष तक पहुंचे और अपना पर्चा दाखिल किया।
विज्ञापन
इसके करीब आधा घंटे बाद ही मुरादनगर से बसपा प्रत्याशी सुधन रावत अपनी पत्नी विभा रावत और अन्य समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। मुरादनगर आरओ के कक्ष में उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया। पत्रकारों से बात करते हुए सुधन रावत ने कहा कि प्रदेश में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और चरम भ्रष्टाचार को वह अपना मुद्दा बनाएंगे।
मेयर-सांसद के बाद अब विधायकी के फेर में सुधन
मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी सुधन रावत इससे पूर्व एक बार एमएलसी, दो बार मेयर और एक बार सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं। 2012 में मेयर, 2014 में सांसद और फिर 2016 में मेयर उपचुनाव उन्होंने सपा के टिकट से लड़ा था।
जबकि एमएलसी का चुनाव वह रालोद के टिकट पर लड़े थे। यह अलग बात है कि इनमें से किसी भी चुनाव में जनता ने उन्हें नहीं चुना। इस बार सुधन रावत ने विधायक का पर्चा भरा है।
चार बार विधायक रह चुके हैं मदन भैया
रालोद प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल करने वाले मदन भैया की छवि बाहुबली के रूप में पहचानी जाती है। वह लगातार चार बार क्षेत्र से विधायक चुने जा चुके हैं। 1991 में जनता पार्टी, 1993 में एसपी, 2002 में निर्दलीय और 2007 में वह रालोद के टिकट से ही खेकड़ा विधानसभा का चुनाव जीते थे।
2012 में हुए नए परिसीमन में खेकड़ा विधानसभा सीट के बजाय अब इसे लोनी विधानसभा सीट के नाम से पहचाना जाता है। 2012 में नए परिसीमन के बाद मदन भैया रालोद के ही टिकट से चुनाव लडे़ थे, मगर बसपा प्रत्याशी जाकिर अली से हार गए थे।
प्रशासन की टेंशन बनने लगे हैं निर्दलीय प्रत्याशी
निर्दलीय प्रत्याशी अब प्रशासन का सिरदर्द बनने लगे हैं। प्रतिदिन जिस तरह निर्दलीय प्रत्याशी गाजियाबाद की सभी विधानसभाओं से नामांकन फार्म लेकर जा रहे हैं, उससे प्रशासन टेंशन में आ गया है।
शनिवार को भी गाजियाबाद की तीन विधानसभाओं से 17 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन फार्म लिया। इनमें साहिबाबाद से 6, मुरादनगर से 8 और मोदीनगर से 3 प्रत्याशियों ने नामांकन फार्म लिया। प्रशासन की परेशानी का कारण यह है कि अगर एक विधानसभा सीट पर 16 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में रहेंगे तो प्रत्येक बूथ पर दो ईवीएम लगानी पडे़ंगी।
विज्ञापन
ऐसे में माना जा रहा है कि अब सोमवार को गाजियाबाद की विभिन्न विधानसभाओं से बड़ी संख्या में प्रत्याशी अपना नामांकन दाखिल करेंगे।शनिवार दोपहर मदन भैया अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने कलक्ट्रेट पहुंचे।
विज्ञापन
उनके साथ गई समर्थकों की भीड़ को पुलिस ने कलक्ट्रेट मेन गेट पर ही रोक दिया। चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित अपने पांच समर्थकों के साथ ही मदन भैया नामांकन कक्ष तक पहुंचे और अपना पर्चा दाखिल किया।
विज्ञापन
इसके करीब आधा घंटे बाद ही मुरादनगर से बसपा प्रत्याशी सुधन रावत अपनी पत्नी विभा रावत और अन्य समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। मुरादनगर आरओ के कक्ष में उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया। पत्रकारों से बात करते हुए सुधन रावत ने कहा कि प्रदेश में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और चरम भ्रष्टाचार को वह अपना मुद्दा बनाएंगे।
मेयर-सांसद के बाद अब विधायकी के फेर में सुधन
मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी सुधन रावत इससे पूर्व एक बार एमएलसी, दो बार मेयर और एक बार सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं। 2012 में मेयर, 2014 में सांसद और फिर 2016 में मेयर उपचुनाव उन्होंने सपा के टिकट से लड़ा था।
जबकि एमएलसी का चुनाव वह रालोद के टिकट पर लड़े थे। यह अलग बात है कि इनमें से किसी भी चुनाव में जनता ने उन्हें नहीं चुना। इस बार सुधन रावत ने विधायक का पर्चा भरा है।
चार बार विधायक रह चुके हैं मदन भैया
रालोद प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल करने वाले मदन भैया की छवि बाहुबली के रूप में पहचानी जाती है। वह लगातार चार बार क्षेत्र से विधायक चुने जा चुके हैं। 1991 में जनता पार्टी, 1993 में एसपी, 2002 में निर्दलीय और 2007 में वह रालोद के टिकट से ही खेकड़ा विधानसभा का चुनाव जीते थे।
2012 में हुए नए परिसीमन में खेकड़ा विधानसभा सीट के बजाय अब इसे लोनी विधानसभा सीट के नाम से पहचाना जाता है। 2012 में नए परिसीमन के बाद मदन भैया रालोद के ही टिकट से चुनाव लडे़ थे, मगर बसपा प्रत्याशी जाकिर अली से हार गए थे।
प्रशासन की टेंशन बनने लगे हैं निर्दलीय प्रत्याशी
निर्दलीय प्रत्याशी अब प्रशासन का सिरदर्द बनने लगे हैं। प्रतिदिन जिस तरह निर्दलीय प्रत्याशी गाजियाबाद की सभी विधानसभाओं से नामांकन फार्म लेकर जा रहे हैं, उससे प्रशासन टेंशन में आ गया है।
शनिवार को भी गाजियाबाद की तीन विधानसभाओं से 17 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन फार्म लिया। इनमें साहिबाबाद से 6, मुरादनगर से 8 और मोदीनगर से 3 प्रत्याशियों ने नामांकन फार्म लिया। प्रशासन की परेशानी का कारण यह है कि अगर एक विधानसभा सीट पर 16 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में रहेंगे तो प्रत्येक बूथ पर दो ईवीएम लगानी पडे़ंगी।