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एक साल में दोगुना हो गया ‘आधी आबादी’ का उत्पीड़न

Wed, 13 Apr 2016 12:50 AM IST
रश्मि ओझा/ गाजियाबाद
रश्मि ओझा/ गाजियाबाद Updated Wed, 13 Apr 2016 12:50 AM IST
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Has doubled in a year, 'half' of harassment
अपराध्‍ा - फोटो : अमर उजाला
महिलाएं न तो घर के अंदर सुरक्षित हैं और न ही बाहर। यूपी में लाख कोशिशों के बावजूद महिलाओं के प्रति अपराध रुक नहीं पा रहे हैं। वुमेन पावर लाइन 1090 से मिले आंकडे़ बताते हैं कि ऐसे अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।
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पिछले एक साल के दौरान ही 4.90 लाख से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। अहम बात यह है कि शहरों में महिला प्रताड़ना के मामले दोगुने हुए हैं। गाजियाबाद में 2015 मार्च तक जहां 2602 मामले आए थे, वहीं 2016 मार्च तक यह आंकड़ा बढ़कर 4482 हो गया है। यानी मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की। नोएडा, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत और मेरठ का भी यही हाल है।
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महिलाओं पर उत्पीड़न के मामले सबसे ज्यादा लखनऊ में हैं। दूसरे नंबर पर कानपुर और तीसरे पर इलाहाबाद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी महिला अपराध कम नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि यह क्षेत्र चौथे नंबर पर है।
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टॉप-5 की इस सूची में पांचवें नंबर पर आगरा का नाम दर्ज है। महिलाओं के लिए सोशल साइट्स और मोबाइल फोन भी जान की आफत बने हुए हैं। सबसे अधिक फोन और सोशल साइट्स पर परेशान करने के मामले दर्ज हुए हैं।

यूपी में एक साल के दौरान दर्ज की गई 4.90 लाख शिकायतों में से 4.66 लाख मामले फोन पर परेशान करने वालों के हैं। इनमें छात्राएं सबसे अधिक प्रताड़ित हैं।

अपने ही दे रहे ज्यादा दर्द

सभी घर में ही अपने आप को सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन महिलाओं की व्यथा यह है कि सबसे अधिक दर्द उन्हें अपने ही दे रहे हैं। इनमें अधिकांश रिश्तेदार, नजदीकी दोस्त या पड़ोसी शामिल हैं।

अधिकांश मामले ऐसी छात्राओं और युवतियों से जुड़े हुए हैं जो 15 से 25 वर्ष की उम्र वर्ग के हैं।  गाजियाबाद में घरेलू उत्पीड़न के मामले 1302 हैं। इसमें शारीरिक शोषण के 840, दुष्कर्म के 140 और मानसिक प्रताड़ना के 322 मामले शामिल हैं।


समाज में साक्षरता बढ़ी है, लेकिन नैतिक मूल्यों का अभाव हो गया है। इसके साथ ही दंड व्यवस्था कमजोर है, जिसकी वजह से इस तरह के अपराध बढ़ रहे हैं। इस तरह के अपराधियों को जब तक ऐसे लोगों को कड़ा दंड नहीं मिलेगा अपराध बढ़ते रहेंगे। - डा. जेएल रैना , समाजशास्त्री

महिलाओं के खिलाफ  दर्ज आंकड़े एक नजर में
जिला            2015 मार्च   मार्च 2016    कामकाजी महिलाएं   घरेलू    छात्राएं

गाजियाबाद:-    2602       4482                1009                  1536      2014
नोएडा:-          1214        2399                781                  741        939
हापुड़:-            731         1680                  153                 648        829
बुलंदशहर:-      2415        5320                  538                 2385     2399
मेरठ :-           5576       11623               1692                4344      5587
बागपत:-        1493         3017               256               1337     1424
बिजनौर :-       2272        4769              582                  1894      2293

मुजफ्फरनगर :- 4028        8301            876                 3698      3727
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