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Ghaziabad News: दूसरे की परीक्षा देने के आरोप से आईएएस नवीन बरी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jan 2026 01:33 AM IST
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IAS officer Naveen acquitted of charges of appearing in someone else's exam
गाजियाबाद। आईबीपीएस परीक्षा मामले में दोषी ठहराए गए आईएएस नवीन तंवर को अपीलीय सीबीआई अदालत से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को गलत मानते हुए उसे रद कर दिया। अदालत ने नवीन तंवर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने जिन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना था, वे भरोसेमंद नहीं हैं।
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16 मार्च 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई ने सुनाई थी सजा
दूसरे की जगह परीक्षा देने के दोषी 2019 बैच के आईएएस अधिकारी नवीन तंवर को 16 मार्च 2024 को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवम वर्मा ने हिमाचल प्रदेश के चंबा में एडीएम नवीन पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। हालांकि, उन्हें जमानत मिल गई थी।
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13 दिसंबर 2014 को दूसरे की परीक्षा देने का था आरोप
नवीन तंवर पर आरोप था कि 13 दिसंबर 2014 को गाजियाबाद में आयोजित हुई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) की क्लर्क भर्ती परीक्षा में झांसी के अमित की जगह परीक्षा दी थी। सीबीआई ने सॉल्वर गिरोह पकड़ा था, जिसमें नवीन समेत छह आरोपी शामिल थे। सुनवाई के दौरान वर्ष 2019 में नवीन का चयन आईएएस में हुआ था। मामले में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि परीक्षा के दौरान धोखाधड़ी की गई, अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों से परीक्षा दिलाई गई और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
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संदेह के आधार पर किसी को नहीं ठहराया जा सकता दोषी
अपील पर सुनवाई करते हुए विशेष सीबीआई अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने 51 पेज के फैसले में कहा कि सिर्फ संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते और कई अहम बातें पहली बार अदालत में कही गईं, जिनकी पुष्टि पहले जांच के दौरान नहीं हुई थी। निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसलिए दोषसिद्धि और सजा दोनों को रद किया जाता है और नवीन तंवर को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है।
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